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Lucknow से ‘लोकतंत्र’ का नया शंखनाद! विरोधियों के शोर को मात देने का ‘योगी फॉर्मूला’ तैयार! 86वें AIPOC में विपक्ष की घेराबंदी का बना अचूक प्लान

Lucknow

Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ आज एक ऐतिहासिक गवाह बनी है। यहाँ 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) का आगाज हो चुका है, जिसका उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया। लेकिन इस सम्मेलन की चमक केवल प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं है; राजनैतिक गलियारों में चर्चा है कि योगी सरकार ने इस मंच के जरिए विरोधियों को चित करने की एक ‘अनोखी पहल’ और ‘नई तकनीक’ दुनिया के सामने रख दी है।

Lucknow: संसदीय अनुशासन का नया युग

इस सम्मेलन में यूपी सरकार ने एक ऐसी नई सोच पेश की है, जिसने विपक्ष के पुराने ‘शोर-शराबे’ वाले फॉर्मूले की हवा निकाल दी है। इसे ‘संसदीय अनुशासन का नया युग’ भी कहा जा रहा है। आपको बता दें, उत्तर प्रदेश विधानसभा को जिस तरह से ‘डिजिटल और हाई-टेक’ बनाया गया है, उसने विरोधियों के पास मौजूद हंगामे के हर अवसर को तकनीकी रूप से सीमित कर दिया है।

योगी सरकार ने इस सम्मेलन के माध्यम से साफ संदेश दिया है कि जो विपक्ष सदन की कार्यवाही में बाधा डालेगा, उसे जनता की नजरों में ‘विकास विरोधी’ साबित करने की रणनीति तैयार है। यह एक ऐसी मनोवैज्ञानिक घेराबंदी है, जिसका कोई तोड़ फिलहाल विपक्ष के पास नहीं है। (Lucknow)

‘न्यू इंडिया’ की कार्यसंस्कृति

लखनऊ का यह सम्मेलन केवल चर्चा का केंद्र नहीं है, बल्कि यह उस ‘न्यू इंडिया’ की कार्यसंस्कृति है जहाँ विपक्ष का काम केवल विरोध करना नहीं, बल्कि अनुशासन के घेरे में रहना होगा। यूपी ने इस सम्मेलन की मेजबानी कर यह दिखा दिया है कि लोकतंत्र ‘लाठी’ से नहीं, बल्कि ‘नियमों की सख्ती’ से चलेगा। और इस सम्मेलन में यूपी सरकार ने एक और अनूठी तकनीक का प्रदर्शन किया। (Lucknow)

विधानसभा की कार्यवाही को सीधे जनता तक डिजिटल माध्यमों से जोड़ने की पहल ने विपक्ष की ‘बंद कमरा राजनीति’ को बेनकाब कर दिया है। और अब हर विधायक और सांसद की हरकत जनता के मोबाइल पर लाइव होगी। विपक्ष न तो सदन का बहिष्कार कर पाएगा और न ही बेवजह हंगामा, क्योंकि अब जनता खुद न्याय करेगी।

86वां AIPOC सम्मेलन सरकार का मास्टरस्ट्रोक

आपको बता दें कि, 86वां AIPOC सम्मेलन केवल पीठासीन अधिकारियों का जमावड़ा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार का वह ‘मास्टरस्ट्रोक’ है जिसने लोकतंत्र की मर्यादा के बहाने विरोधियों की राजनीति को हाशिए पर धकेलने का पूरा खाका तैयार कर लिया है। अब देखना होगा कि विपक्ष इस ‘अनुशासन के चक्रव्यूह’ से बाहर निकलने का क्या रास्ता खोजता है। (Lucknow)

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