Shankaracharya Avimukteshwaranand: धर्म की नगरी प्रयागराज से आज ऐसी तस्वीरें सामने आईं, जिसने ‘रामराज्य’ का दावा करने वाली व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। माघ मेले के पवित्र स्नान के दौरान, पुलिसिया तंत्र ने ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का न केवल रास्ता रोका, बल्कि उनके साथ मौजूद साधु-संतों पर बल प्रयोग भी किया। आरोप है कि पुलिस ने जबरन शंकराचार्य की पालकी छीन ली, जिसके कारण एक महान संत मोक्षदायिनी गंगा में डुबकी लगाने से वंचित रह गए।
शंकराचार्य का अपमान (Shankaracharya Avimukteshwaranand)
आपको बता दें, आस्था के ह्रदय पर चोट का यह दृश्य किसी युद्ध क्षेत्र जैसा था, जहाँ मंत्रोच्चार होने चाहिए थे, वहां पुलिस की चीख-पुकार और अफरा-तफरी मची थी। आपको बता दें, पुलिसकर्मियों ने शंकराचार्य की पालकी को घेर लिया और उसे खींचकर ले गए। और पालकी को बचाने की जब शिष्यों द्वारा कोशिश की गई तो, शिष्यों और संतों को पुलिस ने धक्का दिया और लाठियां भांजी। जिसके बाद भारी विरोध और घेराबंदी के बीच, शंकराचार्य स्नान नहीं कर पाए, जिसे सनातन परंपरा में एक बहुत बड़ा अपशकुन और अपमान माना जा रहा है। (Shankaracharya Avimukteshwaranand)
अखिलेश यादव ने भाजपा पर साधा निशाना
देखते ही देखते इस घटना ने उत्तर प्रदेश की सियासत में आग लगा दी है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लेते हुए भाजपा सरकार की जड़ों पर प्रहार किया है। उन्होंने इसे ‘आस्था का अपमान’ करार देते हुए नया नारा बुलंद किया है। ”जो सरकार संतों का सम्मान नहीं कर सकती, वह सनातन की संरक्षक कैसे हो सकती है? प्रयागराज में आज जो हुआ, वह भाजपा के ‘अहंकारी राज’ का अंत है। ढोंगी सरकार ने एक तरफ धर्म का चोला ओढ़ा है और दूसरी तरफ साक्षात शंकराचार्य का अपमान कर रही है। यह जनता की आस्था पर लाठीचार्ज है।” (Shankaracharya Avimukteshwaranand)
फिलहाल आपको बता दें, यह घटना यूपी की राजनीति में एक नया मोड़ ले सकती है। जहाँ एक तरफ भाजपा खुद को हिंदुत्व का ध्वजवाहक बताती है, वहीं शंकराचार्य के साथ इस तरह का व्यवहार विपक्ष को एक बड़ा हथियार दे गया है। अखिलेश यादव का यह वार सीधे उन मतदाताओं के दिल पर चोट कर रहा है, जो धर्म और संतों को सर्वोच्च मानते हैं।
प्रयागराज से काशी तक: श्रद्धालुओं का गुस्सा क्यों भड़का?
प्रयागराज से लेकर काशी तक, इस खबर ने श्रद्धालुओं के बीच गुस्से की लहर पैदा कर दी है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या अब संतों को अपने ही देश में पूजा और स्नान के लिए पुलिस से अनुमति और लाठियां खानी पड़ेंगी?
प्रयागराज की रेती पर आज जो धूल उड़ी है, वह आने वाले समय में सत्ता के गलियारों तक पहुंचेगी। शंकराचार्य का यह अपमान केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि उस परंपरा का अपमान है जिसके दम पर सत्ता की सीढ़ियां चढ़ी गई थीं। क्या प्रशासन इस ‘पाप’ का प्रायश्चित करेगा, या फिर राजनीति की बिसात पर आस्था इसी तरह कुचली जाती रहेगी? (Shankaracharya Avimukteshwaranand)









