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नेपाल में ‘महारथियों’ का हिसाब: 20 साल की राजनीति रडार पर, ओली-प्रचंड समेत कई पूर्व PM जांच के घेरे में!

नेपाल की राजनीति में इस वक्त हड़कंप मचा हुआ है। सरकार ने पिछले 20 साल का कच्चा चिट्ठा खोलने का फैसला लिया है। प्रधानमंत्री बालेन शाह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग ने एक ‘हाई-पावर प्रॉपर्टी इन्वेस्टिगेशन कमीशन’ को मंजूरी दे दी है।


जांच के दायरे में दिग्गज नेता

यह जांच साल 2006 से 2026 तक के समय के लिए होगी। इस दौरान सार्वजनिक पदों पर रहे सभी बड़े नेताओं की संपत्ति खंगाली जाएगी। इसके साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों पर भी नजर रहेगी।

इस रडार पर नेपाल के सबसे बड़े नाम शामिल हैं। इसमें पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली, पुष्प कमल दहाल ‘प्रचंड’ और शेर बहादुर देउबा जैसे दिग्गज शामिल हैं। इसके अलावा डॉ. बाबूराम भट्टराई और माधव कुमार नेपाल की संपत्ति की भी गहराई से जांच होगी।


क्यों लिया गया यह सख्त फैसला?

दरअसल, यह कदम सरकार के ‘100-पॉइंट गवर्नेंस रिफॉर्म एजेंडा’ का हिस्सा है। सरकार करप्शन और अवैध संपत्ति पर सीधा प्रहार करना चाहती है।

  • पहला कारण: पिछले साल हुए ‘जेन-जी प्रोटेस्ट’ ने सिस्टम को हिला दिया था।
  • दूसरा कारण: जनता में भ्रष्टाचार को लेकर भारी गुस्सा है।
  • तीसरा कारण: सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करना जरूरी हो गया है।

हालांकि, इस जांच को दो चरणों में बांटा गया है। पहले फेज में 2006 से 2026 तक के रिकॉर्ड देखे जाएंगे। इसके बाद, दूसरे फेज में 1992 तक की पुरानी फाइलें भी खोली जा सकती हैं।


कौन करेगा जांच?

जांच को पारदर्शी बनाने के लिए एक मजबूत टीम बनाई गई है। इसकी कमान सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज राजेंद्र भंडारी को सौंपी गई है।

  • टीम में शामिल: पूर्व जज चंडी राज ढकाल और पूर्व डीआईजी गणेश केसी।
  • विशेषज्ञ: चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रकाश लम्साल को भी इसमें जगह मिली है।

यही वजह है कि इस बार जांच के केवल कागजी रहने की उम्मीद कम है। टीम पूरी तरह लीगल और एविडेंस-बेस्ड तरीके से काम करेगी।


सुरक्षा तंत्र की भी होगी समीक्षा

भ्रष्टाचार के अलावा सरकार ने एक और पैनल बनाया है। यह पैनल पिछले प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की भूमिका की जांच करेगा। दरअसल, उन प्रदर्शनों में 76 लोगों की जान गई थी। पूर्व जज प्रेम राज कार्की इसकी अध्यक्षता कर रहे हैं।

नेपाल में अब पावर और पैसे का पुराना स्ट्रक्चर खतरे में है। यदि यह जांच सही दिशा में आगे बढ़ती है, तो आने वाले दिनों में नेपाल की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। अब देखना यह है कि क्या बड़े नेता वास्तव में कानून के शिकंजे में आएंगे?

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