उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस वक्त उबाल आ गया जब यूपी राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष और बीजेपी नेता अपर्णा यादव (Aparna Yadav) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ(Yogi Adityanath)से मुलाकात की। यह मुलाकात महज शिष्टाचार भेंट नहीं, बल्कि राजधानी के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में उपजे विवाद और प्रशासन के खिलाफ उनके तीखे तेवरों का नतीजा मानी जा रही है।
“जब मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू और बीजेपी की तेजतर्रार नेता अपर्णा यादव सीधे मुख्यमंत्री की दहलीज पर पहुँचती हैं, तो यह मान लेना चाहिए कि मामला बेहद गंभीर है। लखनऊ के KGMU में ‘लव जिहाद’ और ‘धर्मांतरण’ के आरोपों के बीच, अपर्णा यादव ने केवल अस्पताल प्रशासन को ही नहीं ललकारा, बल्कि यूनिवर्सिटी की कुलपति (VC) के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे ‘ज्ञान के मंदिर’ में हो रही ‘साजिश’ करार दिया है। क्या यह महज एक प्रशासनिक लड़ाई है, या इसके पीछे यूपी की सियासत का कोई नया अध्याय लिखा जा रहा है?”

अपर्णा यादव का X पर पोस्ट आया सामने
यूपी महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव की सीएम योगी से हुई मुलाकात की फोटो भी सामने आ गई है। अपर्णा यादव ने एक्स पर फोटो पोस्ट कर लिखा कि प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री, हम सभी के संरक्षणकर्ता आदरणीय योगी आदित्यनाथ से भेंट कर उनका मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला है। अपर्णा यादव ने कहा कि उनका स्नेह, नेतृत्व और स्पष्ट दृष्टि प्रदेश को निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ा रही है। ऐसे नेतृत्व का मार्गदर्शन हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। वहीं योगी आदित्यनाथ ऑफिस की ओर से इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया गया है। वहीं केजीएमयू में हुए घटनाक्रम के बाद बीजेपी नेता व यूपी महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव चर्चाओं में आ गई है। माना जा रहा है अपर्णा यादव ने सीएम योगी को केजीएमयू धर्मांतरण मामले और शुक्रवार को हुए बवाल के बारे में पूरी विस्तृत जानकारी दी है।

नाराजगी की असली वजह
अपर्णा यादव का आरोप है कि वह संवैधानिक पद पर होने के बावजूद उन्हें 20 मिनट तक गेट के बाहर खड़ा रखा गया। उन्होंने कुलपति सोनिया नित्यानंद पर आरोप लगाया कि वे उनसे मिलने नहीं आईं और जानबूझकर उपेक्षा की गई।वहीं दूसरी तरफ गंभीर आरोप लगाते हुए अपर्णा यादव ने KGMU में डॉ. रमीज मलिक (उर्फ रमीजउद्दीन) से जुड़े ‘लव जिहाद’ (Love Jihad) और ‘धर्मांतरण’ के मामले को प्रमुखता से उठाया है। उनका दावा है कि एक जूनियर महिला डॉक्टर का शोषण किया गया और उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया। अपर्णा यादव ने आरोप लगाया कि KGMU का ब्लड बैंक बिना नोटिस के चल रहा है और वहां महिला डॉक्टरों के साथ हो रहे उत्पीड़न को दबाया जा रहा है।

“KGMU का यह विवाद अब केवल एक मेडिकल संस्थान का आंतरिक मामला नहीं रह गया है। जहाँ एक तरफ वीसी ने अपर्णा यादव के साथ आए समर्थकों पर ‘तोड़फोड़’ और ‘अमर्यादित व्यवहार’ के आरोप लगाते हुए FIR की बात कही है, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी के अंदरूनी हल्कों में इसे अनुशासन और सम्मान की लड़ाई के तौर पर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद अब सबकी नजरें इस पर हैं कि क्या KGMU प्रशासन में कोई बड़ा फेरबदल होगा या फिर यह टकराव अभी और खिंचेगा।”









