Premanand Maharaj Ashram: मथुरा-वृंदावन के प्रसिद्ध और देश-विदेश में विख्यात संत प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के आश्रम श्री हित राधा केली कुंज में इन दिनों व्यवस्थाओं को लेकर बेहद कड़े और अभूतपूर्व कदम उठाए गए हैं। यह बदलाव आश्रम के ही एक 25 वर्षीय युवा शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद लागू किए गए हैं।
इस दुखद घटना ने जहां एक ओर पूरे संत समाज और श्रद्धालुओं को झकझोर कर रख दिया है, वहीं दूसरी ओर आश्रम प्रबंधन ने आंतरिक व्यवस्था, सुरक्षा और मर्यादा को बनाए रखने के लिए दीक्षा, दर्शन और यहाँ तक कि शिष्यों की वेशभूषा को लेकर नए व सख्त दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं।
Premanand Maharaj Ashram: रसिक दुलारी शरण की संदिग्ध मौत
मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले दीपक लोधी लगभग दो साल पहले वृंदावन आए थे और उन्होंने प्रेमानंद महाराज जी से गुरु दीक्षा ग्रहण की थी। दीक्षा के बाद उनका आध्यात्मिक नाम रसिक दुलारी शरण रखा गया था। वह केली कुंज आश्रम के ही पास स्थित गुरु कृपा कुंज अपार्टमेंट की एक इमारत में रहते थे और आश्रम में बिजली मेंटेनेंस का काम संभालते थे।
25 सितंबर 2026 की सुबह लगभग 10:30 बजे, रसिक दुलारी शरण की गुरु कृपा कुंज की चौथी मंजिल से कूदकर दर्दनाक मौत हो गई। पुलिस की प्रारंभिक जांच और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर इसे पहली नजर में सुसाइड माना गया, लेकिन उनके कमरे से मिले साक्ष्यों जैसे एक इलेक्ट्रिक ग्राइंडर, फर्श पर खून के धब्बे और पोस्टमार्टम में उनके प्राइवेट पार्ट पर गंभीर कट व चोट के निशान मिलने के बाद यह मामला बेहद रहस्यमयी बन गया है। पुलिस, फोरेंसिक टीमें और SIT इस डेथ मिस्ट्री की गहराई से जांच कर रही हैं। (Premanand Maharaj Ashram)
केली कुंज आश्रम में ड्रेस कोड को लेकर नए नियम
रसिक दुलारी की मौत के बाद आश्रम की छवि और आंतरिक अनुशासन को बनाए रखने के लिए महाराज जी द्वारा शिष्यों की वेशभूषा को लेकर कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। सोशल मीडिया और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अब हर शिष्य को आश्रम का विशेष ‘बाना’ या वस्त्र पहनने की अनुमति नहीं होगी। अब तक आश्रम से जुड़े कई शिष्य सफेद या पीला अचला धारण करते थे। नए नियमों के मुताबिक, अब हर किसी को सफेद या पीला अचला पहनने की अनुमति नहीं होगी।
वे शिष्य जो गृहस्थ जीवन में हैं या किसी व्यवसाय/नौकरी से जुड़े हैं जैसे दुकान चलाना, ठेला लगाना, या अन्य निजी कार्य, उन्हें अब सामान्य वस्त्र या कुर्ता-पाजामा पहनना होगा। उन्हें विरक्त संतों वाले वस्त्र पहनने की सख्त मनाही कर दी गई है। यहां तक कि जो गृहस्थ शिष्य आश्रम में नियमित सेवा देते हैं, उन्हें भी अब सामान्य कपड़ों (कुर्ता-पाजामा) में ही आना होगा। (Premanand Maharaj Ashram)
आश्रम के विशिष्ट सफेद वस्त्र धारण करने की अनुमति अब केवल उन ‘विरक्त’ शिष्यों को दी जाएगी जो पूर्ण रूप से घर-बार छोड़ चुके हैं और दिन-रात केवल गुरुदेव और केली कुंज की सेवा में ही लीन रहते हैं। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य उन लोगों की पहचान स्पष्ट करना है जो पूर्णतः आध्यात्मिक मार्ग पर हैं और जो गृहस्थ जीवन के साथ भक्ति कर रहे हैं, ताकि समाज में किसी प्रकार का भ्रम न रहे।
दर्शन और दीक्षा कार्यक्रम पर लगी अनिश्चितकालीन रोक
घटना की गंभीरता को देखते हुए आश्रम ने भक्तों के लिए उपलब्ध कुछ प्रमुख सेवाओं को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। आश्रम में होने वाले ‘दीक्षा’ कार्यक्रम को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। यानी फिलहाल किसी भी नए शिष्य को दीक्षा नहीं दी जाएगी। महाराज जी के एकांत दर्शन या बातचीत के लिए जो टोकन सिस्टम चलता था, उसे भी बंद कर दिया गया है। यमुना विहार कुंज और केली कुंज दोनों स्थानों पर भक्तों की भीड़ और दर्शन की व्यवस्था को फिलहाल रोक दिया गया है। (Premanand Maharaj Ashram)
वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के लाखों अनुयायी हैं और उनका अनुशासन पूरे ब्रज में प्रसिद्ध है। रसिक दुलारी की मौत ने न केवल आश्रम को शोक में डाल दिया है, बल्कि सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े किए हैं। नए नियमों के जरिए आश्रम प्रबंधन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि शिष्यों के बीच स्पष्ट वर्गीकरण हो और भविष्य में ऐसी किसी भी संदिग्ध गतिविधि या अनुशासनहीनता को रोका जा सके। फिलहाल, जो भक्त वृंदावन जाकर महाराज जी के दर्शन या दीक्षा की योजना बना रहे थे, उन्हें आश्रम की अगली सूचना का इंतजार करना होगा।









