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जमीन के बदले नौकरी मामले में लालू यादव को SC से बड़ा झटका, FIR रद्द करने की याचिका खारिज

Land For Jobs Case

Land For Jobs Case: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की उस याचिका पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने कथित भूमि-बदले-नौकरी घोटाले से संबंधित कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी।

हालांकि, न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने लालू प्रसाद यादव को निचली अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट देकर सीमित राहत प्रदान की। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत मामले की खूबियों की जांच करने और कानून के अनुसार निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है।

धारा 17ए: इस केस की सबसे बड़ी कानूनी पेचीदगी (Land For Jobs Case)

यादव की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने तर्क दिया कि रेल मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान की गई नियुक्तियों संबंधी कथित सिफारिशें उनकी आधिकारिक क्षमता में नहीं की गई थीं। उन्होंने तर्क दिया कि इसलिए जांच शुरू करने के लिए भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 17ए के तहत मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी।

दूसरी ओर, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने तर्क दिया कि यादव पर अभी भी मुकदमा चलाया जा सकता है, क्योंकि ये कृत्य सार्वजनिक पद पर रहते हुए उनकी भूमिका से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि पूर्व स्वीकृति का अभाव इस मामले में कार्यवाही को अमान्य नहीं करेगा। (Land For Jobs Case)

क्या ‘आधिकारिक कर्तव्य’ में आती हैं सिफारिशें?

सुनवाई के दौरान, न्यायालय ने कहा कि दो प्रमुख मुद्दे हैं- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) की धारा 17ए का दायरा और प्रयोज्यता, और क्या यह प्रावधान भविष्य में लागू होगा। न्यायालय ने टिप्पणी की कि यदि यह मान भी लिया जाए कि धारा 17ए लागू नहीं होती है, तब भी कानून के अन्य प्रावधान लागू हो सकते हैं।

हालांकि, न्यायालय ने मामले की खूबियों की जांच करने का अधिकार निचली अदालत को दिया। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यादव को राहत देने से इनकार करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणियां निचली अदालत के निर्णय में बाधक नहीं होंगी। (Land For Jobs Case)

न्यायालय ने यह भी सवाल उठाया कि क्या नियुक्तियों के लिए सिफारिशें जैसे कार्य, यदि विशुद्ध रूप से आधिकारिक निर्णय नहीं हैं, तो भी उन्हें सार्वजनिक पद से संबंधित कार्य माना जा सकता है। न्यायालय ने कहा कि ऐसे कार्यों के प्रभाव पर सावधानीपूर्वक विचार करने की आवश्यकता होगी।

संक्षिप्त दलीलें सुनने के बाद, न्यायालय ने इस स्तर पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और कानूनी मुद्दों को निचली अदालत के निर्णय के लिए खुला छोड़ दिया। न्यायालय ने यादव को मुकदमे की सुनवाई के दौरान उचित समय पर धारा 17ए के तहत मंजूरी से संबंधित आपत्तियों सहित सभी उपलब्ध आपत्तियां उठाने की अनुमति दी।पीठ ने कहा, “मामलों को निचली अदालत के फैसले के लिए खुला छोड़ दिया गया है।” उसने आगे कहा कि कार्यवाही के दौरान यादव की व्यक्तिगत उपस्थिति पर जोर देने की आवश्यकता नहीं है। (Land For Jobs Case)

निचली अदालत पर अब क्यों टिकी है पूरे मामले की दिशा

इससे पहले, दिल्ली उच्च न्यायालय ने 24 मार्च, 2026 को एफआईआर और उसके बाद 2022, 2023 और 2024 में दायर की गई आरोपपत्रों को रद्द करने से इनकार कर दिया था। यह मामला यादव के रेल मंत्री के कार्यकाल के दौरान 2004 से 2009 के बीच भारतीय रेलवे में ग्रुप-डी पदों पर कथित अनियमित नियुक्तियों से संबंधित है, जो कथित तौर पर भूमि के बदले में की गई थीं।

धारा 17ए के तहत लोक सेवक द्वारा आधिकारिक कर्तव्यों से संबंधित कृत्यों की जांच से पहले सरकार की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य है। यह मुद्दा विवाद का केंद्र बना हुआ है और अब इसे मुकदमे की सुनवाई के लिए खुला छोड़ दिया गया है। (Land For Jobs Case)


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