Ayodhya Ram Temple Donation Theft Case: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया है कि मंदिर परिसर में चंदा चोरी की घटनाएं पहले बताए गए आंकड़ों से कहीं अधिक हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि सीसीटीवी फुटेज में चोरी की 70 नहीं, बल्कि 105 घटनाएं कैद हुई हैं।
Ayodhya Ram Temple Donation Theft Case: 105 मामलों का सच और SIT रिपोर्ट
शुरुआती जांच में जून महीने में SIT ने अपनी रिपोर्ट में लगभग 70 संदिग्ध घटनाओं का जिक्र किया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा पेश की गई नई स्टेटस रिपोर्ट में यह संख्या बढ़कर 105 हो गई है। यह फुटेज मंदिर के ‘डोनेशन काउंटिंग रूम’ का है, जहां निजी एजेंसी के सुरक्षाकर्मी और कर्मचारी नोटों की गड्डी अपनी जेबों और जूतों में छिपाते हुए पकड़े गए थे।
25 सितंबर: SIT के लिए अंतिम समय सीमा
जयराम रमेश ने इस मामले में 25 सितंबर की तारीख को बेहद अहम बताया है। यह वह तारीख है जब एसआईटी जांच के 90 दिन पूरे हो रहे हैं। कानूनन, यदि जांच एजेंसी इस अवधि के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं करती है, तो गिरफ्तार किए गए आरोपियों को ‘डिफ़ॉल्ट जमानत’ मिल सकती है। (Ayodhya Ram Temple Donation Theft Case)
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “25 सितंबर को 90 दिन पूरे हो जाएंगे। अगर तब तक चार्जशीट दाखिल नहीं हुई, तो आरोपियों को जमानत मिल जाएगी। क्या यह जानबूझकर किया जा रहा है?” उन्होंने आशंका जताई कि मास्टरमाइंड को बचाने के लिए मामले को कमजोर किया जा सकता है।
‘बड़ी मछलियों’ को बचाने का आरोप
कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर इस मामले में केवल छोटे कर्मचारियों और सुरक्षा गार्डों को ही क्यों पकड़ा गया है? अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें अवनीश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और अन्य शामिल हैं। जयराम रमेश का आरोप है कि ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों और ‘असली गुनाहगारों’ को सेफ एग्जिट (सुरक्षित रास्ता) दिया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया, “असली गुनाहगारों को कौन बचा रहा है? क्या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच से बचने के लिए यह सब हो रहा है?” (Ayodhya Ram Temple Donation Theft Case)
ट्रस्ट में बदलाव और गिरफ्तारियां
चोरी का खुलासा होने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था में हड़कंप मच गया था। चोरी की घटनाएं तब सामने आईं, जब सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग चेक की गई। इसके बाद ट्रस्ट के कुछ शीर्ष अधिकारियों को अपनी नैतिक जिम्मेदारी के तहत पद छोड़ना पड़ा था और एक नए सीईओ, जितेंद्र मिश्रा को प्रशासनिक कमान सौंपी गई थी। हालांकि, SIT की अंतिम रिपोर्ट में ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों (जैसे चंपत राय और अनिल मिश्रा) को आरोपी नहीं बनाया गया है, जिस पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।
आगे की राह
उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया है कि 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी। अब सबकी निगाहें इस तारीख पर टिकी हैं कि क्या एसआईटी समय पर चार्जशीट पेश कर पाती है और क्या इस जांच की आंच ‘निचले कर्मचारियों’ से आगे बढ़कर किसी बड़े नाम तक पहुंचेगी। (Ayodhya Ram Temple Donation Theft Case)









