BRICS Summit 2026: वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत और रूस के बीच कूटनीतिक संबंध एक बार फिर इतिहास के पन्नों पर मजबूती से दर्ज हो रहे हैं। नई दिल्ली में आयोजित उच्च स्तरीय ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई।
लगभग 45 मिनट से एक घंटे तक चली इस गहन वार्ता में जहाँ दोनों देशों के व्यापारिक, रणनीतिक और रक्षा सहयोग पर खुलकर चर्चा हुई, वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मुद्दा उठाया—ब्लैक सी (काला सागर) क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा।
यह पहला मौका नहीं है जब भारत ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा है, लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के पांचवें वर्ष में प्रवेश करने के साथ ही ब्लैक सी में व्यापारिक जहाजों पर बढ़ते हमलों ने भारत की चिंताओं को गहरा कर दिया है।
BRICS Summit 2026: मोदी-पुतिन की गर्मजोशी के बीच वैश्विक संकटों पर गंभीर मंथन
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तीन दिवसीय भारत दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे हैं। भारत मंडपम परिसर में आयोजित इस बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच गजब की गर्मजोशी देखी गई। बैठक समाप्त होने के बाद दोनों नेता एक ही कार में सवार होकर बिजनेस एग्जिबिशन देखने पहुंचे, जो दोनों देशों के अटूट और गहरे विश्वास का प्रतीक है।
पीएम मोदी ने पुतिन को तमिल की प्रसिद्ध कालजयी रचना ‘तिरुक्कुरल’ की रूसी भाषा में अनुवादित प्रति भी भेंट की। लेकिन इस गर्मजोशी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के बीच, गंभीर वैश्विक मुद्दों पर बेहद व्यावहारिक और ठोस बातचीत हुई। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) और ब्लैक सी क्षेत्र में जारी संघर्षों पर गहन चर्चा की। (BRICS Summit 2026)
ब्लैक सी में भारतीय नाविकों की सुरक्षा चिंता का मुख्य कारण
वैश्विक मर्चेंट नेवी में भारतीय नाविकों का बहुत बड़ा योगदान है। दुनिया भर के व्यापारिक जहाजों पर लाखों भारतीय अपनी सेवाएं दे रहे हैं। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे लंबे युद्ध के कारण ब्लैक सी (काला सागर) दुनिया का सबसे खतरनाक समुद्री क्षेत्र बन चुका है। हाल के महीनों में इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर रूसी और यूक्रेनी दोनों सेनाओं की ओर से भीषण हमले हुए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, ब्लैक सी में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों में कम से कम 5 भारतीय नाविक अपनी जान गंवा चुके हैं।
सुरक्षा की इस बिगड़ती स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने पूर्व में दोनों देशों के राजनयिकों को तलब कर अपनी कड़ी चिंता भी जताई थी। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन के सामने सीधे तौर पर यह बात रखी कि इस संघर्ष का वैश्विक समुद्री व्यापार और निर्दोष भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है। भारत के लिए अपने नागरिकों का जीवन सर्वोपरि है, और युद्ध क्षेत्र से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। (BRICS Summit 2026)
“संवाद और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता”
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के स्थापित रुख को दोहराते हुए पुतिन से कहा कि दुनिया को अब “अंतहीन युद्ध” के चक्रव्यूह से बाहर निकलकर “युद्ध के अंत” की ओर बढ़ना चाहिए। मोदी ने साफ शब्दों में कहा कि किसी भी विवाद या संघर्ष का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है। भारत किसी भी शांति प्रक्रिया या शांति प्रयासों में अपनी ओर से हरसंभव सहयोग देने के लिए पूरी तरह तैयार है। रूस ने भी यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक शांतिपूर्ण समाधान खोजने की दिशा में भारत की मध्यस्थता और रचनात्मक भूमिका का स्वागत किया है।
द्विपक्षीय संबंधों और व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प
भारतीय नाविकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय संघर्षों के अलावा, इस बैठक में भारत-रूस के मजबूत होते आर्थिक और रणनीतिक संबंधों की भी समीक्षा की गई। दोनों देशों ने वर्तमान में लगभग 65 बिलियन डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को साल 2030 तक बढ़ाकर 100 बिलियन डॉलर करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। (BRICS Summit 2026)
45 मिनट से अधिक चली इस वार्ता में दोनों नेताओं ने रक्षा सहयोग, क्रिटिकल मिनरल्स, असैन्य परमाणु ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, अंतरिक्ष और उर्वरक आपूर्ति जैसे क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई। राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए रूस आने का आधिकारिक निमंत्रण दिया, जिसे प्रधानमंत्री ने सहर्ष स्वीकार कर लिया है।
भारत की कूटनीति का बढ़ता कद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रूसी राष्ट्रपति के सामने ब्लैक सी में भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाना भारत की सिटिजन-फर्स्ट विदेश नीति का एक बड़ा उदाहरण है। यह दर्शाता है कि भारत वैश्विक शक्तियों के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को मजबूत बनाए रखते हुए भी अपने राष्ट्रीय हितों और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बिना किसी झिझक के अपनी बात रख सकता है।
भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के इस दौर में भी भारत और रूस की ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ लगातार मजबूत और लचीली बनी हुई है, और उम्मीद की जा सकती है कि भारत के इस कड़े रुख के बाद ब्लैक सी क्षेत्र में भारतीय नाविकों के लिए सुरक्षा के सुरक्षात्मक उपाय और कड़े किए जाएंगे। (BRICS Summit 2026)









