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UP: राम मंदिर चंदे की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा; जानें पूरा मामला

Ram Mandir Donations Row

Ram Mandir Donations Row: अयोध्या के राम मंदिर में दान की कथित अनियमितताओं को उजागर करने वाले स्वतंत्र पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने गाजियाबाद पुलिस द्वारा दर्ज FIR को चुनौती देते हुए देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है। गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में उनके खिलाफ दर्ज इस FIR में कथित रोड-रेज की घटना का हवाला दिया गया है। पत्रकार ने इसे सत्ता द्वारा बदले की कार्रवाई करार देते हुए अपनी सुरक्षा और स्वतंत्र जांच की गुहार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले पर त्वरित सुनवाई करने के लिए सहमत हो गई है।

Ram Mandir Donations Row: राम मंदिर चंदे का विवाद

पत्रकार अभिषेक उपाध्याय अपने स्वतंत्र डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म “टॉप सीक्रेट” के माध्यम से उत्तर प्रदेश में कथित प्रशासनिक भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों पर रिपोर्टिंग करते रहे हैं। अभिषेक उपाध्याय ने जून 2026 में अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर में मिलने वाले चढ़ावे और दान के प्रबंधन में बड़े पैमाने पर हेराफेरी तथा ‘चोरी’ का दावा करते हुए कई खोजी रिपोर्ट प्रकाशित की थीं। उनकी शुरुआती खबरों के बाद उपजे भारी विवाद के कारण उत्तर प्रदेश सरकार को एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन करना पड़ा था।

एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर 25 जून 2026 को अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में राम मंदिर ट्रस्ट के एक पदाधिकारी की शिकायत पर 8 नामजद और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके अलावा, उन्होंने हाल ही में (19 अगस्त 2026 को) भदोही में तैनात एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी द्वारा नियमों को ताक पर रखकर कृषि भूमि खरीदने के मामले का भी खुलासा किया था। उपाध्याय का दावा है कि राज्य प्रशासन के इन रसूखदार हिस्सों को बेनकाब करने के कारण ही वे लगातार सरकार की आंखों की किरकिरी बने हुए हैं। (Ram Mandir Donations Row)

गाजियाबाद FIR: रोड-रेज का कथित मामला

ताजा विवाद गाजियाबाद के इंदिरापुरम पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR संख्या 678/2026 से जुड़ा है। निक्की गौतम नामक एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई कि 18 अगस्त 2026 को शिप्रा मॉल (गाजियाबाद) के पास एक बलेनो कार ने उसकी मोटरसाइकिल को पीछे से टक्कर मार दी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कार चालक ने उसे जातिसूचक गालियां दीं और धमकी दी। शिकायत में वाहन का संबंध अभिषेक उपाध्याय से जोड़ा गया।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के साथ-साथ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) और आईटी एक्ट की गंभीर धाराएं जोड़ दीं। (Ram Mandir Donations Row)

पत्रकार के आरोप: “मनगढ़ंत और प्रायोजित” कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में अभिषेक उपाध्याय ने गाजियाबाद पुलिस की इस पूरी कार्रवाई को आधारहीन और मनगढ़ंत बताया है। याचिका में कहा गया है कि कथित रोड-रेज की घटना पूरी तरह से ‘प्लांटेड’ है, ताकि उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा सके। शिकायत में जिस मोटरसाइकिल का नंबर दर्ज है, उसका शिकायतकर्ता निक्की गौतम से कोई कानूनी संबंध नहीं है और न ही वह घटना से मेल खाती है।

याचिका के अनुसार, 20 अगस्त 2026 की रात करीब 10:30 बजे और फिर उसके बाद दर्जनों पुलिसकर्मियों ने उनके गाजियाबाद स्थित आवास पर छापा मारा। उस वक्त पत्रकार घर पर मौजूद नहीं थे, केवल उनकी पत्नी और दो बेटियां थीं, जिन्हें डराया-धमकाया गया। (Ram Mandir Donations Row)

पत्रकार ने आरोप लगाया कि बार-बार अनुरोध करने के बाद भी गाजियाबाद पुलिस ने उन्हें एफआईआर की पूरी कॉपी नहीं दी। यहां तक कि उन्हें गुमराह करने के लिए लखनऊ के किसी पुराने (2025 के) मामले की प्रति थमा दी गई। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि गाजियाबाद पुलिस घटनास्थल के आसपास के दुकानदारों पर दबाव बना रही है कि वे उस समय के CCTV फुटेज को डिलीट कर दें, ताकि सच सामने न आ सके।

सुप्रीम कोर्ट का रुख और मांगी गई राहत

अभिषेक उपाध्याय ने गंभीर शारीरिक नुकसान और तत्काल गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने के बजाय सीधे संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

पत्रकार द्वारा मांगी गई प्रमुख राहत

  • गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में दर्ज एफआईआर को पूरी तरह से रद्द किया जाए।
  • मामले की सुनवाई पूरी होने तक पुलिस द्वारा किसी भी दंडात्मक या दमनकारी कार्रवाई (गिरफ्तारी) पर रोक लगाई जाए।
  • यदि जांच आवश्यक पाई जाती है, तो इसे उत्तर प्रदेश पुलिस से छीनकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) या दिल्ली पुलिस जैसी किसी निष्पक्ष स्वतंत्र एजेंसी को सौंपा जाए। (Ram Mandir Donations Row)

सुप्रीम कोर्ट में उनके वकील ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता किसी भी वैध और निष्पक्ष जांच में सहयोग करने के लिए तैयार है, बशर्ते उसे राज्य पुलिस के उत्पीड़न से न्यायिक संरक्षण मिले। मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने मामले के महत्व को देखते हुए इसे 25 अगस्त 2026 को ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की आजादी पर बहस

यह पहला मौका नहीं है जब अभिषेक उपाध्याय को अपनी रिपोर्टिंग के लिए कानूनी लड़ाइयों का सामना करना पड़ा है। इससे पहले अक्टूबर 2024 में भी उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश में एक रिपोर्ट को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। उस समय शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि “सिर्फ इसलिए किसी पत्रकार के खिलाफ आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता क्योंकि उसकी रिपोर्टिंग को सरकार की आलोचना के रूप में देखा जा रहा है।” (Ram Mandir Donations Row)

इस नए मामले ने देश के भीतर स्वतंत्र पत्रकारों, विपक्षी नेताओं (जैसे कांग्रेस के पवन खेड़ा, आप के संजय सिंह) और नागरिक समाज का ध्यान आकर्षित किया है। पत्रकारों के संगठनों का कहना है कि भ्रष्टाचार और संवेदनशील मुद्दों को उठाने वाले स्वतंत्र खोजी पत्रकारों को चुप कराने के लिए अक्सर ‘रोड-रेज’ या अन्य सामान्य आपराधिक धाराओं (जैसे SC/ST एक्ट) का सहारा लेकर उनका व्यक्तिगत और पारिवारिक उत्पीड़न किया जाता है।

अयोध्या राम मंदिर चंदे की गड़बड़ी को उजागर करने वाले पत्रकार बनाम गाजियाबाद पुलिस का यह मामला केवल एक व्यक्ति की कानूनी लड़ाई नहीं है, बल्कि यह इस बात का पैमाना भी है कि देश में खोजी पत्रकारिता कितनी सुरक्षित है। अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि कानून का शासन स्वतंत्र आवाज की रक्षा करता है या पुलिसिया कार्रवाई के दावों को सही ठहराता है। (Ram Mandir Donations Row)


Vaishali
Author: Vaishali

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