Lucknow: उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार और बेईमानी के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अब आर्थिक अपराधियों पर कहर बनकर टूट रही है। लखनऊ में DGGI ने एक ऐसे सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है जो कागजों पर व्यापार दिखाकर सरकार की तिजोरी में सेंध लगा रहा था। यह कार्रवाई उन लोगों के लिए एक सीधी चेतावनी है जो समझते हैं कि वे व्यवस्था की आंखों में धूल झोंक सकते हैं।
Lucknow: DGGI ने बेनकाब किया ₹300 करोड़ का खेल
आपको बता दें, जीएसटी इंटेलिजेंस की टीमों ने एक साथ 19 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कोई सामान्य तलाशी नहीं थी, बल्कि बेईमानों के साम्राज्य को जड़ से उखाड़ने की शुरुआत थी। आरोपी कॉपर स्क्रैप के नाम पर फर्जी बिलिंग का जाल बुन रहे थे। इन्होंने ₹300 करोड़ का फर्जी टर्नओवर दिखाकर ₹50 करोड़ का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) हड़प लिया। (Lucknow)
फिलहाल, इस रैकेट के मास्टरमाइंड समेत 3 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। प्रशासन का संदेश साफ है—चाहे अपराधी कितना भी रसूखदार क्यों न हो, योगी सरकार का ‘हंटर’ उसे पाताल से भी खोज निकालेगा।
टैक्स चोरी का अंजाम—जेल और कुर्की
यह कार्रवाई उन सभी के लिए एक सबक है जो टैक्स चोरी या फर्जीवाड़े के जरिए राज्य के विकास में बाधा डाल रहे हैं। यूपी सरकार की एजेंसियां अब तकनीक और इंटेलिजेंस के साथ हर उस संदिग्ध लेनदेन पर नजर रख रही हैं जो कानून के खिलाफ है। अगर आपभी उत्तर प्रदेश की धरती पर रहकर सरकार और जनता के पैसे के साथ खिलवाड़ करोगे, तो उसका अंजाम जेल की कालकोठरी और संपत्तियों की कुर्की ही होगा। (Lucknow)









