Maharashtra Politics: बीएमसी चुनाव के नतीजों ने मुंबई की राजनीति में वह भूचाल ला दिया है जिसकी कल्पना शायद सत्ताधारी गठबंधन ने भी नहीं की थी। कल तक ‘ऑल इज वेल’ का दावा करने वाली महायुति के भीतर अब ‘महा-युद्ध’ के संकेत मिल रहे हैं। मुंबई के एक आलीशान फाइव स्टार होटल के बंद कमरों में शिंदे सेना के 29 पार्षदों का डेरा डालना इस बात की तस्दीक कर रहा है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।
Maharashtra Politics: सत्ता के समीकरण में बड़ा बदलाव
सूत्रों की मानें तो इन 29 पार्षदों को ‘सुरक्षित’ रखने के पीछे की वजह सिर्फ विपक्ष की सेंधमारी नहीं, बल्कि गठबंधन के भीतर का अविश्वास है। चर्चा है कि बीजेपी मुंबई में अपना मेयर चाहती है, जबकि एकनाथ शिंदे अपनी पकड़ ढीली नहीं करना चाहते।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि क्या ये 29 पार्षद वापस उद्धव कैंप की ओर देख रहे हैं? या फिर ये बीजेपी की किसी बड़ी योजना का हिस्सा हैं? फिलहाल खबर है कि कई पार्षद शिंदे गुट की कार्यशैली और टिकट वितरण से नाराज हैं। और यदि शिंदे सेना के पार्षद टूटते हैं, तो क्या बीजेपी निर्दलीयों के दम पर अपना गेम सेट कर चुकी है? आपको बता दें, मुंबई की राजनीति में रिजॉर्ट पॉलिटिक्स का मतलब साफ है—बहुमत खतरे में है या फिर भरोसे की कमी। क्या यह शिंदे सेना के अंत की शुरुआत है या फिर बीजेपी का मास्टरस्ट्रोक? (Maharashtra Politics)
फिलहाल गृह मंत्रालय के आला अफसर और दिल्ली के बड़े नेता पल-पल की रिपोर्ट ले रहे हैं। फाइव स्टार होटल के जिस फ्लोर पर ये पार्षद रुके हैं, वहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता। मोबाइल फोन बंद हैं और बाहरी संपर्क पूरी तरह कटा हुआ है। आखिर ऐसा क्या राज है जो इन बंद कमरों से बाहर नहीं आने दिया जा रहा?
महाराष्ट्र की राजनीति में ‘पिक्चर अभी बाकी है’। क्या नितिन नबीन के अध्यक्ष बनते ही बीजेपी महाराष्ट्र में कोई ‘बड़ा धमाका’ करने वाली है? या फिर उद्धव ठाकरे अपनी खोई हुई विरासत को वापस पाने के लिए इस ‘खेला’ के असली सूत्रधार हैं? फिलहाल अगले 24 घंटे मुंबई की सत्ता का भविष्य तय करेंगे। (Maharashtra Politics)









