JNU Protest on UGC: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर रणक्षेत्र में तब्दील हो चुका है। कलम और किताब की इस धरती पर आज भारी सुरक्षा बल और छात्रों के बीच तीखी झड़पें देखने को मिलीं। UGC रेगुलेशन 2026 को लागू करने के खिलाफ छात्र संघ (JNUSU) ने अपनी आवाज़ बुलंद की है, लेकिन उस आवाज़ को दबाने के लिए प्रशासन ने पुलिसिया लाठियों और हिरासत का सहारा लिया है।
JNU Protest on UGC: ‘हम पढ़ने आए हैं, डंडे खाने नहीं’
सुबह से ही साबरमती ढाबे से लेकर एडमिन ब्लॉक तक नारों की गूंज सुनाई दे रही थी। छात्रों का आरोप है कि नया UGC रेगुलेशन उच्च शिक्षा को ‘अमीरों का खेल’ बना देगा और वंचित तबके के छात्रों के लिए यूनिवर्सिटी के दरवाजे बंद कर देगा। छात्रों का आरोप है कि, हम पढ़ने आए हैं, डंडे खाने नहीं! सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में पुलिस कर्मियों को छात्रों को घसीटते हुए देखा जा सकता है। करीब 50 से अधिक छात्रों को बस में भरकर अज्ञात स्थानों पर ले जाया गया है।
पक्ष-विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू
JNU का यह प्रदर्शन अब केवल कैंपस तक सीमित नहीं रहा, इसने देश के सियासी गलियारों में भी आग लगा दी है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। जहां विपक्षी नेताओं ने इसे “लोकतंत्र की हत्या” करार दिया है। उनका आरोप है कि सरकार जानबूझकर JNU जैसे वैचारिक संस्थानों को खत्म करना चाहती है और पुलिस का इस्तेमाल कर छात्रों की आवाज को कुचल रही है। (JNU Protest on UGC)
तो वहीं, सरकार और प्रशासन का कहना है कि यह प्रदर्शन “टुकड़े-टुकड़े गैंग” की नई साजिश है। आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ राजनीतिक पार्टियां निर्दोष छात्रों को ढाल बनाकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रही हैं और यूनिवर्सिटी का माहौल खराब कर रही हैं।
छावनी में तब्दील यूनिवर्सिटी
कैंपस के बाहर भारी पुलिस बल तैनात है और धारा 144 जैसे हालात बने हुए हैं। गेट नंबर 1 और 2 को पूरी तरह सील कर दिया गया है। देश की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार इन छात्रों की बात सुनेगी या फिर ये ‘इंसाफ की आवाज़’ सलाखों के पीछे ही दम तोड़ देगी? (JNU Protest on UGC)









