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Army Chief on Operation Sindoor: “हम युद्ध के लिए तैयार थे, बस एक इशारे की देरी थी!” ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर आर्मी चीफ का विस्फोटक खुलासा

भारतीय सेना के सबसे साहसी और गुप्त ऑपरेशंस में से एक, ‘ऑपरेशन सिंदूर’, अब तक के सबसे बड़े खुलासे के रूप में सामने आया है। आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने इस ऑपरेशन की उन परतों को खोला है, जो अब तक इतिहास के पन्नों में दबी हुई थीं।

भारतीय सेना ने एक बार फिर पाकिस्तान को साफ चेतावनी दी है। चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेंद्र (Upendra dwivedi) द्विवेदी ने मंगलवार को 2026 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है। उन्होंने पाकिस्तान को ललकारते हुए कहा कि भविष्य में कोई भी गलत हरकत की जाएगी तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। जनरल द्विवेदी ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर तीनों सेनाओं (आर्मी, एयर फोर्स और नेवी) के बीच बेहतरीन तालमेल का शानदार नमूना है।

पिछले कुछ वर्षों से वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जारी सैन्य गतिरोध के दौरान भारतीय सेना ने केवल रक्षात्मक रुख ही नहीं अपनाया, बल्कि कई ऐसे रणनीतिक ऑपरेशंस को अंजाम दिया जिसने दुश्मन को अपनी चौकियों से पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) इसी रणनीति का एक हिस्सा था, जो उस वक्त चलाया गया जब एलएसी (LAC) पर तनाव अपने उच्चतम स्तर पर था। अब तक इस ऑपरेशन को केवल एक ‘रुटीन ड्रिल’ बताया गया था, लेकिन आर्मी चीफ के ताजा बयान ने यह साफ कर दिया है कि भारत एक बड़ी जमीनी जंग के मुहाने पर खड़ा था।

“बंदूकें तनी थीं, उंगलियां ट्रिगर पर थीं और भारतीय सेना बस एक आदेश का इंतजार कर रही थी!”

क्या आप जानते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय जांबाजों ने बर्फीली चोटियों पर दुश्मन की आंखों में आंखें डालकर उसे युद्ध के लिए ललकारा था? आर्मी चीफ का यह खुलासा कि ‘सेना जमीनी जंग के लिए पूरी तरह तैयार थी’, यह बताने के लिए काफी है कि उस रात हिमालय की वादियों में कुछ ऐसा हुआ था जिसने इतिहास का रुख बदल दिया। यह कहानी केवल एक सैन्य ऑपरेशन की नहीं, बल्कि भारत की उस ‘न्यू नॉर्मल’ नीति की है, जहाँ हम अब वार सहते नहीं, बल्कि वार करने का दम रखते हैं।

ऑपरेशन की सफलता को लेकर क्या बोले सेना प्रमुख?

जनरल द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर बेहद सटीकता से प्लान और एक्जीक्यूट किया गया। शुरुआत से लेकर खत्म होने तक कुल 88 घंटे लगे, जिसमें पहले 22 मिनट में ही मुख्य हमले शुरू हो गए। इस ऑपरेशन ने आतंकी ढांचे को गहराई तक तोड़ा और पाकिस्तान की पुरानी परमाणु धमकी की हवा निकाल दी।सेना ने कुल 9 टारगेट्स में से 7 को पूरी तरह तबाह कर दिया। जनरल ने बताया कि सेना ग्राउंड ऑफेंसिव के लिए भी पूरी तरह तैयार थी। ऑपरेशन के दौरान भारत ने सिर्फ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, किसी आम नागरिक या सैन्य ठिकाने को नहीं छुआ।

आर्टिलरी और लॉजिस्टिक्स की तैनाती

जनरल द्विवेदी ने खुलासा किया कि ऑपरेशन के दौरान भारत ने अपनी के-9 वज्र (K-9 Vajra) तोपें और एम-777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर को उन पोजीशन पर तैनात कर दिया था, जहाँ से दुश्मन के बेस सीधे निशाने पर थे। वायुसेना के चिनूक हेलीकॉप्टर्स ने रात के अंधेरे में भारी युद्धक सामग्री को अग्रिम चौकियों तक पहुँचाया था।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ का खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब भारत अपनी उत्तरी सीमाओं पर बुनियादी ढांचे को तेजी से विकसित कर रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के खुलासे दुश्मन के लिए एक ‘चेतावनी’ की तरह हैं। आने वाले समय में रक्षा मंत्रालय इस ऑपरेशन पर एक आधिकारिक डाक्यूमेंट्री भी जारी कर सकता है, ताकि देश जान सके कि कैसे भारतीय सेना ने चुपचाप एक बड़े युद्ध को टालते हुए अपनी संप्रभुता की रक्षा की थी।

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