UP Election 2027: ‘इस बार भाजपा 300 पार…’, यूपी चुनाव से पहले डिप्टी सीएम केशव मौर्य का बड़ा दावा UP को मिलेंगे 4 नए लिंक एक्सप्रेसवे… रोबोटिक्स पार्क और साइबर सेंटर को मंजूरी; योगी सरकार ने 22 प्रस्तावों पर लगाई मुहर UP Election 2027: ‘ओवैसी यूपी के लिए बहुत उत्तम, योगी को फायदा होगा’, बाबा रामदेव के बयान से प्रदेश की सियासत में हलचल यूपी में Cyclone Arnab का खतरा! 40-50 KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं, इन जिलों में IMD का अलर्ट; किसानों को दी गई खास सलाह Microsoft का बड़ा फैसला! 60,000 कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने का ऑफर, भारत पर भी पड़ सकता है असर MLC Election Result 2026: यूपी, बिहार समेत 4 राज्यों की 28 सीटों पर मतगणना, जानें कहां किसके बीच मुकाबला
UP Election 2027: ‘इस बार भाजपा 300 पार…’, यूपी चुनाव से पहले डिप्टी सीएम केशव मौर्य का बड़ा दावा UP को मिलेंगे 4 नए लिंक एक्सप्रेसवे… रोबोटिक्स पार्क और साइबर सेंटर को मंजूरी; योगी सरकार ने 22 प्रस्तावों पर लगाई मुहर UP Election 2027: ‘ओवैसी यूपी के लिए बहुत उत्तम, योगी को फायदा होगा’, बाबा रामदेव के बयान से प्रदेश की सियासत में हलचल यूपी में Cyclone Arnab का खतरा! 40-50 KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं, इन जिलों में IMD का अलर्ट; किसानों को दी गई खास सलाह Microsoft का बड़ा फैसला! 60,000 कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने का ऑफर, भारत पर भी पड़ सकता है असर MLC Election Result 2026: यूपी, बिहार समेत 4 राज्यों की 28 सीटों पर मतगणना, जानें कहां किसके बीच मुकाबला

भारत-बांग्लादेश संबंध: क्या चुनाव के बाद बदल जाएगी दोस्ती की दिशा? ढाका की राजनीति में ‘दिल्ली’ बनाम ‘इस्लामाबाद’ का नया मोड़

बांग्लादेश

साल 1971 में जब बांग्लादेश का जन्म हुआ, तब भारत उसके लिए सिर्फ एक पड़ोसी नहीं, बल्कि सबसे बड़ा सहारा था। शरणार्थियों का बोझ उठाने से लेकर युद्ध के मैदान तक, भारत ने एक नई सरकार को खड़ा करने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। दशकों तक यह रिश्ता सुरक्षा, व्यापार और कनेक्टिविटी की मजबूत बुनियाद पर टिका रहा। खासकर शेख हसीना के दौर में दोनों देशों के रिश्तों ने ‘स्वर्ण युग’ देखा। लेकिन, शेख हसीना के सत्ता से हटने और बांग्लादेश में चुनावी हलचल तेज होने के बाद अब यह सवाल बड़ा हो गया है—क्या चुनाव के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों की दिशा पूरी तरह बदल जाएगी?

चुनावी शोर में ‘भारत विरोध’ का नैरेटिव

जैसे-जैसे बांग्लादेश में चुनाव करीब आ रहे हैं, वहां की घरेलू राजनीति में भारत का नाम एक बड़े मुद्दे के तौर पर गूंजने लगा है। विपक्षी दलों ने शेख हसीना की “भारत के साथ नजदीकी” को संप्रभुता से जोड़कर चुनावी मुद्दा बना दिया है। चुनावी मंचों से यह सवाल बार-बार उठ रहा है कि क्या बांग्लादेश की विदेश नीति का संतुलन बिगड़ गया है? राष्ट्रवाद और संप्रभुता के इसी नैरेटिव ने सीमा विवाद, व्यापार असंतुलन और तीस्ता नदी जैसे जल बंटवारे के पुराने जख्मों को फिर से हरा कर दिया है। सोशल मीडिया पर भी भारत विरोधी लहर को हवा दी जा रही है, जो रिश्तों में खिंचाव पैदा कर रही है।

पाकिस्तान से बढ़ती नजदीकी: रणनीति या चुनावी संकेत?

इसी बीच, ढाका का एक कदम सबसे ज्यादा चौंकाने वाला है—इस्लामाबाद के साथ रिश्तों को फिर से सक्रिय करना। सीधी फ्लाइट्स की शुरुआत, डिप्लोमैटिक मुलाकातों का दौर और नई बातचीत इस बात का संकेत है कि बांग्लादेश अब अपने विकल्प खुले रखना चाहता है। जानकारों का मानना है कि यह सिर्फ विदेश नीति नहीं, बल्कि चुनावी माहौल में दिया गया एक रणनीतिक संकेत है। भारत ने फिलहाल इस पर संयम बरता है, लेकिन रणनीतिक गलियारों में यह हलचल साफ है कि बांग्लादेश की भविष्य की सरकार अपने हितों के लिए संतुलन साधने की कोशिश करेगी।

भरोसा और इंतज़ार: क्या पहले जैसी सहजता लौटेगी?

आज भारत और बांग्लादेश के रिश्ते एक ऐसे मोड़ पर हैं जहाँ संवाद तो हो रहा है, लेकिन पहले जैसी सहजता गायब है। भारत ‘वेट एंड वॉच’ (इंतज़ार करो और देखो) की नीति अपनाए हुए है। उसे पता है कि चुनावी मौसम में दिए गए बयान अक्सर स्थायी नीति नहीं बनते। हालांकि, असली दिशा चुनाव के नतीजे ही तय करेंगे। सवाल यह है कि क्या नई सरकार बनने के बाद पुरानी कड़वाहट खत्म होगी, या फिर दक्षिण एशिया का यह सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक रिश्ता किसी नई और अनिश्चित दिशा की ओर मुड़ जाएगा?

Comments are closed.

और पढ़ें