Dussehra 2026: अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय के महापर्व विजयादशमी के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर में विधि-विधान से पारंपरिक पूजा-अर्चना संपन्न की। हर साल की तरह इस साल भी नाथपंथ की अनूठी और दिव्य आध्यात्मिक विरासत का निर्वहन करते हुए मुख्यमंत्री ने शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ जी एवं मंदिर परिसर में स्थापित समस्त देव विग्रहों का पूजन कर चराचर जगत के कल्याण और राज्य की सुख-समृद्धि की कामना की।
Dussehra 2026: श्रीनाथ जी का विशिष्ट पूजन और लोक-कल्याण का संकल्प
विजयादशमी की सुबह गोरखनाथ मंदिर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय और उल्लास से सराबोर नजर आया। तुरही, नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज तथा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ मठ से मुख्य मंदिर परिसर में पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले नाथपंथ के प्रणेता शिवावतार गुरु गोरखनाथ जी के समक्ष श्रद्धापूर्वक शीश नवाया और उनका विशिष्ट पूजन किया।
इस दिव्य अनुष्ठान के दौरान उन्होंने गुरु गोरखनाथ को वस्त्र, फल और नैवेद्य अर्पित कर आरती उतारी। गोरक्षपीठ की मान्यता के अनुसार, विजयादशमी के दिन श्रीनाथ जी का पूजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह समूचे समाज में सकारात्मक ऊर्जा के संचार और लोक-कल्याण के प्रति गुरु के आशीर्वाद को प्राप्त करने का एक पवित्र माध्यम है। (Dussehra 2026)
देव विग्रहों की आराधना और परंपरा का निर्वहन
गुरु गोरखनाथ जी की विशेष पूजा-अर्चना संपन्न करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिर परिसर की परिक्रमा की और वहां स्थापित सभी देवी-देवताओं के विग्रहों का अर्चन किया। उन्होंने मंदिर परिसर में विराजमान भगवान गणेश, माता दुर्गा, कालभैरव, भगवान शिव, हनुमान जी और नौ ग्रहों के विग्रहों की विधिवत पूजा की।
इस अवसर पर उपस्थित साधु-संतों और वेदपाठी ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चार कर अनुष्ठान को पूर्ण कराया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के समाधि स्थल पर जाकर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की और नमन किया। यह क्षण अध्यात्म और गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति उनकी अगाध श्रद्धा को प्रदर्शित करता है।
तिलकोत्सव और विजय शोभायात्रा की भव्यता
गोरखनाथ मंदिर में विजयादशमी के दिन धार्मिक अनुष्ठानों की यह श्रृंखला केवल पूजा तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका सामाजिक महत्व भी अत्यंत व्यापक है। दोपहर के समय मंदिर में पारंपरिक तिलकोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है, जिसमें नाथ संप्रदाय के योगियों, साधु-संतों के साथ-साथ बड़ी संख्या में आम श्रद्धालु गोरक्षपीठाधीश्वर का तिलक-वंदन करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। (Dussehra 2026)
शाम के समय मंदिर से निकलने वाली ऐतिहासिक एवं भव्य विजय शोभायात्रा की अगुवाई स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करते हैं। विशेष रथ पर सवार होकर निकलने वाली यह शोभायात्रा समाज में समरसता, एकता और राष्ट्रभक्ति का संदेश देती है, जिसमें अमीर-गरीब और जातिगत भेदभाव से परे होकर सर्वसमाज के लोग उत्साहपूर्वक सम्मिलित होते हैं।
गोरखनाथ मंदिर में आयोजित यह संपूर्ण अनुष्ठान और उत्सव इस बात का जीवंत प्रमाण हैं कि किस प्रकार सदियों पुरानी आध्यात्मिक परंपराएं आज भी आधुनिक समाज को एकजुट करने और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।









