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Owaisi Vs Congress :“ओवैसी ने ‘उमर-शरजील की बेल ना होनेपर कांग्रेस को बताया जिम्मेदार, जानिए इसके पीछे का पूरा सच”

असदुद्दीन ओवैसी द्वारा उमर खालिद और शरजील इमाम की रिहाई न होने के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराने का मामला इस समय राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

“जब न्याय की तराजू पर बरसों का इंतजार भारी पड़ने लगे, तो सियासत की आग भड़कना लाजिमी है। असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर कांग्रेस (Congress) के ‘सेकुलर’ चेहरे से नकाब हटाते हुए यह कहकर सनसनी मचा दी है कि उमर खालिद (Umar Khalid) और शरजील इमाम (Sharjeel Imam) की सलाखों के पीछे की असली वजह भाजपा की सख्ती नहीं, बल्कि कांग्रेस की बुनी हुई कानूनी बिसात है। आखिर क्यों ओवैसी (Owaisi) ने राहुल गांधी(Rahul Gandhi ) की ‘मोहब्बत की दुकान’ पर पुराने कानून का वार किया है? क्या वाकई कांग्रेस ने ही उन कानूनों की नींव रखी जिसने इन युवाओं के रास्ते बंद किए? आइए जानते हैं इस तीखे वार के पीछे के ठोस तथ्य।”

UAPA कानून का इतिहास

ओवैसी का सबसे बड़ा तर्क यह है कि जिस UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत उमर खालिद और शरजील इमाम सालों से बिना ट्रायल के जेल में हैं, उस कानून को सख्त बनाने की शुरुआत कांग्रेस के शासनकाल में हुई थी। ओवैसी के अनुसार, कांग्रेस ने ही इस कानून को इतना ‘दांतों वाला’ (Draconian) बनाया कि अब बेल मिलना लगभग नामुमकिन हो गया है।

‘सेकुलर’ चुप्पी पर सवाल

ओवैसी ने हालिया बयानों में कहा है कि कांग्रेस पार्टी चुनाव के दौरान मुस्लिम वोटों की बात तो करती है, लेकिन जब उमर खालिद जैसे युवाओं के मानवाधिकारों और उनकी बेल की बात आती है, तो कांग्रेस के बड़े नेता चुप्पी साध लेते हैं। ओवैसी इसे कांग्रेस का दोहरा मापदंड” करार देते हैं।

दिल्ली पुलिस और केंद्र का समीकरण

ओवैसी का आरोप है कि कांग्रेस ने अपने समय में ऐसी व्यवस्थाएं और एजेंसियां तैयार कीं, जिनका इस्तेमाल आज विपक्ष और मुस्लिम बुद्धिजीवियों के खिलाफ हो रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब संसद में UAPA संशोधनों पर बहस हो रही थी, तब कांग्रेस ने मजबूती से विरोध क्यों नहीं किया?

सच और उम्मीद में बहुत बड़ा अंतर

ओवैसी ने आगे बोला कि, ‘मैंने कहा था कि जमीनी हकीकत यह है कि सच और उम्मीद में बहुत बड़ा अंतर है। वर्दीधारी आदमी नफरत की भावना रखता है। मुस्लिम अक़्लियात के अनुसार यह एक सच्चाई है। मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि उनको 180 दिनों के लिए हिरासत में लिया जाएगा।’

ओवैसी ने क्यों दिया ऐसा बयान?

गौरतलब है कि ओवैसी का यह बयान, सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से उमर खालिद और शरजील इमाम की बेल अर्जी खारिज करने के बाद आया है। यह केस, 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़ा हुआ है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मीरान हैदर, गुलफिशा फातिमा, शिफा उर रहमान, शादाब अहमद और मोहम्मद सलीम खान को जमानत दे दी है।

Asaduddin Owaisi

उमर खालिद और शरजील इमाम दिल्ली दंगा साजिश मामले (FIR 59/2020) में लंबे समय से जेल में हैं। बार-बार उनकी बेल याचिकाएं अदालतों में तकनीकी कारणों और UAPA की सख्त धाराओं की वजह से टलती रही हैं। ओवैसी का मानना है कि अगर मुख्य विपक्षी दल (कांग्रेस) ने कानूनी और राजनीतिक स्तर पर दबाव बनाया होता, तो मानवाधिकारों का इतना उल्लंघन नहीं होता।

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