India-Canada Deal: भारत और कनाडा के रिश्तों जमी बर्फ अब पिघल चुकी है और इसकी तपिश से भारत के परमाणु रिएक्टर दहकने के लिए तैयार हैं। कूटनीतिक खींचतान के लंबे दौर के बाद, दोनों देशों ने एक ऐसे ऐतिहासिक यूरेनियम समझौते पर मुहर लगा दी है, जो न केवल भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि वैश्विक राजनीति के समीकरण भी बदल देगा।

India-Canada Deal: भारत के परमाणु बिजली घरों के लिए संजीवनी
आपको बता दें कि, इस समझौते के तहत कनाडा, जो दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम उत्पादकों में से एक है, भारत को परमाणु ईंधन की निर्बाध आपूर्ति करेगा। और यह डील भारत के परमाणु बिजली घरों के लिए ‘ऑक्सीजन’ का काम करेगी। कोयले पर निर्भरता कम करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने के भारत के लक्ष्य को इस समझौते से जबरदस्त मजबूती मिलेगी।
$50 बिलियन का संकल्प
सिर्फ यूरेनियम ही नहीं, बल्कि दोनों देशों ने आर्थिक मोर्चे पर भी एक-दूसरे का हाथ थाम लिया है। भारत और कनाडा ने एलान किया है कि साल 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को $50 बिलियन (लगभग 4.15 लाख करोड़ रुपये) के पार ले जाया जाएगा। यह आंकड़ा बताता है कि दोनों देश अब पुरानी तल्खियों को पीछे छोड़कर एक नई आर्थिक धुरी बनाने की ओर अग्रसर हैं। (India-Canada Deal)

विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ समय से जारी तनाव के बाद यह समझौता एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ है। और यह समझौता साबित करता है कि व्यापार और ऊर्जा की जरूरतें राजनीतिक मतभेदों से ऊपर हैं। देखा जाए तो कनाडा अब भारत के सबसे भरोसेमंद ऊर्जा भागीदारों की श्रेणी में आ गया है। (India-Canada Deal)









