Himachal Monsoon: हिमाचल प्रदेश में मानसून की तबाही से अब तक 430 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से 245 लोगों की जान भूस्खलन, बाढ़, डूबने और बिजली गिरने जैसी घटनाओं में गई है, जबकि 185 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई है। राज्य में 373 सड़कें अभी भी अवरुद्ध हैं, जिनमें दो राष्ट्रीय राजमार्ग शामिल हैं। इसके अलावा, 43 वितरण ट्रांसफार्मर ठप हो गए हैं और 145 जल आपूर्ति योजनाएं बंद हैं।
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) ने शनिवार को 20 जून से अब तक 430 लोगों की मौत की पुष्टि की है। इनमें से 245 लोगों की जान भूस्खलन, बाढ़, डूबने और बिजली गिरने जैसी वर्षाजनित घटनाओं में गई, जबकि 185 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई।
राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) के अनुसार, शनिवार शाम तक, दो राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच-03 और एनएच-503ए) सहित 373 सड़कें अवरुद्ध रहीं। बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई और 43 वितरण ट्रांसफार्मर ठप हो गए। जल आपूर्ति योजनाओं को भारी नुकसान हुआ और जिलों में 145 योजनाएँ अभी भी बंद हैं। (Himachal Monsoon)
सबसे अधिक प्रभावित जिले (Himachal Monsoon)
ज़िलेवार आँकड़ों के अनुसार, मंडी (128 सड़कें), कुल्लू (109 सड़कें) और कांगड़ा (34 सड़कें) सड़क अवरोधों से सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं। मंडी (83 योजनाएँ), शिमला (27 योजनाएँ) और हमीरपुर (9 योजनाएँ) में पेयजल योजनाएँ बुरी तरह बाधित हुईं।
एसडीएमए ने अपने बयान में कहा, “बारिश कम होने के कारण स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है, लेकिन सड़कों, बिजली और पेयजल योजनाओं की बहाली में अभी और समय लगेगा। नुकसान का आकलन अभी भी जारी है और नुकसान के सटीक आंकड़े जल्द ही अपडेट किए जाएंगे।”
नुकसान का आंकड़ा
इस वर्ष मानसून के प्रकोप से अब तक 6,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है, जबकि पुनर्निर्माण कार्य जारी है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, नुकसान का आकलन अभी भी जारी है और सटीक आंकड़े जल्द ही अपडेट किए जाएंगे।
सरकार की कार्रवाई (Himachal Monsoon)
इस बीच, पिछले तीन वर्षों में भारी बारिश और भूस्खलन से हुए व्यापक विनाश से सबक लेते हुए, हिमाचल प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में भी भवन निर्माण के सख्त मानदंडों को लागू करने जा रही है। राज्य के नगर एवं ग्राम नियोजन तथा तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने शनिवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने के उद्देश्य से उठाए गए इस कदम पर अगली कैबिनेट बैठक में विचार किया जाएगा।
धर्माणी ने कहा कि राज्य अब आपदा-प्रवण क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों की अनदेखी नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के तहत भवन निर्माण मानदंड बनाने की योजना बना रही है। एक ही दिशानिर्देश को एक साथ हर जगह लागू करना मुश्किल है, लेकिन जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों और पहाड़ी राज्य में आपदाओं की बढ़ती आवृत्ति को देखते हुए, यह ज़रूरी है कि हम संवेदनशील क्षेत्रों के लिए भी ऐसे नियम बनाएँ।
मंत्री ने कहा कि नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग ने ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के साथ समन्वय करके पहले ही दिशानिर्देशों का मसौदा तैयार कर लिया है। इन्हें अगली कैबिनेट बैठक में विस्तार से प्रस्तुत किया जाएगा। विचार-विमर्श के बाद, आगे के सुझावों को भी शामिल किया जाएगा और जानकारी जनता के प्रतिनिधियों के माध्यम से उनके साथ साझा की जाएगी।









