Meerut Blue Drum Murder Case: उत्तर प्रदेश के मेरठ के सबसे सनसनीखेज मामलों में से एक, ‘नीले ड्रम हत्याकांड’ के दोषी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला ने जिला अदालत के फांसी के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है। मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत ने करीब 10 दिन पहले, 14 अक्टूबर 2026 को, दोनों दोषियों को मर्चेंट नेवी कर्मी सौरभ राजपूत की बेरहमी से हत्या करने और साक्ष्य मिटाने के जुर्म में ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामला मानते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। अब दोनों ने वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील शुक्ला के माध्यम से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
Meerut Blue Drum Murder Case: निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती
जिला जज अरविंद कुमार मिश्र की अदालत द्वारा 165 पन्नों का ऐतिहासिक फैसला सुनाए जाने के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत इसे पहले ही हाईकोर्ट की मंजूरी के लिए भेजा जा चुका था। इसी बीच, दोषियों के वकील सुशील शुक्ला ने बताया कि मुस्कान और साहिल की लिखित स्वीकृति मिलने के बाद आधिकारिक तौर पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर दी गई है। अपील में मेरठ जिला अदालत के फैसले को रद्द करने और सजा को कम करने की गुहार लगाई गई है।
क्या था ‘नीला ड्रम हत्याकांड’?
यह खौफनाक मामला मार्च 2025 का है, जब लंदन में कार्यरत मर्चेंट नेवी के अधिकारी सौरभ राजपूत मेरठ आए थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला के बीच अवैध संबंध थे। जब सौरभ को इस बात की भनक लगी, तो उन्होंने तलाक की इच्छा जताई थी, लेकिन परिवार के समझाने पर वे रुक गए। (Meerut Blue Drum Murder Case)
3-4 मार्च 2025- मुस्कान और साहिल ने मिलकर सौरभ को पहले नशीला पदार्थ दिया, फिर चाकू गोदकर उनकी हत्या कर दी। निर्ममता की हदें पार करते हुए उन्होंने शव के टुकड़े किए और उसे एक बड़े नीले प्लास्टिक के ड्रम में सीमेंट और रेत भरकर छिपा दिया। हत्या के बाद दोनों आरोपी हिमाचल प्रदेश भाग गए, लेकिन वे सौरभ के मोबाइल से परिवार को मैसेज करते रहे ताकि लगे कि सौरभ जीवित हैं और बिजनेस के सिलसिले में बाहर हैं। ड्रम को ठिकाने लगाने के दौरान मजदूरों को शक हुआ और उन्होंने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद 17 मार्च 2025 को शव बरामद हुआ।
18 मार्च 2025: पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर लिया।
मई 2025: पुलिस ने अदालत में करीब 1,000 पन्नों की पुख्ता चार्जशीट दाखिल की।
30 सितंबर 2026: करीब 13 महीने चले ट्रायल, 126 सुनवाइयों और 22 गवाहों के बयानों के आधार पर कोर्ट ने दोनों को हत्या का दोषी पाया। (Meerut Blue Drum Murder Case)
14 अक्टूबर 2026: अदालत ने दोनों को फांसी की सजा का ऐलान किया और 1.40 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
क्या हाईकोर्ट में अपील के बाद फांसी की सजा रुक जाएगी?
मुस्कान और साहिल की अपील के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या उनकी फांसी की सजा पर रोक लग जाएगी। इस मामले में कानूनी प्रक्रिया को समझना जरूरी है। भारत में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा को लागू करने से पहले हाईकोर्ट की पुष्टि जरूरी होती है। हाईकोर्ट मामले के सबूतों, कानूनी पहलुओं और सजा की समीक्षा करता है। दोषियों की अपील और मृत्युदंड की पुष्टि से जुड़ी कार्यवाही के बाद ही आगे की स्थिति साफ होती है।
हाईकोर्ट के पास निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखने, उसमें बदलाव करने या कानून के अनुसार अन्य उचित आदेश देने का अधिकार है। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि मुस्कान और साहिल की मौत की सजा रद्द हो जाएगी या बरकरार रहेगी। (Meerut Blue Drum Murder Case)
अब आगे क्या होगा?
मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला की अपील पर अब इलाहाबाद हाईकोर्ट में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगी और निचली अदालत के फैसले साथ ही उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा करेगी। अगर हाईकोर्ट को लगता है कि निचली अदालत के फैसले में कोई कानूनी गलती है, तो वह कानून के अनुसार उसमें बदलाव कर सकता है। वहीं, यदि अदालत फैसले को सही पाती है, तो उसे बरकरार भी रखा जा सकता है।
फिलहाल, मुस्कान और साहिल की फांसी की सजा पर अंतिम फैसला आना बाकी है। दोनों ने अपनी दोषसिद्धि और सजा को चुनौती दी है। अब इस चर्चित हत्याकांड में आगे की कानूनी प्रक्रिया और हाईकोर्ट का फैसला ही तय करेगा कि मामले की दिशा क्या होगी। (Meerut Blue Drum Murder Case)









