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नोएडा प्रशासन की घोर लापरवाही, सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत पर NGT ने लिया संज्ञान; डीएम से मांगा जवाब

Noida Engineer Death Case

Noida Engineer Death Case: राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) के कर्मियों ने शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में उस जगह का निरीक्षण किया, जहाँ 16-17 जनवरी की रात सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की पानी भरे गड्ढे में कार गिरने से मौत हो गई थी। NDRF ने घटना के कई दिन बाद उनकी कार बरामद की थी, और अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने भी खुद संज्ञान लिया है। इस मामले में बिल्डरों और अधिकारियों पर कार्रवाई हो रही है, जिसमें सुरक्षा नियमों की अनदेखी सामने आई है। 

एनजीटी ने स्थानीय अधिकारियों से मांगा जवाब (Noida Engineer Death Case)

यह निरीक्षण ऐसे समय में हो रहा है जब राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने घटना का खुद संज्ञान लेते हुए कथित पर्यावरणीय गैर-अनुपालन और लंबे समय से चल रही प्रशासनिक निष्क्रियता को लेकर कई राज्य और स्थानीय अधिकारियों से जवाब मांगा है।

NGT की प्रधान पीठ, जिसके अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल थे, उन्होंने मेहता की मृत्यु और उसके बाद की जांच से संबंधित मीडिया रिपोर्टों के आधार पर एक मूल आवेदन दर्ज किया। न्यायाधिकरण ने पाया कि जिस भूमि पर यह घटना घटी, वह मूल रूप से एक निजी मॉल परियोजना के लिए आवंटित की गई थी, लेकिन वर्षों से आसपास की आवासीय सोसाइ‌टियों से बारिश के पानी और अपशिष्ट जल के अनियंत्रित संचय के कारण एक स्थिर तालाब में बदल गई थी। (Noida Engineer Death Case)

मामले से जुड़े दो लोग गिरफ्तार

ग्रेटर नोएडा पुलिस ने मेहता की मौत के सिलसिले में लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और बिल्डर से जुड़े दो व्यक्तियों, रवि बंसल और सचिन करणवाल को भी गिरफ्तार किया है। इससे पहले, अभय कुमार, संजय कुमार, मनीष कुमार, अचल बोहरा और निर्मल कुमार सहित पांच अन्य व्यक्तियों के खिलाफ भी पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986, जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत उल्लंघन का हवाला देते हुए एफआईआर दर्ज की गई थी।

एफआईआर से पता चला कि गड्डा गहरा था, उस पर कोई बैरिकेड नहीं लगा था और वह अत्यधिक प्रदूषित पानी और कचरे से भरा हुआ था, जिससे दुर्गंध आ रही थी और आसपास के निवासियों को परेशानी हो रही थी। सार्वजनिक सड़क के पास स्थित यह गड्डा मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा था, क्योंकि वहां कोई चेतावनी संकेत या सुरक्षा उपाय मौजूद नहीं थे। (Noida Engineer Death Case)

यह जमीन लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन ने 2014 में खरीदी थी और बाद में 2020 में विज़टाउन को बेच दी गई, हालांकि कंपनी अभी भी इसमें एक महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखती है। अधिकारियों ने बताया कि जांच जारी रहने के साथ ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है, और एनजीटी पर्यावरण कानूनों और सार्वजनिक सुरक्षा मानदंडों के पालन की निगरानी कर रही है।

ग्रेटर नोएडा में युवराज मेहता की दुखद मौत (Noida Engineer Death Case)

बता दें, 16-17 जनवरी की रात, घने कोहरे के कारण युवराज मेहता की कार नोएडा सेक्टर 150 में एक निर्माण स्थल के पास गड्ढे में गिर गई थी। युवराज ने मदद के लिए फोन किया, लेकिन खराब दृश्यता और बचाव उपकरणों (रस्सी, सीढ़ी) की कमी के कारण बचाव दल को पहुंचने में दिक्कत हुई, जिससे करीब 90 मिनट तक वह मदद के लिए पुकारते रहे और कार डूब गई। (Noida Engineer Death Case)

कई दिनों बाद, 20 जनवरी को NDRF और SDRF टीमों ने पानी से भरी गहरी खाई से कार को निकाला। यह घटना निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी और अधिकारियों की लापरवाही को उजागर करती है, जिस पर अब NGT भी संज्ञान ले रहा है। 


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