Kejriwal vs Justice Swarana Kanta Sharma 2026: दिल्ली शराब नीति केस में एक नया मोड़ आ गया है। दरअसल, दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अरविंद केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने जज बदलने की मांग की थी। यह विवाद अब सिर्फ एक केस का नहीं, बल्कि न्यायपालिका की साख का सवाल बन चुका है।
केजरीवाल के आरोप: ‘हितों का टकराव’ (Conflict of Interest)
अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे। यही वजह है कि उन्होंने केस को किसी दूसरे जज के पास भेजने की मांग की थी।
- पारिवारिक रिश्ते: केजरीवाल का दावा था कि जज के परिवार के सदस्य सरकारी वकील के तौर पर केंद्र से जुड़े हैं।
- सॉलिसिटर जनरल कनेक्शन: उन्होंने आरोप लगाया कि सॉलिसिटर जनरल के जरिए जज के परिजनों को केस मिलते हैं।
- पुराने फैसले: केजरीवाल ने दलील दी कि पहले भी जस्टिस शर्मा ने उनके खिलाफ कड़े आदेश दिए हैं।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा का कड़ा जवाब
जस्टिस शर्मा ने इन आरोपों को बेहद सख्त लहजे में खारिज कर दिया। दरअसल, उन्होंने कहा कि सिर्फ ‘शक’ के आधार पर जज को हटाना गलत है।
- शपथ का मान: जज ने कहा कि वे संविधान की शपथ लेकर बिना किसी डर या पक्षपात के काम करती हैं।
- न्याय व्यवस्था की मजबूती: उन्होंने साफ किया कि अगर आरोपी अपनी पसंद का जज चुनने लगे, तो पूरी न्याय प्रणाली कमजोर हो जाएगी।
- कर्तव्य से भागना: जस्टिस शर्मा ने कहा कि सुनवाई से पीछे हटना उनके कर्तव्य से भागने जैसा होगा।
यही वजह है कि उन्होंने इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता (Judicial Independence) पर हमला बताया। दरअसल, कोर्ट का मानना है कि बिना ठोस सबूत के किसी जज की ईमानदारी पर सवाल नहीं उठाए जा सकते।
क्या है ‘कैच-22’ की स्थिति?
कोर्ट ने अपने फैसले में एक बहुत ही रोचक स्थिति का जिक्र किया। दरअसल, इसे “Catch-22” सिचुएशन बताया गया।
- विकल्प 1: यदि वे खुद को अलग करतीं, तो संदेश जाता कि दबाव डालकर जज को हटाया जा सकता है।
- विकल्प 2: यदि वे अलग नहीं होतीं, तो भविष्य में आने वाले फैसले को ‘पूर्वाग्रह’ से ग्रसित बताया जाता।
परिणामस्वरूप, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी अपनी सुविधा के हिसाब से नैरेटिव नहीं बना सकता। यही नहीं, कोर्ट ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया।
केस की पृष्ठभूमि: बरी होने के बाद CBI की अपील
यह पूरा मामला दिल्ली शराब नीति 2021-22 से जुड़ा है। हालांकि, फरवरी 2026 में राउज एवेन्यू कोर्ट ने केजरीवाल और अन्य को बरी कर दिया था।
- निचली अदालत का फैसला: पर्याप्त सबूतों की कमी के कारण आरोपियों को ‘डिस्चार्ज’ कर दिया गया था।
- CBI की चुनौती: जांच एजेंसी ने इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
- अगली सुनवाई: अब जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ही इस मामले में CBI की अपील पर सुनवाई जारी रखेंगी।
न्यायपालिका बनाम राजनीति
यह फैसला साफ करता है कि कोर्ट किसी भी राजनीतिक दबाव या व्यक्तिगत धारणा के आधार पर नहीं चलेगा। अंततः, अब सबकी नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि क्या CBI के पास नए सबूत हैं या निचली अदालत का फैसला बरकरार रहेगा।









