Swami Avimukteshwaranand Row: आज हम बात कर रहे हैं उस आस्था की, जो भारतीय संस्कृति की आत्मा है। लेकिन क्या हो जब वही आत्मा छलनी हो जाए? जब गुरु की शरण में गए शिष्य ही न्याय की गुहार लगाने लगें?
वाराणसी, जिसे हम मोक्ष की नगरी कहते हैं, वहां से एक ऐसी खबर आई है, जिसने हर श्रद्धालु के दिल को दहला दिया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर दर्ज एक संगीन मामले ने आस्था को मर्यादा की कसौटी पर खड़ा कर दिया है। आज उन पीड़ित शिष्यों का मेडिकल परीक्षण होना है, जिनकी सिसकियां अब इंसाफ की दहलीज पर पहुँच चुकी हैं।
Swami Avimukteshwaranand Row: पत्थर में भगवान ढूंढने वाली संस्कृति और कड़वा विश्वासघात
यह सिर्फ एक FIR नहीं है, यह उस भरोसे का टूटना है जिसे हम पत्थर में भी भगवान ढूंढने के लिए इस्तेमाल करते हैं। धर्म की रक्षा का संकल्प लेने वाले जब खुद आरोपों के घेरे में आते हैं, तो इंसानियत कांप उठती है। वाराणसी पुलिस ने अब अपनी जांच की रफ्तार बढ़ा दी है।
आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। आज उन मासूमों की सच्चाई मेडिकल रिपोर्ट की फाइलों में दर्ज होगी। आरोप गंभीर हैं, और दर्द उससे भी गहरा। जिस गुरु को पिता समान मानकर समर्पण किया गया, अगर वहां से विश्वासघात की बू आती है, तो यह पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है। क्या यह एक धर्मयुद्ध है? या फिर उस पाखंड के खिलाफ लड़ाई, जिसने धर्म के चोले में खुद को छिपा रखा है? (Swami Avimukteshwaranand Row)
धर्म हमें रक्षा करना सिखाता है, शोषण नहीं
यह लड़ाई किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि उस सोच के खिलाफ है, जो आस्था की आड़ में मर्यादा की सीमाएं लांघती है। धर्म हमें रक्षा करना सिखाता है, शोषण नहीं। आज पूरा देश उन शिष्यों की आँखों में न्याय की चमक देखना चाहता है। पुलिस की एक-एक फाइल और आज का मेडिकल परीक्षण यह तय करेगा कि क्या इस बार भी ‘इंसाफ’ जीतेगा या फिर ‘आस्था’ के नाम पर सच को दबा दिया जाएगा।
कानून अपना काम कर रहा है, लेकिन सवाल हमारी नैतिकता का है। अगर आस्था की बुनियाद ही विश्वासघात पर टिकी होगी, तो आने वाली पीढ़ियां धर्म पर यकीन कैसे करेंगी? हम उम्मीद करते हैं कि सच सामने आएगा और मर्यादा की रक्षा होगी। (Swami Avimukteshwaranand Row)









