Allahabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 29 सितंबर 2026 को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए उत्तर प्रदेश में हुक्का बार के संचालन पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि रेस्टोरेंट और कैफे में ‘डेजिग्नेटेड स्मोकिंग जोन’ की आड़ में भी हुक्का नहीं परोसा जा सकता।
यह फैसला जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने सुनाया। कोर्ट ने हुक्का बार संचालकों और रेस्टोरेंट मालिकों द्वारा दायर 70 से अधिक याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि जनहित और सार्वजनिक स्वास्थ्य, किसी के भी व्यापार करने के अधिकार से ऊपर है।
Allahabad High Court: हुक्का का सामान किराए पर देने की दलील खारिज
इस मामले में रेस्टोरेंट मालिकों की मुख्य दलील थी कि वे ग्राहकों को केवल हुक्का का साजो-सामान किराए पर देते हैं और ग्राहक खुद सेवा लेते हैं, इसलिए यह ‘सेवा’ की श्रेणी में नहीं आता। कोर्ट ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। बेंच ने ‘सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध नियम, 2008’ और 2017 में हुए इसके संशोधनों का हवाला दिया।
कोर्ट ने कहा कि नियमों के मुताबिक, स्मोकिंग जोन में किसी भी प्रकार की ‘सेवा’ देना वर्जित है। हुक्का तैयार करना, उसमें तंबाकू भरना, कोला बदलना और उसे टेबल तक पहुंचाना, ये सभी गतिविधियां ‘सेवा’ का ही हिस्सा हैं। इसलिए, स्मोकिंग जोन में हुक्का पिलाना गैरकानूनी है।
मौलिक अधिकारों पर कोर्ट की टिप्पणी
याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत ‘व्यापार करने के मौलिक अधिकार’ का हवाला दिया था। इस पर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि संविधान का अनुच्छेद 21, जो नागरिकों को ‘स्वच्छ हवा में सांस लेने’ और ‘जीवन की सुरक्षा’ का अधिकार देता है, वह व्यापार के अधिकार से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने साफ किया कि किसी के मुनाफे के लिए युवाओं और आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। (Allahabad High Court)
जस्टिस सराफ की नसीहत: “एक सिगरेट से शुरू होती है लत”
सुनवाई के दौरान जस्टिस शेखर बी. सराफ ने एक निजी और भावुक टिप्पणी भी की। उन्होंने युवाओं को चेतावनी देते हुए कहा कि अक्सर सिर्फ एक बार या मजाक में पी गई पहली सिगरेट ही बाद में गंभीर लत का कारण बन जाती है। उन्होंने अपने कॉलेज के दिनों का उदाहरण देते हुए कहा कि कैसे उन्होंने देखा है कि शौक कब मजबूरी बन जाता है। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि हुक्का, सिगरेट से कम हानिकारक नहीं है, बल्कि कई मामलों में यह उससे भी ज्यादा खतरनाक है।
प्रशासन को सख्त निर्देश
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया है कि वे इस फैसले का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराएं। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि खाद्य सुरक्षा विभाग या नगर निगम के पास हुक्का बार के लिए अलग से लाइसेंस जारी करने का कोई अधिकार नहीं है। अगर कोई रेस्टोरेंट स्मोकिंग जोन की आड़ में हुक्का परोसता पाया जाता है, तो पुलिस उसके खिलाफ कोटपा (COTPA) एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई कर सकती है। (Allahabad High Court)
यह फैसला उत्तर प्रदेश में हुक्का बार संस्कृति पर एक बड़ा प्रहार है। अब तक कई रेस्टोरेंट ‘स्मोकिंग एरिया’ के नियम का फायदा उठाकर हुक्का सर्विस दे रहे थे, लेकिन हाईकोर्ट के इस स्पष्टीकरण के बाद यह रास्ता भी बंद हो गया है। इसे राज्य में नशामुक्ति और युवाओं के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।









