Rohith Vemula: दशकों से जातिगत भेदभाव की आग में झुलसते उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए आज का दिन एक नई सुबह लेकर आया है। कर्नाटक कैबिनेट ने बहुप्रतीक्षित ‘रोहित वेमुला बिल’ के ड्राफ्ट को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। यह कानून केवल एक कागजी दस्तावेज नहीं, बल्कि हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के उस छात्र की याद में एक जीवंत स्मारक है, जिसने 2016 में व्यवस्थागत उत्पीड़न के कारण दम तोड़ दिया था।
Rohith Vemula: अब दबेगी नहीं वंचित छात्रों की आवाज़
इस बिल का मुख्य उद्देश्य यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़े वर्गों के छात्रों के साथ होने वाले मानसिक और प्रशासनिक भेदभाव को जड़ से खत्म करना है। आपको बता दें कि अब इस बिल के द्वारा हर संस्थान में एक सशक्त सेल का गठन होगा, जो सीधे तौर पर उत्पीड़न की शिकायतों की सुनवाई करेगा। (Rohith Vemula)
यदि कोई प्रोफेसर या प्रशासनिक अधिकारी किसी छात्र को उसकी जाति के आधार पर प्रताड़ित करता पाया गया, तो उस पर भारी जुर्माने के साथ सेवा से बर्खास्तगी तक की कार्रवाई होगी। इससे वंचित वर्गों के छात्रों के लिए विशेष मानसिक स्वास्थ्य सहायता और मेंटरशिप प्रोग्राम अनिवार्य किए जाएंगे। फिलहाल अब संस्थानों को हर साल एक ‘विविधता और समावेशन रिपोर्ट’ पेश करनी होगी, जो इस बात का प्रमाण होगी कि उनके संस्थानों में किसी के साथ जाति भेदभाव नहीं हो रहा है।
क्या अब पूरा देश अपनाएगा ‘रोहित एक्ट’?
आपको बता दें, रोहित वेमुला (Rohith Vemula) की मृत्यु के बाद देशभर के छात्रों ने ‘रोहित एक्ट’ की मांग को लेकर आंदोलन किया था। 10 साल बाद, कर्नाटक इस क्रांतिकारी कानून को लागू करने वाला देश का अग्रणी राज्य बनने जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानून शिक्षा के मंदिर में ‘समानता के अधिकार’ को किताबी बातों से निकालकर धरातल पर लाएगा।
कर्नाटक सरकार का यह कदम देश के अन्य राज्यों के लिए एक नज़ीर पेश करता है। ‘रोहित वेमुला बिल’ इस बात का प्रमाण है कि लोकतंत्र में आवाजें भले ही दबा दी जाएं, लेकिन न्याय की गूंज कभी न कभी जरूर सुनाई देती है। (Rohith Vemula)









