Pratapgarh News: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करना समाजवादी पार्टी (सपा) के कार्यकर्ताओं को भारी पड़ गया है। बुधवार को अंबेडकर चौराहे पर CEC का पुतला दहन करने और निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने के आरोप में पुलिस ने 150 सपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इस कार्रवाई में 5 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि अन्य अज्ञात हैं।
Pratapgarh News: अंबेडकर चौराहे पर भारी हंगामा
यह पूरा मामला प्रतापगढ़ शहर के व्यस्त अंबेडकर चौराहे का है। मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार को दोपहर करीब 12 बजे समाजवादी पार्टी के नेताओं और सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक विशाल जुलूस निकाला और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। सपा कार्यकर्ता सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और चुनाव आयोग व केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करने लगे, जिससे वहां भारी जाम लग गया और राहगीरों व एम्बुलेंस आदि को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।
इसी दौरान, जब सपा कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला फूंकने का प्रयास किया, तो वहां पहले से तैनात भारी पुलिस बल ने उन्हें रोकने की कोशिश की। पुतले को छीनने और बुझाने की कोशिश के दौरान पुलिसकर्मियों और सपाईयों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। पुलिस द्वारा हल्का बल प्रयोग किए जाने के बाद गुस्साए कार्यकर्ता सपा सांसद और अन्य जनप्रतिनिधियों की अगुवाई में चौराहे पर ही धरने पर बैठ गए। (Pratapgarh News)
5 नामजद समेत 150 पर FIR दर्ज
प्रतापगढ़ के पुलिस उपाधीक्षक (नगर) आशुतोष मिश्रा के अनुसार, जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (पूर्ववर्ती धारा 144) के तहत निषेधाज्ञा लागू थी, और प्रदर्शनकारियों ने इसके लिए प्रशासन से कोई पूर्व अनुमति नहीं ली थी।
पुलिस के काम में बाधा डालने और सार्वजनिक स्थल पर आग का प्रयोग कर खतरा पैदा करने के आरोप में नगर कोतवाली पुलिस ने 5 नामजद आरोपियों—राम खेलावन यादव (सुखपाल नगर), जावेद अख्तर (तेलिया चौराहा), चंद्रशेखर पाल, चंद्रशेखर और संदीप यादव (ओझला) समेत करीब 150 अज्ञात कार्यकर्ताओं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं में केस दर्ज किया है। पुलिस अब धरना स्थल के वीडियो फुटेज और सीसीटीवी साक्ष्यों के आधार पर अन्य प्रदर्शनकारियों की पहचान करने में जुटी है। (Pratapgarh News)
विरोध प्रदर्शन के मुख्य कारण
सपा कार्यकर्ताओं का यह गुस्सा अचानक नहीं फूटा है, बल्कि यह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों (INDIA ब्लॉक) द्वारा चलाए जा रहे देशव्यापी अभियान की एक कड़ी है। हाल ही में दिल्ली में देश के 15 पूर्व नौकरशाहों और सामाजिक कार्यकर्ताओं जैसे पूर्व गृह सचिव जी.के. पिल्लई और पूर्व एलजी नजीब जंग ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक ‘पीपल्स इम्पीचमेंट नोटिस’ जारी किया है, जिसमें उन पर पद के दुरुपयोग और निष्पक्षता न बरतने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि ज्ञानेश कुमार तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें।
विपक्षी दलों का आरोप है कि अलग-अलग राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर मतदाता सूचियों से नाम हटाने या अनधिकृत रूप से जोड़ने में धांधली की गई है, जिस पर चुनाव आयोग मूकदर्शक बना रहा। वहीं, ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में उनके कुछ पारिवारिक रिश्तों को लेकर भी सवाल उठे हैं। उत्तर प्रदेश के संभल में 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान कुछ बूथों पर गड़बड़ी की शिकायतें आई थीं, जहां के रिटर्निंग ऑफिसर उनके दामाद थे। इन मुद्दों को लेकर विपक्ष सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ रहा है। (Pratapgarh News)
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और गरमाई सियासत
प्रतापगढ़ में हुई इस एफआईआर के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। सपा नेताओं ने पुलिस की इस कार्रवाई को पूरी तरह एकतरफा और लोकतंत्र विरोधी करार दिया है। सपा नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक देश में शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करना और अपनी मांगें उठाना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए पुलिस बल का दुरुपयोग कर रही है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी पूर्व में प्रतापगढ़ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सरकार को घेरा है।
वहीं दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और प्रशासनिक अधिकारियों का साफ कहना है कि किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जा सकती। बिना अनुमति के सड़कों को जाम करना, आम जनता को परेशान करना और सार्वजनिक स्थानों पर पुतला फूंककर सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करना पूरी तरह अवैध है। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई किसी राजनीतिक द्वेष से नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई है। (Pratapgarh News)
प्रतापगढ़ की इस घटना और इसके बाद दर्ज हुए मुकदमों ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग और प्रशासनिक कार्यवाहियों को लेकर सियासी पारा और अधिक चढ़ने वाला है।









