Epstein Files Controversy: राजनीति के अखाड़े में जब शब्द तीर बनकर चलते हैं, तो उनकी गूंज दूर तक सुनाई देती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक पुराना बयान— “मैं पीएम मोदी का पॉलिटिकल करियर बर्बाद नहीं करना चाहता” —अचानक भारतीय राजनीति के केंद्र में आ गया। इस एक वाक्य ने मानों बारूद में चिंगारी का काम किया।
Epstein Files Controversy: क्या है ‘एपस्टीन फाइल्स’ का कनेक्शन?
जैसे ही यह बयान चर्चा में आया, विपक्ष ने इसे हाथों-हाथ लिया और सरकार पर हमला बोल दिया। विपक्षी दलों ने सवाल उठाए कि आखिर एक विदेशी राष्ट्रप्रमुख के पास ऐसा क्या है जिससे भारत के प्रधानमंत्री का करियर प्रभावित हो सकता है? फिर क्या था? सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इस बयान को विवादित ‘एपस्टीन फाइल्स’ से जोड़कर देखा जाने लगा। कयास लगाए गए कि क्या कोई ऐसी गुप्त जानकारी है जिसे ट्रंप छिपा रहे हैं? इस ‘मिस्ट्री’ ने मामले को बेहद ड्रामेटिक बना दिया। (Epstein Files Controversy)
आपको बता दें, जब विवादों का तूफान बढ़ने लगा, तब भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने कमान संभाली। मंत्रालय ने स्पष्ट और कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया देते हुए साफ कर दिया कि, इन दावों में कोई सच्चाई नहीं है और इन्हें संदर्भ से बाहर खींचकर पेश किया जा रहा है। भारत और अमेरिका के संबंध किसी व्यक्ति विशेष के बयान से ऊपर हैं। मंत्रालय के इस स्पष्टीकरण ने अफवाहों के बाजार पर मानों ‘स्टॉप की टेप’ लगा दी और विरोधियों के तरकश से तीर छीन लिए हैं।









