केंद्र सरकार महिला आरक्षण कानून (women reservation act amendment)में एक ऐतिहासिक संशोधन लाने की तैयारी कर रही है, जिससे भारतीय संसद का स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है। 23 मार्च 2026 को सामने आई खबरों के मुताबिक, सरकार इसी सत्र में एक संशोधित बिल पेश कर सकती है, जिसके तहत लोकसभा में सदस्यों की कुल संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव है। इस बदलाव के बाद महिला सांसदों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 273 हो जाएगी। इस बड़े संवैधानिक बदलाव पर आम सहमति बनाने के लिए गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को एनसीपी (शरद पवार), बीजेडी और शिवसेना (यूबीटी) जैसे विपक्षी दलों के साथ बैठक भी की है।
क्या है नया प्रस्ताव और 2011 की जनगणना का आधार?
सरकार का यह नया फॉर्मूला 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों के परिसीमन (Delimitation) पर टिका है। प्रस्ताव के अनुसार, सभी राज्यों में लोकसभा और विधानसभा सीटों में करीब 50 फीसदी का इजाफा किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, उत्तर प्रदेश की सीटें 80 से बढ़कर 120 और बिहार की सीटें 40 से बढ़कर 60 हो सकती हैं। इसी बढ़ी हुई संख्या में से 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। जून 2026 में परिसीमन आयोग के गठन की भी संभावना जताई जा रही है, जो सीटों के नए निर्धारण पर काम करेगा (women reservation act amendment)।
दक्षिण भारत की नाराजगी दूर करने का ‘मास्टर स्ट्रोक’
इस संशोधन (women reservation act amendment) के पीछे सरकार की एक बड़ी रणनीति दक्षिण भारतीय राज्यों (जैसे तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना) की शिकायतों को दूर करना है। अब तक डीएमके और टीडीपी जैसी पार्टियों का तर्क रहा है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने के कारण परिसीमन में उनकी सीटें कम हो जाएंगी और उत्तर प्रदेश-बिहार जैसे राज्यों का दबदबा बढ़ जाएगा। लेकिन सीटों को आनुपातिक रूप से (Proportional) बढ़ाकर सरकार यह संदेश देना चाहती है कि किसी भी राज्य का प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा, बल्कि सभी की भागीदारी बढ़ेगी।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम: 2023 से 2026 का सफर
याद दिला दें कि 2023 में पास हुए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में 33% आरक्षण का प्रावधान तो था, लेकिन इसे लागू करने के लिए परिसीमन की शर्त जुड़ी थी। अब संशोधन (women reservation act amendment) के जरिए सरकार इस प्रक्रिया को तेज करना चाहती है। इसमें एससी-एसटी महिलाओं के लिए ‘आरक्षण के भीतर आरक्षण’ की व्यवस्था बरकरार रखी गई है। हालांकि, अभी कांग्रेस और टीएमसी जैसी बड़ी पार्टियों से बातचीत होना बाकी है, लेकिन सरकार की कोशिश है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर बिना किसी रुकावट के बिल पास करा लिया जाए।









