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भगवा चोला, दान पेटी… साधु वेश में संसद पहुंचे पप्पू यादव, जानें क्या कहते हैं संसद के नियम

Pappu Yadav Parliament Protest

Pappu Yadav Parliament Protest: बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव शुक्रवार को संसद परिसर में साधु के वेश में भगवा कपड़े पहनकर पहुंचे। उन्होंने अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे और चंदे में कथित हेराफेरी व अनियमितता के खिलाफ यह अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। पप्पू यादव भगवा चोला पहनकर और माथे पर तिलक लगाकर संसद भवन के ‘मकर द्वार’ के सामने एक दान पेटी लेकर बैठ गए।

Pappu Yadav Parliament Protest: विपक्ष ने संसद में दान पेटी के साथ किया प्रदर्शन

इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव और अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद सहित कई विपक्षी नेता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने उस दान पात्र में प्रतीकात्मक रूप से पैसे (चढ़ावा) भी डाले। विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर के चंदे में कथित ‘चढ़ावा चोरी’ को लेकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। साथ ही उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की संसद में अनुपस्थिति को लेकर भी सवाल उठाए।

उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता और बीजेपी नेताओं के अनुसार, राम मंदिर ट्रस्ट की अपील और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन पहले ही किया जा चुका है। कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने विपक्ष के इस प्रदर्शन को केवल ‘राजनीतिक लाभ’ लेने के लिए किया गया ‘ड्रामा’ करार दिया। (Pappu Yadav Parliament Protest)

संतों की नाराजगी और कानूनी नियम

काशी और अन्य जगहों के प्रमुख संतों जैसे स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने पप्पू यादव के इस रूप पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इस तरह का स्वांग रचकर सनातन धर्म के साधु-संतों को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है, और उन्होंने पप्पू यादव की संसद सदस्यता रद्द करने की मांग भी की है।

जानें क्या कहते हैं संसद के नियम

भारतीय संविधान और लोकसभा व राज्यसभा दोनों की नियम पुस्तकों में सांसदों के लिए कोई भी अनिवार्य ड्रेस कोड तय नहीं किया गया है। भारतीय संसद के नियमों के मुताबिक, सांसदों के लिए कोई आधिकारिक या लिखित ‘ड्रेस कोड’ तो तय नहीं है, लेकिन सदन के भीतर गरिमा, शालीनता और पवित्रता बनाए रखना अनिवार्य है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 31 जुलाई 2026 को सदन में स्पष्ट चेतावनी दी कि कोई भी सदस्य भेष बदलकर संसद में नहीं आ सकता। उन्होंने कहा कि “संसद भवन और संसद परिसर की मर्यादा व पवित्रता बनी रहनी चाहिए”। (Pappu Yadav Parliament Protest)

संसद के भीतर किसी भी प्रकार का नाटक करना, प्रतीकात्मक कपड़े पहनकर विरोध प्रदर्शन करना या तख्तियां लहराना नियमों के खिलाफ माना जाता है। यदि कोई सांसद सदन के नियमों का उल्लंघन करता है या अशोभनीय वेशभूषा में आता है, तो लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति को उनके खिलाफ कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है। ऐसे सांसदों को सदन से निलंबित भी किया जा सकता है।

अध्यक्ष पहले चेतावनी दे सकते हैं और सदस्य से वह व्यवहार बंद करने या फिर सदन से बाहर जाने के लिए कह सकते हैं। नियम 373 के तहत स्पीकर सदस्य का नाम ले सकते हैं, जिसके बाद उन्हें उस दिन के बाकी समय के लिए सदन से बाहर जाना पड़ता है। बार-बार या फिर गंभीर उल्लंघन के मामले में नियम 374 स्पीकर को यह अधिकार देता है कि वह व्यवहार की गंभीरता के आधार पर किसी सांसद को एक तय समय के लिए या फिर पूरे सत्र के लिए निलंबित कर सकते हैं। (Pappu Yadav Parliament Protest)

Vaishali
Author: Vaishali

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