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Delhi: ‘फाइल बाबू’ के दिन लदे, अब ‘काम’ ही बचाएगा कुर्सी! मोदी सरकार के नए ‘चाबुक’ ने उड़ाई अफसरों की नींद

Delhi

Delhi: दिल्ली के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और ‘परेशानी’ पैदा करने वाली खबर। अगर आप सोचते हैं कि सरकारी दफ्तरों में चाय की चुस्कियों और फाइलों के इधर-उधर खिसकने से प्रमोशन मिल जाएगा, तो संभल जाइए! मोदी सरकार ने ‘एडमिनिस्ट्रेटिव स्कोरकार्ड‘ का वो चाबुक चलाया है जिससे ऊपर से लेकर नीचे तक के अधिकारियों की रातों की नींद उड़ गई है।

Delhi: ‘जी हुज़ूरी’ से नहीं, अब ‘आउटपुट’ से तय होगा प्रमोशन का रास्ता

अब तक सीनियर ब्यूरोक्रेट्स और सचिवों का काम केवल फाइलों पर हस्ताक्षर करना और उन्हें आगे बढ़ाना होता था। लेकिन अब सिस्टम बदल चुका है। सरकार ने साफ कह दिया है—”हमें फाइल मूवमेंट नहीं, वास्तविक परिणाम चाहिए।”

सरकार ने साफ कर दिया है कि, अब हर सचिव का एक ‘स्कोरकार्ड‘ बनेगा। अगर आपके विभाग ने जमीन पर काम नहीं किया, तो आपका स्कोर ‘जीरो’ होगा। इस नए सिस्टम ने सरकारी दफ्तरों के वातानुकूलित कमरों में पसीने छुड़ा दिए हैं। अब केवल ‘जी हुज़ूरी’ से काम नहीं चलेगा। (Delhi)

गपशप की जगह अब टारगेट की चर्चा

इस खबर ने दफ्तरों के अंदर के माहौल को पूरी तरह बदल दिया है। अब अधिकारियों के लिए अपने सहकर्मियों और जूनियर्स के साथ तालमेल बिठाना कोई विकल्प नहीं, बल्कि मजबूरी बन गया है। इस ‘एडमिनिस्ट्रेटिव स्कोरकार्ड’ ने अधिकारियों के बीच एक अजीब सी बेचैनी पैदा कर दी है। अब ऑफिस में गपशप की जगह ‘आउटपुट’ और ‘टारगेट’ की चर्चा ही रहेगी। (Delhi)

तो वहीं, प्रशासनिक गलियारों में मची इस खलबली पर विपक्ष भी नज़र गड़ाए हुए है। चर्चा है कि क्या यह स्कोरकार्ड वाकई पारदर्शिता लाएगा या फिर पसंदीदा अधिकारियों को नंबर देने का एक नया हथियार बनेगा?

फिलहाल, यह केवल एक नियम नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की जड़ें हिला देने वाला फैसला है। अब ‘साहब’ को अपनी कुर्सी बचाने के लिए पसीना बहाना होगा और अपने सहकर्मियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना होगा। दिल्ली के सचिवालय में आज फाइलें नहीं, बल्कि अधिकारियों के दिल धड़क रहे हैं! (Delhi)

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