UP Politics: राजनीति भी अजीब चीज़ है साहब, यहाँ न कोई स्थायी दुश्मन है और न ही स्थायी ठिकाना। यहाँ गिरना, संभलना और फिर पाला बदलना उतना ही लाज़मी है जितना चुनाव से पहले वादों की झड़ी। उत्तर प्रदेश की सियासत के पुराने खिलाड़ी और पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने एक बार फिर अपना ‘ठिकाना’ बदल लिया है।
कभी मायावती के दाहिने हाथ रहे और फिर कांग्रेस का दामन थामने वाले सिद्दीकी अब समाजवादी पार्टी की ‘साइकिल’ पर सवार हो गए हैं। इसे राजनीति की वो ‘चटपटी चाट’ कहिए, जिसका स्वाद जहाँ बेहतर मिले, नेता वहीं अपनी प्लेट सजा लेते हैं। (UP Politics)
UP Politics: सिद्दीकी का नया पाला बदलना
रविवार को सपा दफ्तर में हलचल तेज़ थी। अखिलेश यादव की मौजूदगी में नसीमुद्दीन सिद्दीकी समेत कई दिग्गजों ने लाल टोपी पहनी। सिद्दीकी ने भावुक कार्ड खेलते हुए कहा, “अखिलेश जी से पुराने रिश्ते हैं, अब उन्हीं के रास्ते पर चलेंगे।” तो वहीं पूर्व मंत्री अनीस अहमद उर्फ फूल बाबू के आने पर अखिलेश ने भी चुटकी लेते हुए कहा— “जब से फूल बाबू आए हैं, किसी और का फूल मुरझा रहा है।” (UP Politics)
फिलहाल, आपको बता दें, प्रतापगढ़ के पूर्व विधायक राजकुमार पाल और AIMIM के पूर्व नेता दानिश खान ने भी साइकिल की रफ्तार बढ़ाने का फैसला किया है। अखिलेश यादव ने इस भारी भरकम जॉइनिंग को ‘PDA का प्रेम प्रसार’ करार दिया। उन्होंने साफ कहा कि बहुजन समाज और सपा का रिश्ता अब और गहरा होने जा रहा है, जो 2027 में बीजेपी की ‘हवा’ खराब कर देगा।
फिलहाल, 2027 के महाकुंभ से पहले यह दलबदल केवल नेताओं का आना-जाना नहीं है, बल्कि समीकरणों को साधने की वो कवायद है जिसे ‘अवसरवाद’ कहें या ‘रणनीति’, लेकिन जनता की नजर में यह शुद्ध राजनीति है। (UP Politics)









