NCERT Class 8 Textbook controversy: देश की सबसे प्रतिष्ठित शिक्षा संस्था NCERT आज शर्मसार है। जिस संस्था पर करोड़ों बच्चों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी है, उसने अपनी पाठ्यपुस्तकों में न्यायपालिका जैसी पवित्र संस्था को ‘भ्रष्ट’ बताकर अपनी गरिमा को तार-तार कर दिया है। इस गंभीर लापरवाही पर कड़ा संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने विवादित पुस्तक पर फिलहाल पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
NCERT Class 8 Textbook controversy: विवादित किताब पर बैन और व्यवस्था को कड़ी फटकार
NCERT की किताब के एक अध्याय में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ का न केवल उल्लेख किया गया, बल्कि उसे तथ्यों के रूप में बच्चों को परोसा जा रहा था। इसे शिक्षा जगत के मुंह पर एक करारा तमाचा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक छपाई की गलती नहीं, बल्कि युवा मस्तिष्क में लोकतंत्र के स्तंभों के प्रति जहर घोलने की गहरी साजिश या चरम लापरवाही है। (NCERT Class 8 Textbook controversy)
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की तीखी प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद केंद्र सरकार भी हरकत में आई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इसे विभाग के लिए एक काला दिन बताते हुए कहा कि, ”NCERT जैसी संस्था से ऐसी चूक होना बेहद दुखद और शर्मनाक है। यह केवल एक पाठ का मामला नहीं, बल्कि शिक्षा की शुचिता का प्रश्न है। इस कंटेंट को पास करने वाले अधिकारियों और लेखकों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होगी जो एक मिसाल बनेगी।” (NCERT Class 8 Textbook controversy)
NCERT का यह विवाद बताता है कि हमारे शिक्षा विभाग में जांच और संतुलन का तंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। जब बच्चों को पढ़ाने वाली किताबों में ही ज़हर घुला हो, तो भविष्य की नींव कैसी होगी? सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उन अधिकारियों के लिए एक चेतावनी है जो अपनी जिम्मेदारी को हल्के में लेते हैं।









