Pahalgam Terror Attack 2025 Anniversary: आज पहलगाम आतंकी हमला 2025 को एक साल पूरा हो चुका है। दरअसल, उस दिन की दर्दनाक यादें आज भी देश के दिल में ताज़ा हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए साफ कहा कि भारत अपने नागरिकों के खून का हिसाब लेना जानता है।
22 अप्रैल 2025: जब चीखों से गूंज उठी बैसरन घाटी
कश्मीर की बैसरन घाटी को लोग ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ कहते हैं। हालांकि, पिछले साल की वह सुबह बिल्कुल अलग थी। लिद्दर नदी के किनारे सैकड़ों पर्यटक ठंडी हवा और सुकून का आनंद ले रहे थे।
- अचानक हमला: सुबह करीब 9 बजे 4-5 हथियारबंद आतंकी जंगल की तरफ से निकले।
- घातक हथियार: उनके हाथों में AK-47 और M4 जैसे खतरनाक हथियार थे।
- नाम पूछकर हत्या: आतंकी लोगों के पास जाकर उनका नाम पूछ रहे थे और फिर गोलियां मार रहे थे।
यही वजह है कि कुछ ही मिनटों में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय युवक समेत 26 लोगों की जान चली गई। दरअसल, यह कोई सामान्य हमला नहीं, बल्कि नफरत फैलाने की एक सोची-समझी साजिश थी।
साजिश का ब्लूप्रिंट: रेकी और आधुनिक तकनीक
जांच में सामने आया कि यह हमला अचानक नहीं हुआ था। दरअसल, इसकी प्लानिंग कई दिन पहले ही कर ली गई थी।
- टूरिस्ट बनकर आए: 19 और 20 अप्रैल को आतंकी खुद पर्यटक बनकर वहां घूमे थे।
- लोकेशन की पहचान: उन्होंने भीड़भाड़ वाले इलाकों और भागने के रास्तों की पूरी रेकी की थी।
- हाई-टेक डिवाइस: आतंकी बिना सिम कार्ड वाले ऐसे डिवाइस इस्तेमाल कर रहे थे, जिन्हें ट्रैक करना नामुमकिन था।
इस हमले की जिम्मेदारी TRF (द रेजिस्टेंस फ्रंट) ने ली थी। परिणामस्वरूप, कश्मीर के पर्यटन और स्थानीय लोगों के रोजगार को गहरा धक्का लगा।
भारत का जवाब: ‘ऑपरेशन सिंदूर’
हमले के बाद पूरे देश में भारी गुस्सा था। यही वजह है कि 7 मई 2025 की रात भारतीय सेना ने “ऑपरेशन सिंदूर” लॉन्च किया।
- मल्टी-फोर्स एक्शन: इस ऑपरेशन में आर्मी, एयरफोर्स और नेवी ने मिलकर काम किया।
- ठिकानों की तबाही: बहावलपुर और मुरीदके जैसे इलाकों में 9 आतंकी ठिकानों को जमींदोज कर दिया गया।
- सख्त संदेश: भारत ने दुनिया को बता दिया कि वह आतंक को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।
जख्म जो आज भी ताजा हैं
पहलगाम की घाटी आज फिर खूबसूरत दिखती है। लेकिन, वहां की हवाओं में आज भी उन 26 मासूमों की यादें बसी हैं। स्थानीय युवक आदिल हुसैन शाह जैसे जांबाजों की शहादत हमेशा याद रखी जाएगी, जिन्होंने दूसरों को बचाने के लिए अपनी जान दे दी।
अंततः, एक साल बाद भी दहशत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। यही नहीं, यह हमला हमें याद दिलाता है कि आतंकवाद सिर्फ जान नहीं लेता, बल्कि कई परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए उजाड़ देता है।









