INDIA bloc Protest Against CEC Gyanesh Kumar: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देश के कई हिस्सों में विपक्ष का उग्र विरोध प्रदर्शन जारी है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा चलाई जा रही विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया और आयोग के भीतर आंतरिक मतभेदों की खबरें सामने आने के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब सड़कों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन ने इसे लोकतंत्र पर हमला और वोट चोरी करार देते हुए देशव्यापी मोर्चा खोल दिया है।
भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास में यह पहली बार है जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष ने इस पैमाने पर देशव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंका है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार इन दिनों विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समाज के निशाने पर हैं। 2 अक्टूबर से शुरू हुआ यह प्रदर्शन अब दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों से आगे बढ़कर देश के विभिन्न राज्यों के जिला मुख्यालयों तक फैल चुका है।
विवाद की जड़: क्या है ‘SIR’ और क्यों उठ रहे हैं सवाल? (INDIA bloc Protest Against CEC Gyanesh Kumar)
इस पूरे बवाल के केंद्र में निर्वाचन आयोग की विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया है। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सहित सभी विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत देश भर में कथित तौर पर करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से मनमाने ढंग से हटा दिए गए हैं। विपक्ष का आरोप है कि यह सत्तारूढ़ दल को फायदा पहुंचाने के लिए वोटरों की सोची-समझी बेदखली है।
एक मीडिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि आयोग के भीतर ही अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार बिना उनकी जानकारी या सहमति के जारी किए गए निर्णयों पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी। इस खुलासे ने विपक्ष के आरोपों को और हवा दे दी है।
देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन
दिल्ली (संसद मार्ग और जंतर-मंतर)
देश की राजधानी दिल्ली में सबसे तीखी झड़पें देखने को मिल रही हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में संसद भवन से चुनाव आयोग मुख्यालय की तरफ मार्च निकाला जा रहा है। इस दौरान कई विपक्षी सांसदों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में भी लिया। एक प्रदर्शन के दौरान प्रियंका गांधी हाथ में संविधान की प्रति लेकर जमीन पर बैठ गईं, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। (INDIA bloc Protest Against CEC Gyanesh Kumar)
मुंबई और बेंगलुरु
मुंबई के शिवाजी पार्क में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और अन्य छात्र संगठनों (AISA, SFI) के नेतृत्व में एक विशाल विरोध प्रदर्शन किया गया। वहीं बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में ‘पीपुल्स ट्रिब्यूनल’ का आयोजन किया गया, जिसमें प्रख्यात अभिनेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।
बिहार, मध्य प्रदेश और ओडिशा
पटना में तेजस्वी यादव की अगुवाई में विपक्षी दलों ने राजभवन तक मार्च निकाला और राज्य के तमाम जिला मुख्यालयों पर धरना दिया। वहीं, ओडिशा के भुवनेश्वर, कटक और संबलपुर समेत कई जिलों में चक्का जाम और राष्ट्रीय राजमार्गों को अवरुद्ध कर प्रदर्शन किया गया। (INDIA bloc Protest Against CEC Gyanesh Kumar)
विपक्ष की तीन मुख्य मांगें
विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ इस आंदोलन में इन मांगों पर अड़ा हुआ है-
- विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के तुरंत इस्तीफे की मांग कर रहा है।
- मतदाता सूची संशोधन की मौजूदा प्रक्रिया को तुरंत रद्द किया जाए और हटाए गए नामों को बहाल किया जाए।
- निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति अमित शाह और पीएम मोदी की पसंद के बजाय एक स्वतंत्र और निष्पक्ष कॉलेजियम के जरिए हो।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और केरल में पुराना मामला
सड़क के इस संग्राम के बीच यह मामला देश की सर्वोच्च अदालत तक भी पहुंच चुका है। 5 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर एक हफ्ते के अंदर जवाब मांगा है। अदालत में दायर याचिकाओं में ज्ञानेश कुमार को तुरंत निलंबित करने और एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने की मांग की गई थी। हालांकि, कोर्ट ने तत्काल अंतरिम निलंबन लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन यह साफ किया कि यदि आयोग के फैसले बिना बहुमत या आम सहमति के लिए गए पाए गए, तो कोर्ट उन पर रोक लगा सकता है। (INDIA bloc Protest Against CEC Gyanesh Kumar)
केरल में 20 साल पुराने मामले की री-ओपनिंग
ज्ञानेश कुमार की मुश्किलें तब और बढ़ गईं जब केरल सरकार के गृह विभाग ने वर्ष 2006 (जब ज्ञानेश कुमार केरल कैडर के PWD सचिव थे) के एक सड़क अपग्रेडेशन प्रोजेक्ट में कथित भ्रष्टाचार और एक मलेशियाई इंजीनियर की आत्महत्या से जुड़े 20 साल पुराने मामले की सतर्कता जांच दोबारा शुरू करने के आदेश दे दिए।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: पक्ष बनाम विपक्ष
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने साफ कहा है कि, “वे मार्च रोक सकते हैं, वे बैठक करने से मना कर सकते हैं, लेकिन वे जनता की इच्छाशक्ति को नहीं रोक सकते। जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, यह आंदोलन थमेगा नहीं।” वहीं, आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय मिलकर शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रदर्शनों को कुचलने का काम कर रहे हैं। विपक्ष की मांग है कि SIR को तुरंत रोका जाए, हटाए गए नामों को बहाल किया जाए और चुनाव पुरानी बैलट पेपर प्रणाली से कराए जाएं। (INDIA bloc Protest Against CEC Gyanesh Kumar)
वहीं, भारतीय जनता पार्टी और एनडीए सरकार ने विपक्ष के इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और ‘चुनावी हार की हताशा’ करार दिया है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि चुनावों में अपनी संभावित हार के डर से विपक्ष जानबूझकर देश की संवैधानिक संस्थाओं पर कीचड़ उछाल रहा है और देश में अराजकता का माहौल पैदा करने का प्रायोजित प्रयास कर रहा है। चुनाव आयोग ने भी आधिकारिक रूप से किसी भी गड़बड़ी से इनकार किया है और कहा है कि यह प्रक्रिया केवल फर्जी या डुप्लिकेट नामों को हटाने के लिए की जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया की नजरें
भारत के शीर्ष चुनाव अधिकारी के खिलाफ इतने बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों की गूंज वैश्विक स्तर पर भी सुनाई दे रही है। ब्रिटेन के द गार्डियन और फाइनेंशियल टाइम्स, जर्मनी के डॉयचे वेले, कतर के अल जजीरा और पाकिस्तान के डॉन जैसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटलेट्स ने इस विरोध प्रदर्शन को प्रमुखता से कवर किया है। विदेशी मीडिया इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती और भारत की चुनावी साख पर एक बड़े सवाल के रूप में देख रहा है। (INDIA bloc Protest Against CEC Gyanesh Kumar)
सुरक्षा व्यवस्था और Z+ सिक्योरिटी
लगातार बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और खुफिया विभाग से मिलीं धमकियों के इनपुट के बाद, दिल्ली पुलिस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की Z+ सुरक्षा को और कड़ा कर दिया है। उनके दिल्ली स्थित आवास और चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर भारी मात्रा में अतिरिक्त सुरक्षा बल और बैरिकेड्स तैनात किए गए हैं।









