Mumbai Egg Donation Racket: मुंबई और उससे सटे ठाणे जिले के बदलापुर-उल्हासनगर क्षेत्र में आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के शोषण का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। देश की प्रमुख जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त सक्रियता के बाद अवैध रूप से मानव अंडाणु (एग्स) निकालने और बेचने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है।
शुरुआती जांच में इस अवैध धंधे के जरिए 40 से ज्यादा लाचार और गरीब महिलाओं के शारीरिक व मानसिक शोषण का गंभीर संदेह जताया गया है। यह मामला सिर्फ IVF नियमों के उल्लंघन का नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित वित्तीय धोखाधड़ी और मानव तस्करी से जुड़ा नेटवर्क काम कर रहा था, जिसके तार कई राज्यों और विदेशों तक फैले होने की आशंका है।
Mumbai Egg Donation Racket: कैसे उजागर हुआ यह काला कारोबार?
इस घिनौने रैकेट का पर्दाफाश तब हुआ जब एक पीड़ित महिला ने हिम्मत जुटाकर ठाणे पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई। महिला ने आरोप लगाया कि उसे पैसों का लालच देकर अवैध रूप से एग डोनेशन के दलदल में धकेला गया और उसकी सेहत के साथ खिलवाड़ किया गया। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनमें तीन महिलाएं शामिल हैं। आरोपियों के मोबाइल फोन और डिजिटल दस्तावेजों की जांच में इस सिंडिकेट के काम करने के खतरनाक तौर-तरीकों का पता चला है।
पैसे का लालच और बेदर्दी से शोषण
जांचकर्ताओं के मुताबिक, यह गिरोह मुख्य रूप से झोपड़पट्टियों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की उन महिलाओं को अपना निशाना बनाता था, जिन्हें पैसों की सख्त जरूरत होती थी। पीड़ित महिलाओं को हर मासिक चक्र के दौरान अपने अंडाणु निकालने के बदले 25,000 से 30,000 रुपये देने का प्रलोभन दिया जाता था। (Mumbai Egg Donation Racket)
अधिक से अधिक अंडाणु बनाने के लिए इन महिलाओं को बिना किसी योग्य डॉक्टर की निगरानी के अत्यधिक मात्रा में हार्मोनल इंजेक्शन्स दिए जाते थे। यह प्रक्रिया इन महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए जानलेवा साबित हो सकती थी। एक बार जब महिलाएं इस जाल में फंस जाती थीं, तो उन्हें डरा-धमकाकर लगातार इस अवैध काम को करने के लिए मजबूर किया जाता था।
ED की एंट्री और मनी लॉन्ड्रिंग का एंगल
इस मामले की गंभीरता और इसमें शामिल बड़ी रकम को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने वित्तीय लेनदेन और अवैध रूप से कमाए गए काले धन की जांच शुरू की है। पुलिस को संदेह है कि आईवीएफ क्लीनिकों और बिचौलियों के माध्यम से लाखों-करोड़ों रुपये का हेरफेर किया गया है। एग्स की अवैध खरीद-बिक्री से जो मोटी कमाई हुई, उसे ठिकाने लगाने के लिए हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग के रास्तों का इस्तेमाल किए जाने का अंदेशा है।
तेलंगाना और बेंगलुरु तक फैले हैं तार
पुलिस और जांच एजेंसियों की शुरुआती पड़ताल में यह साफ हो गया है कि यह रैकेट केवल मुंबई या महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है। इस सिंडिकेट के तार बेंगलुरु (कर्नाटक) और तेलंगाना जैसे राज्यों से भी जुड़े हुए हैं। इसके अलावा, मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पूर्व में हुई गिरफ्तारियों से यह भी संकेत मिले हैं कि इस तरह के अवैध गिरोहों का नेटवर्क बैंकॉक और अन्य देशों तक भी फैला हुआ है, जहां महिलाओं को अवैध एग डोनेशन और सरोगेसी के लिए भेजा जाता था। (Mumbai Egg Donation Racket)
एआरटी (ART) अधिनियम की उड़ाई गईं धज्जियां
भारत सरकार ने असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (Regulating ART) अधिनियम, 2021 के तहत एग डोनेशन और सरोगेसी के लिए बेहद कड़े नियम बनाए हैं। नियमों के मुताबिक, कोई भी महिला अपने जीवनकाल में केवल एक बार ही अंडाणु दान कर सकती है। एग डोनेशन के बदले किसी भी तरह का व्यावसायिक लेनदेन या नकद भुगतान पूरी तरह प्रतिबंधित है।
डोनेशन केवल रजिस्टर्ड और मान्यता प्राप्त एआरटी बैंकों या क्लीनिकों के माध्यम से ही किया जा सकता है।
इस रैकेट ने इन सभी कानूनी प्रावधानों को ताक पर रखकर एक ही महिला से कई-कई बार अंडाणु निकाले और उन्हें मोटी रकम पर निसंतान जोड़ों या आईवीएफ क्लीनिकों को बेच दिया। जांच एजेंसियां अब इस रैकेट में शामिल निजी अस्पतालों और डॉक्टरों की भूमिका की भी सघन जांच कर रही हैं। (Mumbai Egg Donation Racket)









