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खेती से निकलेगा ‘हरा सोना’! भारतीय वैज्ञानिकों का दुनिया में डंका, अब पराली से बनेगा ‘ग्रीन स्टील’!

Green Steel in India

Green Steel in India: भारत के अन्नदाता अब सिर्फ देश का पेट ही नहीं भरेंगे, बल्कि दुनिया के सबसे प्रदूषित उद्योग यानी स्टील सेक्टर को भी ‘साफ-सुथरा’ बनाएंगे। सीएसआईआर (CSIR) और CSIRO (ऑस्ट्रेलिया) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी क्रांतिकारी तकनीक का सफल परीक्षण किया है, जो खेती के कचरे (Ag-waste) को ‘ग्रीन स्टील’ में बदल देगी। यह खोज न केवल पर्यावरण के लिए वरदान है, बल्कि भारतीय कृषि क्षेत्र में एक नए युग का सूत्रपात है।

Green Steel in India: CO2 उत्सर्जन में 80% तक की कमी

सालों से दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत के लिए सिरदर्द बनी ‘पराली’ अब फैक्ट्रियों के लिए कच्चा माल बनेगी। वैज्ञानिकों ने लोहे के अयस्क को पिघलाने के लिए कोयले की जगह खेती के कचरे का इस्तेमाल करने का रास्ता खोज लिया है। जिससे स्टील उद्योग दुनिया के सबसे बड़े कार्बन उत्सर्जकों में से एक है।

‘ग्रीन स्टील’ तकनीक से CO2 उत्सर्जन में 60% से 80% तक की कमी आने की संभावना है। और अब पारंपरिक ब्लास्ट फर्नेस में इस्तेमाल होने वाले कोकिंग कोल की जगह अब प्रोसेस किया हुआ कृषि-कचरा लेगा। फिलहाल किसान अब अपनी पराली और कचरे को कंपनियों को बेच सकेंगे, जिससे उनकी आय में भारी इजाफा होगा। (Green Steel in India)

‘नेट जीरो’ लक्ष्य की दिशा में भारत और ऑस्ट्रेलिया का योगदान

यह सिर्फ एक वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, बल्कि हमारे किसानों को ‘ऊर्जादाता’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अब लोहा भी खेती से निकलेगा! दुनिया जब ‘नेट जीरो’ (Net Zero) लक्ष्य की ओर बढ़ रही है, तब भारत और ऑस्ट्रेलिया की इस संयुक्त रिसर्च ने भविष्य का रास्ता दिखा दिया है। ‘ग्रीन स्टील’ से बनी कारें, इमारतें और पुल अब धरती पर कम बोझ डालेंगे। (Green Steel in India)

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