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Rishikesh Karnprayag Rail Project: उत्तराखंड में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल संपर्क का निर्माण कार्य जारी, जानें कब तक होगा पूरा

Rishikesh Karnprayag Rail Project

Rishikesh Karnprayag Rail Project: उत्तराखंड में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल संपर्क का निर्माण कार्य प्रगति पर है और इसे 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है। यह 125 किलोमीटर लंबी परियोजना है, जिसमें लगभग 104 किलोमीटर का हिस्सा 16 सुरंगों से होकर गुजरेगा और शेष भाग पुलों व स्टेशनों पर आधारित होगा।

सुरंगों का करीब 90% काम पूरा हो चुका है और स्टेशन निर्माण का काम भी तेजी से किया जा रहा है। 125.20 किलोमीटर से अधिक लम्बी यह परियोजना भारतीय रेलवे इंजीनियरिंग में एक मील का पत्थर है, जिसका 83.07 प्रतिशत मार्ग सुरंगों से होकर गुजरता है।

Rishikesh Karnprayag Rail Project: सुरंगों की दुनिया

कुल 104 किलोमीटर लंबी 16 मुख्य सुरंगें और 97.72 किलोमीटर लंबी 12 निकासी सुरंगें, साथ ही 7.05 किलोमीटर लंबे क्रॉस-पैसेज का निर्माण किया जा रहा है। सबसे लंबी सुरंग अकेले 14.58 किलोमीटर लंबी है, जो इस परियोजना के चुनौतीपूर्ण भूभाग को दर्शाती है।

गौचर, श्रीनगर और देवप्रयाग पुलों की विशेषताएँ

रेल मंत्रालय के मुताबिक, इस रेल संपर्क में 14 रेल पुल शामिल हैं, जिनमें से पाँच को महत्वपूर्ण और प्रमुख श्रेणी में रखा गया है। इन पुलों की कुल लंबाई 3,076 मीटर है, जिनमें सबसे ऊँचा गौचर पुल (Br-15) है, जिसकी ऊँचाई 46.99 मीटर है। श्रीनगर पुल (Br-09) की अधिकतम लंबाई 489 मीटर है और देवप्रयाग पुल (Br-06) की लंबाई सबसे ज़्यादा 125 मीटर है। (Rishikesh Karnprayag Rail Project) 

रेल अवसंरचना के अलावा, इस परियोजना में छह सड़क पुल, दो सड़क ओवरब्रिज और 38 छोटे पुल भी शामिल हैं, जो निर्बाध बहु-मॉडल एकीकरण सुनिश्चित करते हैं। मार्ग पर बारह नए स्टेशनों की योजना बनाई गई है, जिससे स्थानीय पहुँच और आर्थिक संभावनाओं में और वृद्धि होगी। एक अन्य महत्वपूर्ण घटक 18.43 किलोमीटर की खुली कटाई और तटबंध है, जो पूरे मार्ग का 14.72 प्रतिशत है, जो क्षेत्र की चुनौतीपूर्ण स्थलाकृति को समायोजित करता है।

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग नई ब्रॉडगेज लाइन के साथ ही राज्य में 12 नए स्टेशन भी निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा, रेल मंत्रालय ने 213 किलोमीटर में से 201 किलोमीटर सुरंग का काम पूरा कर लिया है। ये बुनियादी ढाँचे संबंधी पहल कर्णप्रयाग तक निर्बाध पहुँच प्रदान करेंगी और 5 प्रमुख जिलों में रेल संपर्क को नया आयाम देंगी।

रेल मंत्रालय का लक्ष्य दूरदराज क्षेत्रों को मुख्य नेटवर्क से जोड़ना

रेलवे के अनुसार, इसका प्राथमिक लक्ष्य उत्तराखंड के दूरदराज के इलाकों को मुख्य रेलवे नेटवर्क से जोड़ना है, जिससे यात्रा का समय कम हो सके और तीर्थयात्रियों व स्थानीय निवासियों दोनों को लाभ मिल सके। परियोजना सक्रिय रूप से निर्माणाधीन है, जिसमें सुरंग बनाने और पुल निर्माण पर प्रमुखता से ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। एक बार पूरा हो जाने पर, यह लाइन ऋषिकेश और कर्णप्रयाग के बीच यात्रा के समय को काफी कम कर देगी और क्षेत्र में पर्यटन और व्यापार के लिए नए अवसर खोलेगी। (Rishikesh Karnprayag Rail Project)


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