Iran-US War: पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर एक और बड़े सैन्य हमले की खुली चेतावनी देने के बाद, तेहरान ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए खाड़ी में समुद्र के नीचे बिछी वैश्विक इंटरनेट केबलों को काटने की धमकी दी है। लगभग आठ महीनों से जारी इस युद्ध में अब एक नया और खतरनाक ‘डिजिटल फ्रंट’ खुलता नजर आ रहा है, जो न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था बल्कि पूरी दुनिया के कम्युनिकेशन सिस्टम को पंगु बना सकता है।
Iran-US War: ट्रंप का ‘लिटिल एपिक फ्यूरी’ का अल्टीमेटम
शुक्रवार को फ्लोरिडा में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सीधी चेतावनी दी। ट्रंप ने कहा कि अगर तेहरान जल्द ही वाशिंगटन के साथ एक नए राजनयिक समझौते पर नहीं पहुंचता है, तो अमेरिका ईरान के खिलाफ “अनदर लिटिल एपिक फ्यूरी” नाम से सैन्य अभियान शुरू कर सकता है।
गौरतलब है कि इसी साल फरवरी में शुरू हुए अमेरिका-इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत ही ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हुई थी, जिसके बाद यह भीषण युद्ध छिड़ गया था। ट्रंप ने रैली में दावा किया कि अमेरिका पहले ही ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ के जरिए ईरान की परमाणु संवर्धन क्षमताओं, उसकी अर्थव्यवस्था और सैन्य तंत्र को तबाह कर चुका है और अब वह इस मामले को अंतिम अंजाम तक पहुंचाने के लिए तैयार हैं। (Iran-US War)
हालांकि, ट्रंप के बयानों में हमेशा की तरह विरोधाभास भी दिखा। जहां एक तरफ उन्होंने नए हमलों की धमकी दी, वहीं दूसरी तरफ पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अमेरिका इस युद्ध को बहुत जल्द खत्म कर सकता है, लेकिन सवाल यह है कि इसे तुरंत खत्म किया जाए या धीरे-धीरे कमजोर पड़ने दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को जो चाहिए वह मिल रहा है और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते तेल की आपूर्ति लगातार जारी है।
ईरान का पलटवार- “इंटरनेट की लाइफलाइन काट देंगे”
ट्रंप की इस खुली धमकी के कुछ ही घंटों बाद तेहरान से बेहद आक्रामक और रणनीतिक प्रतिक्रिया आई। ईरानी सुरक्षा अधिकारियों और ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स’ (IRGC) के राजनीतिक मामलों के उप प्रमुख यदोल्लाह जावानी ने साफ किया है कि अगर ईरान के बुनियादी ढांचे पर दोबारा हमला हुआ, तो वे होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे मौजूद सात प्रमुख इंटरनेट केबलों को निशाना बनाएंगे।
रॉयटर्स से बात करते हुए एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने चेतावनी दी, “अगर ईरान पर हमला हुआ तो समुद्र के नीचे की केबल से लेकर सैन्य ठिकानों तक कोई भी जगह सुरक्षित नहीं रहेगी। अमेरिका को आग से नहीं खेलना चाहिए।” ईरान ने यह भी साफ किया है कि वे केवल केबलों को काटेंगे ही नहीं, बल्कि हमलों के बाद वहां होने वाले मरम्मत कार्य को भी रोकेंगे ताकि संचार ठप होने का संकट लंबे समय तक बना रहे। (Iran-US War)
डिजिटल युद्ध और $2 ट्रिलियन का इंफ्रास्ट्रक्चर खतरे में
ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रजाई के मुताबिक, आगामी युद्ध केवल तेल या जमीन के लिए नहीं, बल्कि डिजिटल रीढ़ पर लड़ा जाएगा। ईरान की नजर खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी प्रभाव वाले उन डेटा सेंटरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सुविधाओं पर भी है, जिनकी कीमत $2 ट्रिलियन से अधिक है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, होर्मुज और फारस की खाड़ी के इस हिस्से से कम से कम 17 प्रमुख सबमरीन केबल सिस्टम गुजरते हैं, जिनमें AAE-1, FALCON, Gulf Bridge International, EPEG, SMW5 और 2Africa Pearls जैसी वैश्विक केबल शामिल हैं। ये केबल यूरोप, अफ्रीका और एशिया के बीच डेटा ट्रांसफर का मुख्य जरिया हैं। (Iran-US War)
वैश्विक और क्षेत्रीय प्रभाव: क्या वाकई ठप होगा इंटरनेट?
टेलीकॉम रिसर्च फर्म टेलीग्राफी के विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान की इस धमकी के वैश्विक और क्षेत्रीय प्रभाव अलग-अलग हो सकते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के ठीक नीचे से अंतरराष्ट्रीय बैंडविड्थ का 1% से भी कम हिस्सा गुजरता है। एशिया से यूरोप जाने वाला अधिकांश वैश्विक डेटा रेड सी (लाल सागर) के रास्तों से होकर जाता है। इसलिए, वैश्विक स्तर पर इंटरनेट पूरी तरह बंद नहीं होगा।
खाड़ी के पड़ोसी देशों जैसे यूएई, सऊदी अरब, कतर, बहरीन के लिए यह बेहद विनाशकारी साबित हो सकता है। इन देशों के बैंकिंग सिस्टम, क्लाउड सर्विसेज (अमेज़न AWS, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल डेटा सेंटर्स) और स्थानीय कनेक्टिविटी पूरी तरह ठप हो सकती है। (Iran-US War)
दुनिया भर में बढ़ी चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते इस वाकयुद्ध ने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की नींद उड़ा दी है। इस्तांबुल में जुटे आठ यूरोपीय और मध्य-पूर्वी देशों के ‘एंटी-वॉर ब्लॉक’ ने अमेरिका और इजरायल से ईरान पर नए हमले न करने की पुरजोर अपील की है। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने चेतावनी दी है कि किसी भी नए सैन्य हमले से युद्ध पूरे क्षेत्र में फैल जाएगा और कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। दूसरी तरफ, खतरों को देखते हुए अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने अलर्ट जारी किया है। अमेरिका ने सऊदी अरब, यूएई, कतर और जॉर्डन में स्थित अपने दूतावासों से गैर-जरूरी राजनयिक स्टाफ को सुरक्षित बाहर निकालना शुरू कर दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य आक्रामकता और ईरान की ‘इंटरनेट केबल काटने’ की अनोखी डिजिटल धमकी ने मध्य-पूर्व संकट को एक नए चौराहे पर खड़ा कर दिया है। यदि दोनों पक्षों में से किसी ने भी पहला कदम उठाया, तो इसका खामियाजा बंदूक की गोलियों से दूर बैठी दुनिया को एक बड़े डिजिटल और आर्थिक ब्लैकआउट के तौर पर भुगतना पड़ सकता है। (Iran-US War)









