Land for Job Case: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट (Rouse Avenue Court) ने सोमवार को जमीन के बदले नौकरी (Land-for-job) से जुड़े सीबीआई (CBI) मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए हैं। कोर्ट में पेश होने के बाद लालू प्रसाद और राबड़ी देवी दोनों ने अदालत में खुद को निर्दोष बताया और आरोपों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे मुकदमे का सामना करेंगे।
Land for Job Case: अदालत ने तय किए आरोप
स्पेशल जज विशाल गोगे ने आरोप तय करते हुए कहा कि साक्ष्यों से प्रथम दृष्टया पता चलता है कि लालू यादव ने रेल मंत्रालय को अपनी ‘निजी जागीर’ की तरह इस्तेमाल किया, जहां सार्वजनिक रोजगार को जमीन के बदले ‘बार्गेनिंग चिप’ के रूप में इस्तेमाल किया गया। मामले का नियमित ट्रायल 9 मार्च 2026 से शुरू होने की उम्मीद है।
यह मामला रेलवे ग्रुप डी की नौकरियां उम्मीदवारों को जमीन के बदले उपलब्ध कराने के कथित अपराध से संबंधित है। कोर्ट ने उनकी उम्र और खराब स्वास्थ्य को देखते हुए लालू यादव और राबड़ी देवी को भविष्य की सुनवाई के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की अनुमति दी है। (Land for Job Case)
9 जनवरी को राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने भूमि-के-बदले-नौकरी घोटाले के मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया।

पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव पर आरोप
आरोप तय करने का निर्देश देते हुए, विशेष सीबीआई अदालत ने टिप्पणी की थी कि प्रथम दृष्टया, लालू प्रसाद यादव के मार्गदर्शन में एक साजिश रची गई थी, जिसमें सरकारी नौकरियों का इस्तेमाल अपने परिवार के सदस्यों के माध्यम से इच्छुक नौकरी चाहने वालों से अचल संपत्ति हासिल करने के साधन के रूप में किया गया था। (Land for Job Case)
अदालत ने आगे कहा था कि लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार एक गिरोह की तरह काम कर रहा था।
अदालत ने मुख्य कार्मिक अधिकारियों (CPO) और रेलवे अधिकारियों सहित 52 आरोपियों को बरी कर दिया। कार्यवाही के दौरान पांच आरोपियों की मृत्यु हो गई। सीबीआई ने 103 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। उन पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराधों के आरोप तय किए गए थे।
बहस के दौरान, लालू प्रसाद यादव के वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने तर्क दिया कि जमीन के बदले नौकरी का मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि उम्मीदवारों को जमीन के बदले नौकरी दी गई थी। बिक्री के दस्तावेज यह दर्शाते हैं कि जमीनें पैसों के बदले खरीदी गई थीं। (Land for Job Case)
उन्होंने आगे कहा कि पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने किसी भी उम्मीदवार की सिफारिश नहीं की थी। किसी भी महाप्रबंधक ने यह नहीं कहा है कि वे कभी लालू प्रसाद यादव से मिले थे। ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह पता चले कि बिना मुआवजे के कोई जमीन ली गई थी। जमीन खरीदी गई थी।

राबड़ी देवी की ओर से दलीलें
इससे पहले, राबड़ी देवी की ओर से दलीलें देते हुए कहा गया कि राबड़ी देवी ने जमीन खरीदी और उसके लिए पैसे दिए। पैसे देकर जमीन खरीदना अपराध नहीं है। किसी भी आरोपी उम्मीदवार को कोई फायदा नहीं पहुंचाया गया। इन लेन-देन का आपस में कोई संबंध नहीं है। (Land for Job Case)
विशेष न्यायाधीश ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती, हेमा यादव, तेजस्वी प्रसाद यादव, तेज प्रताप यादव, भोला यादव, आरके महाजन और प्रेम चंद गुप्ता के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के सामान्य आरोप तय करने का निर्देश दिया।
सार्वजनिक रोजगार में भ्रष्टाचार
अदालत ने आगे कहा कि गंभीर संदेह के आधार पर अदालत पाती है कि लालू प्रसाद यादव के मार्गदर्शन में एक व्यापक आपराधिक साजिश रची गई थी, जिसके तहत सार्वजनिक रोजगार को सौदेबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हुए अपनी पत्नी राबड़ी देवी, बेटियों मीसा भारती और हेमा यादव के साथ-साथ बेटों तेजस्वी प्रसाद यादव और तेज प्रताप यादव के माध्यम से इच्छुक नौकरी चाहने वालों से अचल संपत्तियां प्राप्त की गईं। (Land for Job Case)
सीबीआई ने 18 मई, 2022 को मामला दर्ज किया था और अलग-अलग समय पर दो आरोपपत्र और दो पूरक आरोपपत्र दाखिल किए थे। आरोप है कि जमीन के बदले ग्रुप डी रेलवे की नौकरियां दी गईं। अदालत ने टिप्पणी की, ‘भारतीय रेलवे के कई आरोपी महाप्रबंधक प्रथम दृष्टया अपने विवेक का दुरुपयोग करते हुए रेलवे में ग्रुप डी के कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए ये नियुक्तियां करते हुए पाए गए हैं।’
अदालत ने गौर किया कि आरोपी मुख्य कार्मिक अधिकारियों के पास न तो प्रतिस्थापन नियुक्त करने का अधिकार था और न ही वे रेल मंत्री के प्रभाव में थे। अदालत ने आदेश दिया, ‘सभी आरोपी मुख्य कार्मिक अधिकारियों को बर्खास्त किया जाना चाहिए।’ (Land for Job Case)









