केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमनाथ मंदिर के एक कार्यक्रम के दौरान ‘सनातन धर्म’ की प्राचीनता और उसकी शक्ति पर बड़ा बयान दिया है। उनके इस संबोधन ने एक बार फिर सांस्कृतिक और धार्मिक गौरव की बहस को तेज कर दिया है।
ऐतिहासिक रूप से सोमनाथ मंदिर भारतीय अस्मिता और पुनरुत्थान का प्रतीक रहा है। विदेशी आक्रांताओं द्वारा इसे कई बार तोड़ा गया, लेकिन हर बार यह और अधिक भव्यता के साथ उठ खड़ा हुआ। वर्तमान में, जब देश के कुछ हिस्सों में सनातन धर्म को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और विवाद चल रहे हैं, तब गृह मंत्री का यह बयान केवल एक धार्मिक संबोधन नहीं, बल्कि एक कड़ा वैचारिक संदेश माना जा रहा है। सोमनाथ ट्रस्ट के जरिए मंदिर परिसर में होने वाले नए विकास कार्यों के शिलान्यास के दौरान शाह ने भारत की आध्यात्मिक विरासत पर जोर दिया।

“मिटाने की कोशिशें तमाम हुईं, पर मिटा न सकीं—सनातन की शक्ति का यही प्रमाण है!”
सोमनाथ की पवित्र भूमि से अमित शाह ने विरोधियों को दो टूक लहजे में समझा दिया है कि जो धर्म सदियों के आक्रमणों और विनाश के बाद भी अटूट खड़ा है, उसे कुछ नारों या राजनीति से हिलाया नहीं जा सकता। उन्होंने सनातन की तुलना ‘सूर्य और चंद्रमा’ से करते हुए इसे ब्रह्मांडीय सत्य करार दिया है। जब देश के गृह मंत्री भगवान शिव के दरबार से यह हुंकार भरते हैं, तो वह केवल आस्था की बात नहीं होती, बल्कि वह भारत के नए ‘सांस्कृतिक संकल्प’ का उद्घोष होता है।
गुजरात के सोमनाथ में आयोजित एक भव्य समारोह के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने सनातन धर्म की अमरता और सोमनाथ मंदिर के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं।

- सूर्य-चंद्रमा से तुलना: शाह ने कहा कि जिस तरह सूर्य और चंद्रमा को अस्त करना किसी इंसान के बस में नहीं है, उसी तरह सनातन धर्म भी अमर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “सनातन धर्म का न आदि है और न अंत; यह शाश्वत सत्य है।”
- सोमनाथ का उदाहरण: उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों का जिक्र करते हुए कहा कि सोमनाथ मंदिर पर सत्रह बार हमले हुए, इसे नष्ट करने की कोशिश की गई, लेकिन हर बार भारत की आस्था की जीत हुई। सोमनाथ मंदिर का वर्तमान वैभव इस बात का सबूत है कि सनातन की जड़ों को काटना नामुमकिन है।
- सांस्कृतिक राष्ट्रवाद: गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश अपनी खोई हुई सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित कर रहा है। अयोध्या में राम मंदिर से लेकर काशी विश्वनाथ और अब सोमनाथ के कायाकल्प तक, यह ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ का स्वर्ण युग है।
- विरोधियों को जवाब: पिछले दिनों सनातन धर्म पर की गई टिप्पणियों का नाम लिए बिना उन्होंने संदेश दिया कि जो लोग इसे मिटाने का सपना देखते हैं, वे भारत की मूल आत्मा को नहीं समझते। सनातन धर्म ने हमेशा ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का संदेश दिया है।
- विकास योजनाओं का लोकार्पण: इस अवसर पर उन्होंने मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कई नई अत्याधुनिक परियोजनाओं और डिजिटल संग्रहालय का भी उद्घाटन किया, जो युवाओं को मंदिर के इतिहास से जोड़ेगा।

अमित शाह का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘सनातन’ के मुद्दे पर भाजपा एक बार फिर आक्रामक रुख अपना रही है, ताकि विपक्षी गठबंधन के उन बयानों को घेरा जा सके जो धर्म विशेष पर केंद्रित थे। सोमनाथ से दिया गया यह संदेश न केवल गुजरात, बल्कि पूरे देश के धार्मिक मतदाताओं के बीच एक मजबूत वैचारिक लहर पैदा करने की कोशिश है।









