Rajya Sabha Elections 2026: उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले द्विवार्षिक चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। बुधवार, 30 सितंबर 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) के दो उम्मीदवारों पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव और उद्योगपति धनराज परिमल नथवानी ने अपने नामांकन पत्र दाखिल कर दिए हैं। लखनऊ स्थित विधानसभा भवन में नामांकन के इस मौके पर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव खुद मौजूद रहे।
सपा द्वारा प्रो. रामगोपाल यादव को दोबारा उच्च सदन में भेजने का फैसला, जहां अपेक्षित माना जा रहा था, वहीं कॉर्पोरेट जगत के युवा चेहरे धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाकर अखिलेश यादव ने राजनीतिक पंडितों और विपक्षी दलों को पूरी तरह चौंका दिया है।

Rajya Sabha Elections 2026: नामांकन प्रक्रिया और सियासी ताकत का प्रदर्शन
बुधवार सुबह करीब 11 बजे सपा प्रमुख अखिलेश यादव की अगुवाई में दोनों उम्मीदवारों ने निर्वाचन अधिकारी के सामने पर्चा भरा। इस दौरान सपा खेमे में भारी उत्साह देखा गया। उत्तर प्रदेश विधानसभा में सीटों के मौजूदा समीकरण और विधायकों की संख्या के आधार पर सपा के इन दोनों उम्मीदवारों की जीत पूरी तरह तय मानी जा रही है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इस बात की सबसे अधिक चर्चा है कि अखिलेश यादव तीसरे उम्मीदवार को लेकर क्या रणनीति अपनाते हैं, क्योंकि सपा लगातार अपने तीसरे प्रत्याशी को उतारने की संभावनाओं पर विचार कर रही है।
एक तरफ तजुर्बा, दूसरी तरफ कॉर्पोरेट चमक
सपा ने इस बार अपने दोनों टिकटों के जरिए दो बिल्कुल अलग क्षेत्रों और रणनीतियों का संतुलन साधने का प्रयास किया है।
प्रो. रामगोपाल यादव: सपा के वैचारिक और संगठनात्मक स्तंभ
प्रो. रामगोपाल यादव लंबे समय से भारतीय राजनीति और संसद में एक जाना-माना नाम हैं। वे सपा के राष्ट्रीय महासचिव और थिंक-टैंक के प्रमुख सदस्य हैं। वे 2008 से लगातार राज्यसभा सदस्य के रूप में पार्टी की आवाज बुलंद कर रहे हैं। इससे पहले वे लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं। समाजवादी कुनबे में रामगोपाल यादव को नियमों, संविधान और रणनीतिक निरंतरता का चेहरा माना जाता है। उनका आगामी नवंबर में कार्यकाल समाप्त हो रहा था, जिसके मद्देनजर पार्टी ने उन पर फिर से भरोसा जताया है। (Rajya Sabha Elections 2026)
धनराज परिमल नथवानी: अखिलेश का सबसे बड़ा ‘सरप्राइज’
धनराज परिमल नथवानी की उम्मीदवारी ने उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। 40 वर्षीय धनराज, जाने-माने उद्योगपति और चार बार के राज्यसभा सांसद परिमल नथवानी के पुत्र हैं।धनराज नथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के ग्रुप प्रेसिडेंट हैं और जामनगर व वडोदरा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का कामकाज देखते हैं। इसके अलावा वे रिलायंस न्यू एनर्जी लिमिटेड के निदेशक भी हैं। वे वर्तमान में गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (GCA) के अध्यक्ष हैं और प्रसिद्ध द्वारकाधीश मंदिर प्रशासनिक समिति के उपाध्यक्ष भी हैं।
नथवानी परिवार को देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने अंबानी परिवार और शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व का बेहद करीबी माना जाता है। उनके पिता परिमल नथवानी ने कुछ ही महीने पहले झारखंड में एनडीए के समर्थन से राज्यसभा चुनाव में जीत हासिल की थी। अब सपा द्वारा उनके बेटे को उत्तर प्रदेश से राज्यसभा भेजना बड़े रणनीतिक बदलाव की ओर इशारा करता है। (Rajya Sabha Elections 2026)
राज्यसभा का चुनावी अंकगणित और समीकरण
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव का फॉर्मूला विधायकों की संख्या पर आधारित होता है। 10 सीटों पर आगामी 16 अक्टूबर 2026 को मतदान होना है। उत्तर प्रदेश में मौजूदा विधायक संख्या के आधार पर एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए कम से कम 37 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता है। समाजवादी पार्टी और उसके सहयोगियों के पास विधानसभा में लगभग 100 विधायक हैं। इस लिहाज से दो सीटों पर उनके उम्मीदवारों (रामगोपाल और धनराज) की जीत बिना किसी बाधा के सुनिश्चित है।
यदि सपा अपने तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने का फैसला करती है, तो उसे करीब 12 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। पूर्व सांसद सलीम इकबाल शेरवानी जैसे नेताओं ने भी अपनी दावेदारी पेश की है। तीसरे उम्मीदवार के आते ही यह चुनाव निर्विरोध होने के बजाय बेहद दिलचस्प और क्रॉस-वोटिंग की संभावनाओं वाला मुकाबला बन जाएगा। (Rajya Sabha Elections 2026)
विपक्ष का हमला और PDA पर सवाल
धनराज नथवानी को टिकट दिए जाने के बाद विपक्षी खेमे, खासकर एनडीए के सहयोगियों ने सपा को घेरना शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने तीखा तंज कसते हुए सपा के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे पर सवाल उठाए हैं। राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव पिछड़े और दलितों की बात तो करते हैं, लेकिन राज्यसभा जैसे ऊंचे पदों पर धनकुबेरों, उद्योगपतियों और अपने परिवार के लोगों को तरजीह देते हैं। उन्होंने अखिलेश को यह सलाह भी दी कि “तीन सीटों के फेर में कहीं वे अपनी दूसरी सीट भी न गंवा बैठें”।
2027 की तैयारियों का शंखनाद?
अखिलेश यादव द्वारा एक कद्दावर समाजवादी रणनीतिकार के साथ देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट नेटवर्क से जुड़े युवा चेहरे को राज्यसभा भेजना महज एक चुनावी कदम नहीं है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि इसके जरिए सपा कॉर्पोरेट जगत के साथ अपने संबंधों को नए सिरे से स्थापित करना चाहती है, जो 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी के आर्थिक और रणनीतिक प्रबंधन में अहम भूमिका निभा सकता है।
फिलहाल, 6 अक्टूबर तक नामांकन की आखिरी तारीख है। अब देखना यह होगा कि बीजेपी अपने आठवें उम्मीदवार और सपा अपने तीसरे उम्मीदवार को लेकर क्या पत्ते खोलती है, जिससे 16 अक्टूबर का मुकाबला और भी रोमांचक हो सकता है। (Rajya Sabha Elections 2026)









