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BRICS Summit 2026: 12-13 सितंबर को दिल्ली में जुटेगी दुनिया की बड़ी ताकतें, जानें भारत के लिए क्यों खास है ये समिट?

BRICS Summit 2026

BRICS Summit 2026: इस हफ्ते दिल्ली की तरफ पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं, क्योंकि भारत 18वें ब्रिक्स समिट की मेजबानी करने जा रहा है। 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में होने वाला ये समिट सिर्फ एक बड़ा इवेंट नहीं है, बल्कि भारत के लिए ग्लोबल स्टेज पर अपनी पोजीशन मजबूत करने का एक बहुत बड़ा मौका है। तो चलिए समझते हैं कि ये समिट देश के लिए कितनी अहम है, और इससे कितना प्रोग्रेस निकल कर आ सकता है।

BRICS Summit 2026: BRICS क्या है और भारत के लिए इसकी अध्यक्षता क्यों अहम है?

सबसे पहले समझते हैं ब्रिक्स है क्या। इसकी शुरुआत 2006 में ब्राजील, रूस, इंडिया और चाइना के एक इनफॉर्मल ग्रुप के तौर पर हुई थी। बाद में साउथ अफ्रीका जुड़ा, तो नाम BRICS हो गया। फिर 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और UAE भी पूरे मेंबर बने, और 2025 में इंडोनेशिया भी शामिल हो गया। अब कुल 11 मेंबर कंट्रीज हैं, जो एशिया, अफ्रीका, मिडल ईस्ट और लैटिन अमेरिका तक फैली हुई हैं।

भारत इस ग्रुप का फाउंडिंग मेंबर है, और इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में तीन बार इसकी प्रेसिडेंसी संभाल चुका है। अब 2026 में चौथी बार भारत इसकी अध्यक्षता कर रहा है, और इस बार ब्रिक्स अपने 20 साल भी पूरे कर रहा है। इस साल की थीम है “बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी”, यानी मजबूती, इनोवेशन, सहयोग और टिकाऊ डेवलपमेंट पर फोकस। (BRICS Summit 2026)

अब समझते हैं भारत के लिए ये समिट इतनी इंपॉर्टेंट क्यों है। सबसे पहली बात, ब्रिक्स ही वो प्लेटफॉर्म है जहां चीन और रूस एक साथ आते हैं, और साथ ही ये दूसरे बड़े डेवलपिंग इकोनॉमीज और एनर्जी प्रोड्यूसिंग देशों से भी भारत को जोड़ता है। यानी भारत ये मंच इस्तेमाल करके ग्लोबल साउथ की आवाज बनने की कोशिश कर रहा है, बिना अमेरिका, यूरोप, जापान जैसे देशों के साथ अपने रिश्तों को छोड़े।

चीन और रूस के बीच संतुलन साधने की भारत के सामने बड़ी चुनौती

लेकिन असली चुनौती यहीं है। भारत के सामने बहुत सारे कॉम्प्लेक्स रिलेशनशिप्स को एक साथ बैलेंस करना है। चीन के साथ भारत का रिश्ता इकोनॉमिक पार्टनरशिप भी है और स्ट्रैटेजिक कॉम्पिटिशन भी। बॉर्डर डिस्प्यूट की वजह से तनाव तो रहा है, लेकिन बातचीत भी जारी है। इसी समिट में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी बहुत मायने रखती है, क्योंकि रॉयटर्स के मुताबिक ये उनकी सात साल बाद भारत यात्रा होगी, और इसे दोनों देशों के रिश्तों को स्टेबलाइज करने की एक कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। (BRICS Summit 2026)

अब बात करते हैं रूस की, जो भारत का बहुत पुराना स्ट्रैटेजिक पार्टनर रहा है। रूस चाहता है कि इंटरनेशनल पेमेंट्स में डॉलर के अलावा भी विकल्प तैयार हों। लेकिन क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने साफ किया है कि ये कोई “डी-डॉलराइजेशन” कैंपेन नहीं है, बल्कि सिर्फ ऐसे पेमेंट मेथड्स ढूंढने की कोशिश है जो नेशनल इंटरेस्ट में फिट बैठें। रूस ने ये भी बताया कि वो अब ब्रिक्स देशों के साथ अपने करीब 90 पर्सेंट ट्रेड को नेशनल करेंसीज में ही कर रहा है।

मोदी-पुतिन मुलाकात में न्यूक्लियर एनर्जी से डिफेंस तक किन मुद्दों पर होगी बात?

समिट से पहले पीएम मोदी और पुतिन के बीच 11 सितंबर को एक बाईलैटरल मीटिंग भी होगी, जिसमें न्यूक्लियर एनर्जी, डिफेंस प्रोडक्शन और ट्रेड जैसे क्षेत्रों पर बातचीत होगी। रूस ने ये भी संकेत दिया है कि वो भारत को अपनी कुछ सबसे एडवांस्ड मिलिट्री टेक्नोलॉजी शेयर करने के लिए तैयार है, जिसमें फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट Su-57 पर संभावित सहयोग भी शामिल है। (BRICS Summit 2026)

ईरान-UAE तनाव सुलझाने की जिम्मेदारी: भारत की डिप्लोमेसी की बड़ी परीक्षा

अब एक बहुत इंटरेस्टिंग एंगल है, जो पश्चिम एशिया से जुड़ा है। रूस ने उम्मीद जताई है कि भारत ईरान और UAE के बीच के मतभेद सुलझाने में कामयाब होगा, क्योंकि मई में हुई ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में इन दोनों देशों के बीच तीखी बहस हो गई थी, जिस वजह से कोई साझा बयान जारी ही नहीं हो पाया था। ये इस बात का सबूत है कि भारत की डिप्लोमेटिक स्किल्स इस बार बहुत बड़ी परीक्षा से गुजरने वाली हैं।

UPI का ग्लोबल विस्तार: BRICS देशों के बीच पेमेंट सिस्टम जुड़ने से क्या होगा फायदा?

अब सबसे इंटरेस्टिंग बात, जो सीधे आम भारतीय से जुड़ी है, यानी UPI का इंटरनेशनल एक्सपैंशन। अगस्त 2026 में UPI पर 24.51 अरब ट्रांजैक्शंस हुए, जिनकी टोटल वैल्यू करीब 314 अरब डॉलर के आसपास रही। UPI फिलहाल 11 देशों में काम कर रहा है, और पीएम मोदी लगातार इसे और देशों तक फैलाने पर जोर दे रहे हैं। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि ब्रिक्स देशों के बीच फास्ट पेमेंट सिस्टम्स और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी को आपस में जोड़ने पर भी बातचीत चल रही है, ताकि क्रॉस बॉर्डर पेमेंट सस्ता और तेज हो सके। अगर ये हो जाता है, तो इसका फायदा सीधे विदेश जाने वाले भारतीयों, बिजनेसमैन और टूरिस्ट्स तक पहुंचेगा। (BRICS Summit 2026)

स्पेस सेक्टर में नया सहयोग: सैटेलाइट डेटा शेयरिंग से भारत को क्या मिलेगा?

एक और बहुत बड़ा प्रोग्रेसिव एंगल है स्पेस कोऑपरेशन का। समिट में ब्रिक्स स्पेस काउंसिल बनाने पर बातचीत हो सकती है, जिसमें मेंबर कंट्रीज के रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट्स का डेटा आपस में शेयर करने का प्लान है। यानी अगर भारत में बाढ़ या साइक्लोन आता है, तो दूसरे देशों के सैटेलाइट डेटा से इफेक्टेड एरियाज की मैपिंग और रिलीफ वर्क में मदद मिल सकती है। इससे इसरो के साथ साथ भारत के प्राइवेट स्पेस-टेक सेक्टर को भी नया मार्केट मिल सकता है।

SMEs और डिजिटल इकोनॉमी पर फोकस, भारत के लिए खुलेंगे नए ग्लोबल बाजार

इसके अलावा जयपुर में ब्रिक्स ट्रेड मिनिस्टर्स की मीटिंग में स्मॉल और मीडियम बिजनेसेज के लिए ट्रेड फाइनेंस और ग्लोबल मार्केट एक्सेस बढ़ाने पर सहमति बनी है। पुणे में हुई कम्युनिकेशंस मिनिस्टर्स मीटिंग में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सिक्योरिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्टार्टअप्स पर सहयोग को प्रायोरिटी दी गई है। ये भारत के लिए बहुत बड़ा मौका है, क्योंकि भारत ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में अपना एक अलग मॉडल तैयार किया है, और अगर बाकी ब्रिक्स देश इसे अपनाते हैं, तो भारत की टेक्नोलॉजिकल और डिप्लोमेटिक रीच दोनों बढ़ सकती है। (BRICS Summit 2026)

BRICS समिट के लिए दिल्ली तैयार, सुरक्षा से ट्रैफिक तक किए गए बड़े इंतजाम

अब जरा दिल्ली में हो रही तैयारियों की भी बात कर लेते हैं। पूरा शहर पोस्टर और लाइट्स से सजाया गया है। ट्रैफिक पुलिस ने 22 डायवर्जन पॉइंट्स और 35 से ज्यादा सड़कों पर ट्रैफिक कंट्रोल का प्लान बनाया है। हाईकोर्ट और सभी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स 11 सितंबर को बंद रहेंगी, और सिर्फ हॉस्पिटल्स और इमरजेंसी सर्विसेज ही चालू रहेंगी। NSG ने “ऑपरेशन ब्रिक्स कवच” के तहत करीब 100 कमांडोज़ के साथ सिक्योरिटी ड्रिल भी की है, ताकि किसी भी थ्रेट की सूरत में तुरंत रिस्पॉन्स दिया जा सके।

भारत के सामने असली कूटनीतिक चुनौती

तो कुल मिलाकर, दिल्ली में हो रहा ये समिट सिर्फ एक फोटो ऑपच्यूनिटी नहीं है। भारत के सामने असली चैलेंज है 11 देशों को एक साझा घोषणापत्र पर राजी करना, चीन के साथ कॉम्पिटिशन के बावजूद डायलॉग बनाए रखना, रूस के साथ अपने स्ट्रैटेजिक रिश्ते को संभालना, और मिडिल ईस्ट के अलग अलग हितों वाले देशों को एक टेबल पर लाना। अगर भारत ट्रेड, पेमेंट सिस्टम्स, टेक्नोलॉजी और ग्लोबल साउथ जैसे मुद्दों पर ठोस प्रोग्रेस दिखा पाता है, तो यही असली कामयाबी मानी जाएगी। क्योंकि जैसा कहा जा रहा है, समिट की तस्वीरें तो एक दिन में भूल जाती हैं, लेकिन डिप्लोमेसी का असली नतीजा उसके बाद के महीनों और सालों में दिखता है। (BRICS Summit 2026)

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