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Partha Chatterjee ED Raid: बंगाल चुनाव से पहले ‘पार्थ’ पर ED का प्रहार, क्या ‘कैश फॉर जॉब’ घोटाला बदलेगा 2026 का चुनावी रुख?

कोलकाता: Partha Chatterjee ED Raid: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखें करीब आते ही सियासत का पारा चढ़ गया है। शनिवार की सुबह कोलकाता के नाकतला इलाके में उस वक्त हड़कंप मच गया जब केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के आवास पर दस्तक दी। करोड़ों रुपये के शिक्षक भर्ती घोटाले (SSC Scam) के मुख्य आरोपी पार्थ चटर्जी, जो हाल ही में जमानत पर बाहर आए थे, एक बार फिर जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। चुनावी दहलीज पर खड़ी ममता सरकार के लिए यह छापेमारी किसी बड़े झटके से कम नहीं है, क्योंकि यह सीधे तौर पर टीएमसी के ‘क्रेडिबिलिटी’ और सुशासन के दावों पर सवाल उठाती है।

ED की सख्ती: ‘बेडरूम’ तक पहुँची पूछताछ की आंच

प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की गई इस कार्रवाई के पीछे ED का तर्क बेहद ठोस है। अधिकारियों के मुताबिक, पार्थ चटर्जी को तीन बार समन भेजा गया था, लेकिन उन्होंने हर बार खराब सेहत का हवाला देकर आने से इनकार कर दिया। एजेंसी ने उनकी ‘घर पर पूछताछ’ की इच्छा को स्वीकार करते हुए सीधे उनके आवास पर धावा बोला। लेकिन जांच का दायरा केवल पार्थ तक सीमित नहीं रहा; साल्ट लेक के CGO कॉम्प्लेक्स से लेकर न्यू टाउन में प्रसन्ना रॉय के दफ्तर तक छापेमारी की गई। इतना ही नहीं, राज्य मंत्री सुजीत बोस के बेटे समुद्र बोस की CGO कॉम्प्लेक्स में पेशी ने यह साफ कर दिया है कि जांच की आंच अब टीएमसी के कई रसूखदार परिवारों तक पहुँच रही है। Partha Chatterjee ED Raid

SSC घोटाला: नोटों के पहाड़ और युवाओं का टूटा भरोसा

इस पूरे मामले की जड़ें जुलाई 2022 में हुए उस सनसनीखेज खुलासे में हैं, जब पार्थ चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी के फ्लैट से 50 करोड़ रुपये नकद और भारी मात्रा में सोना बरामद हुआ था। आरोप है कि यह पैसा योग्य उम्मीदवारों का हक मारकर अयोग्य लोगों को सरकारी स्कूलों में नौकरी देने के बदले वसूला गया था। पार्थ चटर्जी उस वक्त शिक्षा मंत्री थे और उन्हीं के इशारे पर भर्ती सूचियों में हेरफेर के आरोप लगे। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 2025 में सशर्त जमानत दी थी, लेकिन मनी लॉन्ड्रिंग के कई अन्य मामले आज भी उनकी मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हजारों योग्य उम्मीदवारों के लिए यह रेड न्याय की एक उम्मीद की तरह है। Partha Chatterjee ED Raid

चुनावी बिसात: ममता का ‘विक्टिम कार्ड’ बनाम मोदी का ‘भ्रष्टाचार’ प्रहार

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह रेड बंगाल चुनाव का सबसे बड़ा ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हो सकती है। भाजपा इस छापेमारी को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है, जिससे वह ममता बनर्जी के ‘ईमानदार छवि’ वाले नैरेटिव को ध्वस्त कर सके। अमित शाह और सुवेंदु अधिकारी पहले ही टीएमसी पर युवाओं का भविष्य बेचने का आरोप लगा रहे हैं। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस इसे ‘चुनावी रेड’ और भाजपा की बदले की राजनीति करार दे रही है। ममता बनर्जी का तर्क है कि भाजपा हार के डर से केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। लेकिन जनता की अदालत में ‘नोटों के पहाड़’ वाली छवि टीएमसी के जमीनी कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। Partha Chatterjee ED Raid

क्या क्रेडिबिलिटी की लड़ाई जीत पाएगी टीएमसी?

बंगाल चुनाव अब केवल रैलियों और मुफ्त योजनाओं (Welfare Schemes) तक सीमित नहीं रह गया है। यह अब साख की लड़ाई बन चुका है। पार्थ चटर्जी के घर पर पड़ी यह दस्तक उन कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा सकती है जो घर-घर जाकर वोट मांग रहे हैं। अगर ED इस बार कुछ और पुख्ता सबूत बरामद करने में सफल रहती है, तो 2027 की सत्ता की राह ममता बनर्जी के लिए काफी कठिन हो सकती है। सवाल यह है कि क्या बंगाल का वोटर ‘विक्टिम कार्ड’ पर भरोसा करेगा या भ्रष्टाचार के इन दागों को देखकर अपना फैसला बदलेगा? Partha Chatterjee ED Raid

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