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Maharashtra Politics: असंभव का ‘महा-मिलन’! महाराष्ट्र में बीजेपी की वो ‘खिचड़ी’ जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी!

“राजनीति में कोई स्थायी दुश्मन नहीं होता, लेकिन महाराष्ट्र ने तो हद ही कर दी! जिस कांग्रेस और AIMIM को बीजेपी पानी पी-पीकर कोसती थी, आज उसी के साथ मिलकर सरकार बनाने की खबरें आ रही हैं। अंबरनाथ से लेकर अकोला तक, आखिर क्यों बीजेपी के जमीनी कार्यकर्ता अपने ही सहयोगियों के खिलाफ बगावत पर उतर आए हैं? क्या यह 2026 के बड़े सियासी बदलाव का संकेत है या सिर्फ सत्ता की मलाई का खेल? देखिए महाराष्ट्र की राजनीति का सबसे बड़ा खुलासा!”

विचारधारा की मृत्यु‘ या ‘सत्ता का चरम‘

महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति ने वो दिन देख लिया जिसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में ‘विचारधारा की मृत्यु’ या ‘सत्ता का चरम’ कहा जाएगा। जिस भाजपा ने दशकों तक कांग्रेस को अपना सबसे बड़ा वैचारिक शत्रु माना और ओवैसी की पार्टी AIMIM को ‘राष्ट्रवाद’ की कसौटी पर परखा, आज उसी भाजपा ने सत्ता की एक-एक कुर्सी के लिए इन दोनों ध्रुव-विरोधी दलों के साथ ‘निकाह’ और ‘गठबंधन’ कर लिया है।

अकोट में ‘केसरिया और हरा’ एक साथ?

अकोला के अकोट नगर परिषद में एक और चौंकाने वाला वाकया हुआ, जहाँ BJP ने AIMIM के पार्षदों के साथ हाथ मिला लिया। इस पर पार्टी ने सख्त रुख अपनाते हुए स्थानीय विधायक प्रकाश भारसाकले को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

BMC चुनाव 2026: भाई-भाई आए साथ (The Thackeray Reunion)

मुंबई नगर निगम (BMC) के आगामी चुनावों (15 जनवरी 2026) से पहले एक और बड़ा ‘महा-मिलन’ हुआ है। 20 साल के अलगाव के बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे (Uddhav Raj) ‘मराठी मानुस’ के मुद्दे पर एक साथ आए हैं। शिवसेना (UBT) और मनसे (MNS) का यह गठबंधन महायुति के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

यह खबर केवल एक गठबंधन की नहीं है, बल्कि उस सियासी ड्रामे की है जिसने कार्यकर्ताओं के होश उड़ा दिए हैं और दिग्गजों को खामोश कर दिया है। महाराष्ट्र की राजनीति अपनी अनिश्चितता के लिए जानी जाती है, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने राजनीतिक पंडितों और आम जनता दोनों को हतप्रभ कर दिया है। राज्य के निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने ऐसे दलों के साथ हाथ मिलाया है, जो वैचारिक रूप से उनके ध्रुव विरोधी माने जाते हैं। ठाणे के अंबरनाथ में कांग्रेस और अकोला के आकोट में AIMIM के साथ हुए गठबंधन ने सियासी गलियारों में बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

जहाँ स्थानीय स्तर पर सत्ता के समीकरण साधने के लिए हुए इन समझौतों ने सबको चौंका दिया है। तो वहीं भाजपा ने अपनी धुर विरोधी कांग्रेस के साथ गठबंधन किया है। जहां कल तक एक-दूसरे पर ‘भ्रष्टाचार’ और ‘तानाशाही’ का आरोप लगाने वाले नेता अब एक ही गठबंधन का हिस्सा हैं। यह गठबंधन और भी अधिक चौंकाने वाला है। भाजपा ने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के साथ हाथ मिलाया है। ‘हिंदुत्व’ की राजनीति और ‘अल्पसंख्यक पहचान’ की राजनीति करने वाले इन दो दलों का साथ आना किसी अजूबे से कम नहीं माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस फैसले से काफी नाराज़

फिलहाल इन ‘अप्राकृतिक’ गठबंधनों से महाराष्ट्र के कद्दावर नेता और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस बेहद खफा हैं। और उनका मानना है कि इस तरह के समझौतों से पार्टी की ‘कट्टर राष्ट्रवादी’ छवि को नुकसान पहुँच सकता है। और अब कयास लगाए जा रहे हैं कि यह निर्णय स्थानीय नेताओं द्वारा केंद्रीय या राज्य नेतृत्व को पूरी तरह भरोसे में लिए बिना लिया गया है।

आपको आगे बताते चलें कि

विपक्षी दलों ने इस गठबंधन पर तीखा हमला बोला है। शिवसेना (UBT) और अन्य विपक्षी नेताओं का कहना है कि जो भाजपा ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ की बात करती थी, वह अब सत्ता के लिए उनके चरणों में गिर गई है। वहीं, ओवैसी की पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर भाजपा के हिंदुत्व पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

महाराष्ट्र निकाय चुनावों के ये परिणाम और गठबंधन आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए एक नया ट्रेंड सेट कर सकते हैं। क्या मतदाता इस ‘महा-खिचड़ी’ को स्वीकार करेंगे या यह भाजपा के लिए आत्मघाती कदम साबित होगा? फिलहाल, सबकी नजरें दिल्ली हाईकमान और देवेंद्र फडणवीस के अगले कदम पर टिकी हैं।

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