” ग्रेटर नोएडा में आज से शुरू हुआ ‘Indusfood 2026’ इसी सवाल का जवाब है। मसालों से लेकर मिलेट्स तक, और तकनीक से लेकर स्वाद तक—देखिये कैसे ‘मेड इन इंडिया’ का स्वाद अब सात समंदर पार धूम मचाने के लिए तैयार है। यह सिर्फ एक ट्रेड शो नहीं, भारतीय किसानों और उद्यमियों की वैश्विक जीत की कहानी है!”
भारत की खाद्य शक्ति (Food Power) का लोहा अब पूरी दुनिया मानने को तैयार है। आज ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर और मार्ट में तीन दिवसीय ‘Indusfood 2026’ प्रदर्शनी का शानदार आगाज़ हुआ। यह आयोजन केवल एक व्यापारिक प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि यह बदलते भारत की उस सामर्थ्य का प्रतीक है जो वैश्विक खाद्य बाज़ार में अपनी अमिट छाप छोड़ने जा रहा है।

केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री चिराग पासवान ने दीप प्रज्वलित कर इस तीन दिवसीय आयोजन का उद्घाटन किया। इस दौरान पूरे परिसर में ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ के नारों की गूंज के साथ भारतीय उत्पादों के प्रति एक अलग ही उत्साह देखने को मिला। आपको बताते चलें कि यहां दुनिया भर के 100 से अधिक देशों के खरीदार और प्रतिनिधि यहाँ भारतीय खाद्य उत्पादों को देखने और बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर करने पहुंचे हैं। तो वहीं विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस तीन दिवसीय आयोजन के दौरान अरबों रुपये के व्यापारिक समझौतों पर मुहर लगेगी, जिससे भारतीय निर्यात (Export) को एक नई रफ़्तार मिलेगी। फिलहाल मसालों से लेकर ऑर्गेनिक अनाज तक और फ्रोजन फूड से लेकर रेडी-टू-ईट भोजन तक, भारतीय प्रदर्शकों ने अपनी विविधता से विदेशी मेहमानों को मंत्रमुग्ध कर दिया है।
प्रदर्शनी में इस साल ‘सस्टेनेबल फूड’ और ‘मिलेट्स’ (श्री अन्न) पर विशेष जोर दिया गया है। भारत के मोटे अनाजों की मांग विदेशों में तेज़ी से बढ़ रही है, और ‘Indusfood 2026’ इसे भुनाने का सबसे बड़ा मंच बन गया है। और जब भारतीय उत्पादों की वैश्विक मांग बढ़ेगी, तो इसका सीधा लाभ हमारे अन्नदाताओं को मिलेगा। तो वहीं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में विस्तार से लाखों युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है। यदि देखा जाए तो वैश्विक खरीदारों के साथ होने वाले समझौतों से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। जिससे भारतीय गुणवत्ता मानकों (Quality Standards) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल रही है।

Indusfood 2026′ का यह आगाज़ देश के लिए गौरव का क्षण है। यह आयोजन न केवल भारत के व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित करेगा। आने वाले तीन दिन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित होने वाले हैं।









