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अमेरिका का ‘टिश्यू पेपर’ बना पाकिस्तान, इस्तेमाल के बाद फ्लश हुआ ‘दोस्ती’ का गुरूर!

America-Pakistan Relations

America-Pakistan Relations: रिश्तों में धोखे की कहानियां तो आपने बहुत सुनी होंगी, लेकिन एक पूरे मुल्क का इस्तेमाल कर उसे कचरे के डिब्बे में फेंक दिया जाए… ऐसा कम ही देखने को मिलता है। आज पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के एक बयान ने इस्लामाबाद की लाचारी का वो चेहरा दिखाया है, जिसे देखकर दुनिया हंस भी रही है और तरस भी खा रही है। पाकिस्तान खुद मान रहा है कि अमेरिका ने उसे किसी कीमती दोस्त की तरह नहीं, बल्कि एक ‘टॉयलेट पेपर’ की तरह इस्तेमाल किया और काम निकलते ही फ्लश कर दिया!

America-Pakistan Relations: वाशिंगटन की ‘झुनझुनी’ और इस्लामाबाद का अंधविश्वास

सालों तक जिस ‘खास दोस्त’ के लिए पाकिस्तान टकटकी लगाए बैठा था, जिसे वो अपना रहनुमा मानता था, उसने केवल आश्वासन की झुनझुनी थमाई। आज पाकिस्तान उस वफ़ादारी की कीमत अपनी बर्बादी से चुका रहा है।
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आपको बता दें, यह बयान दिखाता है कि पाकिस्तान आज कितना बेबस है। वो आज भी उस उम्मीद में बैठा था कि शायद वॉशिंगटन से कोई मदद आएगी, लेकिन अमेरिका ने तो चेहरा पोंछने के लिए टिश्यू पेपर तक नहीं दिया, बल्कि फ्लश चलाकर सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। (America-Pakistan Relations)

बेइज्जती का घूंट या आत्मनिर्भरता की नई राह?

बहरहाल, पाकिस्तान की हालत उस आशिक जैसी हो गई है जो आख़िरी वक्त तक धोखेबाज महबूब की राह देखता रहा। अमेरिका ने अपनी जंग लड़ी, अपने मकसद साधे और जब काम निकल गया, तो मुड़कर भी नहीं देखा। आज पाकिस्तान के पास न पैसा बचा है, न इज्जत और न ही वो ‘सुपरपावर’ दोस्त।

दुनिया देख रही है कि कैसे एक मुल्क अपनी संप्रभुता को गिरवी रखकर दूसरों के इशारों पर नाचता है, तो उसका अंत ‘टॉयलेट पेपर’ जैसा ही होता है। अब सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान इस बेइज्जती के बाद भी टकटकी लगाकर अमेरिका की तरफ ही देखेगा या खुद के पैरों पर खड़ा होना सीखेगा? (America-Pakistan Relations)

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