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ECI Vs Akhilesh Yadav: “चुनाव आयोग ने अखिलेश यादव को दिया करारा जवाब,याद दिलाई बचपन की कहानी”, जानिए क्या है पूरा मसला

आपने बचपन में वह कहानी सुनी है जहाँ एक चरवाहा लड़का मनोरंजन के लिए बार-बार चिल्लाता था—”भेड़िया आया, भेड़िया आया!”? जब सच में भेड़िया आया, तो उसकी मदद को कोई नहीं पहुँचा। आज भारतीय लोकतंत्र के सबसे बड़े मंच पर कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिल रहा है, जहाँ देश की संवैधानिक संस्था यानी चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को इसी ‘भेड़िया’ वाले मोड में रहने की चेतावनी दी है। आयोग का सीधा संदेश है: “सबूत लाइए, कहानियाँ नहीं।”

भारतीय राजनीति में इन दिनों ‘शब्द बाण’ और ‘किस्सों’ की जबरदस्त जंग छिड़ी हुई है। चुनाव आयोग (ECI) ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव द्वारा चुनाव प्रक्रिया और निष्पक्षता पर बार-बार उठाए जा रहे सवालों का जवाब बेहद सख्त लहजे में दिया है। आयोग ने उन्हें बचपन की प्रसिद्ध कहानी ‘भेड़िया आया’ (The Boy Who Cried Wolf) की याद दिलाते हुए आगाह किया है कि बिना तथ्यों के शोर मचाना लोकतंत्र के लिए घातक है।

यह खबर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों और उसके जवाब में चुनाव आयोग की तीखी प्रतिक्रिया के इर्द-गिर्द है।

हाल के महीनों में, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में SIR (Systematic Information Review) और मतदाता सूचियों में नाम काटने/जोड़ने की प्रक्रिया को लेकर अखिलेश यादव लगातार हमलावर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी, प्रशासन और चुनाव आयोग मिलकर विपक्ष के वोट काटने की साजिश रच रहे हैं।

आयोग का ‘भेड़िया आया’ प्रहार: चुनाव आयोग ने एक आधिकारिक संवाद में स्पष्ट किया कि विपक्ष द्वारा बार-बार EVM, मतदाता सूची और धांधली के आरोप लगाए जाते हैं, लेकिन जब आयोग सबूत (Affidavits) मांगता है, तो वे पीछे हट जाते हैं। आयोग ने कहा कि बार-बार “धांधली हुई” का झूठा शोर मचाना वैसा ही है जैसे उस चरवाहे लड़के का शोर, जिससे जनता का चुनावी प्रक्रिया पर से भरोसा उठ सकता है।

शपथ पत्र (Affidavit) का पेंच: आयोग ने खुलासा किया कि अगस्त 2025 और उसके बाद के विरोध प्रदर्शनों के दौरान सपा की ओर से 18,000 शपथ पत्र देने का दावा किया गया था, लेकिन आयोग के अनुसार, नियम 20(3)(B) के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। आयोग ने दो टूक कहा—”बेईमानी न पहले हुई थी, न अब हो रही है।”

तथ्यात्मक काउंटर: चुनाव आयोग ने डेटा जारी करते हुए बताया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। आयोग ने अखिलेश यादव को चेतावनी दी कि संवैधानिक संस्थाओं पर इस तरह के निराधार हमले न केवल उनकी राजनीतिक साख को नुकसान पहुँचाते हैं, बल्कि देश के मतदाताओं के मन में भ्रम पैदा करते हैं।

वर्तमान स्थिति: स्थिति यह है कि विपक्ष अब भी ‘वोटर अधिकार यात्रा’ और सदन के माध्यम से चुनाव आयोग में सुधारों की मांग कर रहा है, जबकि आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी ‘राजनीतिक नैरेटिव’ के दबाव में नहीं आएगा।

अब देखना यह है कि सपा कोर्ट जाती है या बातचीत से हल निकलता है. क्या यह महज राजनीतिक ड्रामा है या वोटर अधिकारों का सवाल। इस मामले पर समाजवादी पार्टी प्रवक्ता जूही सिंह ने ‘आज तक’ को बताया कि चुनाव आयोग अगर भेड़िए की कहानी सुनाने के बजाय बहराइच में भेड़ियों के एनकाउंटर करने के बजाय उन्हें पकड़ लेता तो कितनी जान बच जाती. हम सवाल कर रहे हैं और आयोग पंचतंत्र की कहानी सुना रहा है।

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