पटना/नई दिल्ली: BJP Grand Strategy: राजनीति के पुराने गलियारों में कहा जाता था कि पार्टी की कमान पाने के लिए दशकों तक ‘दरी बिछाने’ और इंतज़ार करने की ज़रूरत होती है। लेकिन 2026 की भारतीय जनता पार्टी ने इस पारंपरिक सोच को पूरी तरह बदल दिया है। बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी का चयन इस बात का सबसे ताज़ा और सटीक उदाहरण है कि आज की बीजेपी एक ‘परफॉर्मेंस-बेस्ड’ कॉर्पोरेट की तरह काम कर रही है। यहाँ आपकी राजनीतिक जड़ें कहाँ हैं, इससे ज़्यादा महत्वपूर्ण यह है कि आप पार्टी के लिए ‘विनेबिलिटी’ और ‘सोशल इंजीनियरिंग’ के पैमाने पर कितने फिट बैठते हैं। सम्राट चौधरी, जिन्होंने अपना सफर 90 के दशक में आरजेडी (RJD) से शुरू किया था, महज़ 9 साल पहले भाजपा में आए और आज वे सूबे की सत्ता के शिखर पर हैं।
हिमंत बिस्वा सरमा: भाजपा के ‘आउटसाइडर मॉडल’ के पोस्टर बॉय
भाजपा की इस ‘ग्रैंड स्ट्रैटेजी’ के सबसे सफल उदाहरण असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा हैं। हिमंत ने अपनी पूरी जवानी कांग्रेस में बिताई और वे तरुण गोगोई के संकटमोचक थे, लेकिन 2015 में बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्होंने जो रफ़्तार पकड़ी, उसने उन्हें पूरे नॉर्थ-ईस्ट में पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा बना दिया। भाजपा ने हिमंत के ज़रिए यह संदेश दिया कि यदि आपके पास चुनाव जिताने की क्षमता और प्रशासनिक पकड़ है, तो पार्टी आपको ‘नंबर वन’ बनाने से गुरेज़ नहीं करेगी। इसी तरह त्रिपुरा में माणिक साहा और अरुणाचल प्रदेश में पेमा खांडू जैसे नेता, जो मूल रूप से कांग्रेसी थे, आज भाजपा के मज़बूत स्तंभ बन चुके हैं। BJP Grand Strategy
सोशल इंजीनियरिंग और सत्ता का संतुलन: कर्नाटक से उत्तर प्रदेश तक
यह पैटर्न केवल पूर्वोत्तर तक सीमित नहीं है। कर्नाटक में बसवराज बोम्मई को मुख्यमंत्री बनाना भाजपा का एक ऐसा ही साहसिक फैसला था, क्योंकि वे जनता दल के बैकग्राउंड से आते थे। इसी तरह झारखंड में अर्जुन मुंडा (पूर्व JMM) और उत्तर प्रदेश में डिप्टी सीएम बृजेश पाठक (पूर्व BSP/Congress) भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा हैं, जहाँ पार्टी उन जातियों और क्षेत्रों तक पहुँचना चाहती है जहाँ वह पारंपरिक रूप से कमज़ोर रही है। सम्राट चौधरी के ज़रिए बिहार में ‘कोइरी-कुशवाहा’ वोट बैंक को साधना इसी दूरगामी योजना का हिस्सा है। BJP Grand Strategy
विपक्षी एकता के खिलाफ भाजपा का ‘ब्रह्मास्त्र’
आखिर भाजपा ऐसा क्यों करती है? इसके पीछे तीन बड़े मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक कारण हैं। पहला, उन राज्यों में जहाँ संगठन कमज़ोर है, वहाँ तैयार ‘मास लीडर’ को लाकर सीधे सत्ता हासिल करना। दूसरा, विपक्ष के शीर्ष नेताओं को अपनाकर उनके कैडर को पूरी तरह बिखेर देना। और तीसरा, यह साबित करना कि भाजपा अब एक ऐसी ‘फिनिशिंग मशीन’ बन चुकी है जो बाहर से कद्दावर नेता लेती है और उन्हें अपनी विचारधारा के सांचे में ढालकर मुख्यमंत्री बना देती है। यह रणनीति 2029 के आम चुनावों के लिए भाजपा का सबसे बड़ा ‘ब्रह्मास्त्र’ साबित होने वाली है। BJP Grand Strategy









