नई दिल्ली: Pm Modi On Oil Crisis: मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-इजरायल युद्ध के बीच पूरी दुनिया की नजरें कच्चे तेल की सप्लाई पर टिकी हैं। इसी गंभीर मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज लोकसभा में देश को भरोसा दिलाया कि भारत किसी भी बड़े संकट से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। पीएम मोदी ने संसद में भविष्य में तेल संकट से बचने का एक ब्लू प्रिंट पेश किया, जिसे सरकार ने तीन हिस्सों— शॉर्ट टर्म (कम अवधि), मिडियम टर्म (मध्यम अवधि) और लॉन्ग टर्म (लंबी अवधि)—में बांटा है। प्रधानमंत्री ने साफ किया कि भारत अब केवल पुराने स्रोतों पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि तेल की आपूर्ति के लिए कई नए देशों के साथ सीधे संपर्क में है।
होर्मुज की चुनौती और सरकार की मुस्तैदी
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) के महत्व और वहां पैदा हुई चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि भारत में कच्चे तेल, गैस और खाद (फर्टिलाइजर) जैसी जरूरी चीजों का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से आता है। युद्ध की वजह से इस रूट पर जहाजों की आवाजाही काफी कठिन हो गई है, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कमी न होने पाए। उन्होंने सदन को जानकारी दी कि सरकार की कूटनीति और मॉनिटरिंग की वजह से ही फिलहाल सप्लाई चेन पर कोई गंभीर असर नहीं पड़ा है। Pm Modi On Oil Crisis
LPG और घरेलू उत्पादन पर ज़ोर
प्रधानमंत्री ने एक महत्वपूर्ण आंकड़ा साझा करते हुए बताया कि भारत अपनी कुल एलपीजी (LPG) जरूरत का करीब 60% हिस्सा आयात करता है। युद्ध की वजह से पैदा हुई अनिश्चितता को देखते हुए सरकार ने एक खास रणनीति अपनाई है, जिसमें घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को सबसे पहली प्राथमिकता दी जा रही है। इसके साथ ही, पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत अब केवल आयात पर निर्भर रहने के बजाय देश के भीतर ही एलपीजी और कच्चे तेल का घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता का असर आम आदमी की रसोई और जेब पर न पड़े। Pm Modi On Oil Crisis
कूटनीति और आत्मनिर्भरता का मेल
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री का यह बयान यह संदेश देता है कि भारत अब ऊर्जा के क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर’ होने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है। एक तरफ जहां हम नए देशों से तेल खरीदकर अपनी निर्भरता को बांट रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ घरेलू संसाधनों को भी मजबूत किया जा रहा है। पीएम मोदी ने आश्वस्त किया कि देशभर में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई सुचारू बनी रहेगी। अंतरराष्ट्रीय राजनीति के इस दौर में भारत का यह ‘थ्री-लेयर प्लान’ आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत कवच साबित हो सकता है। Pm Modi On Oil Crisis
इथेनॉल और सौर ऊर्जा ने कैसे बचाए देश के अरबों रुपये?
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में भारत की ऊर्जा सुरक्षा का एक मजबूत खाका पेश किया। पीएम मोदी ने बताया कि पिछले एक दशक में इथेनॉल ब्लेंडिंग (Ethanol Blending) को बढ़ावा देने की नीति का असली फायदा अब देश को मिल रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि 10 साल पहले पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की क्षमता महज 1 से 1.5 प्रतिशत थी, जो आज बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है। इस एक कदम की वजह से भारत को अब हर साल 4.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल कम खरीदना पड़ रहा है, जिससे विदेशी मुद्रा की भारी बचत हो रही है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भी कम हुआ है।
रेलवे का विद्युतीकरण और इलेक्ट्रिक बसों का दम
प्रधानमंत्री ने ऊर्जा खपत कम करने के लिए रेलवे और परिवहन क्षेत्र में हुए बड़े बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर रेलवे के विद्युतीकरण पर तेजी से काम नहीं किया गया होता, तो भारत को हर साल करीब 180 करोड़ लीटर अतिरिक्त डीजल आयात करना पड़ता। इसके साथ ही, केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को दी गई 15 हजार इलेक्ट्रिक बसों ने भी कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता को कम करने में बड़ी भूमिका निभाई है। ये सभी प्रयास मिलकर भारत की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहे हैं।
सौर ऊर्जा और ‘पीएम सूर्यघर’ योजना की सफलता
ऊर्जा के क्षेत्र में ‘गुड न्यूज’ देते हुए पीएम मोदी ने बताया कि पिछले 11 वर्षों में देश की सौर ऊर्जा क्षमता 3 गीगावाट से बढ़कर 140 गीगावाट हो गई है। पिछले एक साल के भीतर ही देश भर में लगभग 40 लाख रूफटॉप सोलर पैनल लगाए गए हैं, जिसमें ‘पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना’ का सबसे बड़ा योगदान रहा है। इसके अलावा, ‘गोवर्धन योजना’ के तहत देश में 200 कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट शुरू किए जा चुके हैं, जो कचरे से कंचन बनाने और स्वच्छ ईंधन की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो रहे हैं।
भविष्य की तैयारी: न्यूक्लियर और हाइड्रो पावर
आने वाले समय के लिए भारत की तैयारी को और पुख्ता करने के लिए प्रधानमंत्री ने कई नई योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि ‘शांति अधिनियम’ के तहत देश में नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy) उत्पादन को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। साथ ही, हाल ही में मंजूर की गई ‘स्मॉल हाइड्रोपावर डेवलपमेंट स्कीम’ के जरिए अगले पांच वर्षों में 1,500 मेगावाट नई जलविद्युत क्षमता जोड़ी जाएगी। पीएम मोदी के इस संबोधन ने यह साफ कर दिया है कि भारत अब केवल तेल के लिए खाड़ी देशों के भरोसे नहीं है, बल्कि अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए ‘आत्मनिर्भरता’ के नए रास्तों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।









