America on India EU Trade Deal: दुनिया की महाशक्ति अमेरिका इस वक्त गुस्से में है, और इस बार उसके निशाने पर कोई दुश्मन नहीं, बल्कि उसके अपने पुराने दोस्त ‘यूरोप’ और उभरता हुआ साझीदार ‘भारत’ हैं। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के एक बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में आग लगा दी है। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि यूरोप ने व्यावसायिक मुनाफे के लिए यूक्रेन के बलिदान को भुला दिया है।
स्कॉट बेसेंट का विवादास्पद बयान (America on India EU Trade Deal)
अमेरिका का तर्क है कि जब तक यूक्रेन युद्ध की आग में जल रहा है, तब तक यूरोप को रूस के करीबी व्यापारिक सहयोगियों (जैसे भारत) के साथ बड़े आर्थिक समझौते नहीं करने चाहिए थे। बेसेंट के अनुसार, यह “नैतिकता की बलि चढ़ाना” है। तो वहीं भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच इस बड़ी ट्रेड डील में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार की बात शामिल है।
अगर ऐसा होता है, तो वैश्विक बाजार में अमेरिकी डॉलर का एकाधिकार कमजोर होगा—यही अमेरिका का सबसे बड़ा डर है। इसलिए अमेरिका को लग रहा है कि यूरोप अब वाशिंगटन के निर्देशों पर चलने के बजाय अपनी स्वतंत्र आर्थिक राह चुन रहा है। बेसेंट का यह बयान यूरोप को वापस ‘लाइन’ पर लाने की एक कोशिश है। (America on India EU Trade Deal)

भारत-ईयू व्यापार डील
आपको बता दें कि, एक तरफ EU के साथ डील से भारत के निर्यात (Exports) को पंख लगेंगे, लेकिन दूसरी तरफ अमेरिका भारत पर कड़े व्यापारिक प्रतिबंध या ‘टैरिफ’ लगा सकता है। भारत इस समय खुद को दुनिया का ‘मैन्युफैक्चरिंग हब’ बना रहा है। अमेरिका की नाराजगी से विदेशी निवेश (FDI) की गति पर असर पड़ सकता है। और भारत के लिए अब यह चुनौती है कि वह अमेरिका को यह कैसे समझाए कि उसकी अर्थव्यवस्था और करोड़ों लोगों का भविष्य किसी एक देश के युद्ध के कारण बंधक नहीं बनाया जा सकता। (America on India EU Trade Deal)
कल तक जो अमेरिका पुतिन और ट्रंप के बीच समझौते की बात कर रहा था, आज वही व्यापारिक हितों को लेकर इतना आक्रामक क्यों है? असल में, यह ‘नया शीत युद्ध’ है, जो new cold war हथियारों से नहीं बल्कि ‘ट्रेड एग्रीमेंट्स’ से लड़ा जा रहा है। फिलहाल, अमेरिका की नाराजगी यह बता रही है कि भारत-EU डील इतनी शक्तिशाली है कि उसने वाशिंगटन की नींद उड़ा दी है।
स्कॉट बेसेंट का बयान केवल एक आलोचना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। भारत के लिए यह अपनी संप्रभुता को साबित करने का समय है। क्या भारत अमेरिका के इस दबाव के आगे झुकेगा, या यूरोप के साथ मिलकर एक नई आर्थिक व्यवस्था की नींव रखेगा? (America on India EU Trade Deal)









