राजनाथ सिंह ने सीमा सड़क संगठन पर रक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की

Rajnath Singh

Rajnath Singh: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 25 मार्च, 2026 को नई दिल्ली में सीमा सड़क संगठन (BRO) पर रक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में रक्षा, अवसंरचना विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा एवं परिचालन तत्परता को मजबूत करने के उद्देश्य से चल रही रणनीतिक पहलों से संबंधित मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

सीमावर्ती क्षेत्रों में अवसंरचना: राष्ट्रीय सुरक्षा की मजबूत नींव (Rajnath Singh)

सीमावर्ती क्षेत्रों में सुदृढ़ अवसंरचना की आवश्यकता पर बल देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि बीआरओ राष्ट्रीय सुरक्षा, विकास और संपर्क को समाहित करने वाला एक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रहा है। उन्होंने उत्तर-पूर्वी क्षेत्र और वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क बढ़ाने के लिए बीआरओ के प्रयासों की सराहना की, जिससे सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास में योगदान मिल रहा है।

भारत-म्यांमार सीमा पर बढ़ता इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क

रक्षा मंत्री (Rajnath Singh) ने कहा कि बीआरओ ने रक्षा बलों की आवाजाही को सुगम बनाया है और निवासियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में काम किया है। उन्होंने आगे कहा कि बीआरओ को लगभग 1,600 किलोमीटर लंबी भारत-म्यांमार सीमा पर अवसंरचना विकसित करने का कार्य सौंपा गया है, जिससे सीमा प्रबंधन क्षमताओं को और मजबूती मिलेगी।

1000 से अधिक परियोजनाएं: हर मौसम में कनेक्टिविटी का लक्ष्य

सीमा संपर्क को और मजबूत करने के उद्देश्य से 1,000 से अधिक सड़क और अवसंरचना परियोजनाओं को क्रियान्वित किया जा रहा है, जिनमें नए निर्माण, उन्नयन और रखरखाव कार्य शामिल हैं। इस बैठक में सीमा सड़क विकास कार्यक्रम 2023-28 के तहत हुई प्रगति पर भी चर्चा की गई।

रक्षा मंत्री (Rajnath Singh) ने जोर देते हुए कहा कि इस नेटवर्क के माध्यम से दूरस्थ और उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी हर मौसम में संपर्क सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे परिचालन गतिशीलता और रक्षा तैयारियों को मजबूती मिल रही है।

राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने कहा कि बीआरओ ने अपने काम की गुणवत्ता और गति दोनों में सुधार किया है। यह दर्शाता है कि हम भविष्य के लिए तैयार बुनियादी ढांचा बना रहे हैं। उन्होंने बजटीय सहायता, आधुनिक उपकरणों और कर्मियों के कल्याण के उद्देश्य से शुरू की गई पहलों के माध्यम से बीआरओ को मजबूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

बीआरओ की उपलब्धियां: सड़कों से सुरंगों तक का सफर

सीमा सड़क महानिदेशक (DGBR) लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने सदस्यों को बीआरओ की भूमिका, प्रमुख उपलब्धियों, कठिन भूभाग और चरम जलवायु परिस्थितियों में आने वाली चुनौतियों और आपदा प्रबंधन में इसके योगदान सहित व्यापक जानकारी प्रदान की।

1960 में स्थापित बीआरओ ने 64,000 किलोमीटर से अधिक सड़कों, 1,179 पुलों, 22 हवाई अड्डों और 7 सुरंगों का निर्माण किया है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में परिचालन तत्परता और सामाजिक-आर्थिक विकास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बीआरओ द्वारा निष्पादित प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं और उत्तरी सीमा के साथ सड़कों के विकास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर भी जोर दिया गया। (Rajnath Singh)

2047 के विकसित भारत में बीआरओ की भूमिका

समिति को बताया गया कि सीमावर्ती अवसंरचना के विकास से परिचालन तत्परता में सुधार हुआ है और सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास में तेजी आई है, जिससे 2047 तक विकसित भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को साकार करने में योगदान मिला है। अफगानिस्तान, भूटान, म्यांमार और ताजिकिस्तान जैसे मित्र देशों में परियोजनाओं के क्रियान्वयन में बीआरओ की भूमिका पर भी जोर दिया गया। (Rajnath Singh)

सीमित कार्य अवधि, भूमि अधिग्रहण संबंधी समस्याओं और पर्यावरण संबंधी स्वीकृतियों की चुनौतियों पर जोर देते हुए, डीजीबीआर ने बीआरओ की क्षमता वृद्धि और आधुनिक निर्माण तकनीकों को अपनाने पर बल दिया ताकि त्वरित और अधिक टिकाऊ बुनियादी ढांचा तैयार किया जा सके। उन्होंने मानव संसाधन पहलों के अंतर्गत बीआरओ कर्मियों, विशेष रूप से अस्थायी श्रमिकों के लिए किए जा रहे कल्याणकारी उपायों की सराहना की।

डीजीबीआर ने बीआरओ की अनूठी क्षमता को दोहराया कि यह एक विशिष्ट संगठन है जो सैन्य मूल्यों को इंजीनियरिंग उत्कृष्टता के साथ जोड़ता है, जिससे उच्च ऊंचाई वाले और दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यों का त्वरित क्रियान्वयन और निष्पादन संभव हो पाता है। (Rajnath Singh)

रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी कामत, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, पूर्व सैनिक कल्याण सचिव सुकृति लिखी, रक्षा सेवाओं के वित्तीय सलाहकार राज कुमार अरोरा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।


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